- राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने रिटायर्ड एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को नया CEO नियुक्त किया है
- स्वामी गोविंद देव गिरि को महामंत्री पद सौंपा गया है, जिन्होंने चंपत राय की जगह ली है
- न्यास में महेश भागचंदका को कोषाध्यक्ष और मदन मोहन पांडे तथा डॉ निर्मला यादव को नए न्यासी नियुक्त किया गया है
अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पहले CEO समेत कई नए पदाधिकारी नियुक्त किए हैं. ट्रस्ट ने भारतीय वायुसेना के रिटायर्ड एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को सीईओ बनाया है.वहीं स्वामी गोविंद देव गिरि को महामंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई है. उन्होंने चंपत राय की जगह ली है. इसके साथ ही न्यास में रिक्त तीन पदों पर महेश भागचंदका, मदन मोहन पांडे और डॉ. निर्मला यादव को नया न्यासी नियुक्त किया गया है.
महामंत्री बने स्वामी गोविंद गिरी
स्वामी गोविंद देव गिरि अब महामंत्री की जिम्मेदारी संभालेंगे, जबकि महेश भागचंदका कोषाध्यक्ष का दायित्व निभाएंगे. न्यासियों ने पिछले दो महीनों की कठिन और चुनौतीपूर्ण अवधि में महामंत्री पद की जिम्मेदारी संभालने के लिए कृष्ण मोहन जी की सराहना की और उनके प्रति आभार जता. बैठक में मंदिर में आने वाले चढ़ावे की नदद राशि की गणना की प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप कम करने पर भी जोर दिया गया.
ट्रस्ट के अनुसार, इस संबंध में दो बैंकों और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) से प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं. इन प्रस्तावों का मूल्यांकन किया जा रहा है और तकनीक की सहायता से इस दिशा में जल्द आगे बढ़ने की तैयारी है. न्यासियों ने कथित वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित मामले में एसआईटी की जांच और उच्चतम न्यायालय में हुई कार्रवाई की भी समीक्षा की. न्यास ने सर्वोच्च न्यायालय के उस आदेश का स्वागत किया, जिसके तहत जांच का दायरा कालखंड और विषय, दोनों स्तर पर विस्तृत किया गया है.
ट्रस्ट ने कहा कि विस्तृत जांच से वास्तविक तथ्य सामने आने और जनमानस में पैदा हुए किसी भी भ्रम के दूर होने में मदद मिलेगी. वित्त वर्ष 2025-26 के वार्षिक लेखे भी बैठक में प्रस्तुत किए गए. न्यास के अनुसार, इस वित्त वर्ष में उसकी कुल आय 237 करोड़ रुपए रही, जबकि कुल व्यय 91 करोड़ रुपए रहा. इसके अलावा निर्माण आदि कार्यों पर 425 करोड़ रुपए का पूंजीगत व्यय किया गया. 31 मार्च 2026 को वित्त वर्ष की समाप्ति पर न्यास के पास कुल उपलब्ध राशि 1,882 करोड़ रुपए थी।न्यासी मंडल ने वार्षिक लेखों का अनुमोदन कर दिया.
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