AI Impact on Jobs: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का असर अभी बड़े पैमाने पर ब्लू-कॉलर नौकरियों को खत्म करने के रूप में नहीं दिख रहा है. इसका सबसे ज्यादा असर व्हाइट कॉलर नॉलेज वर्कर्स, क्रिएटव फील्ड्स और टेक सर्विसेज (White-Collar Knowledge Workers, Creative Fields, Technology Services) से जुड़े रोजगार बाजार पर पड़ रहा है. Goldman Sachs रिसर्च की एक नई मैक्रोइकोनॉमिक रिपोर्ट में ये बात सामने आई है.
रिपोर्ट के मुताबिक, पूरी इकोनॉमी में AI की वजह से नौकरियों में बड़े पैमाने पर कमी अभी सीमित है. हालांकि, कंपनियों में Generative AI Tools के बढ़ते इस्तेमाल का असर उन सेक्टर्स में भर्ती पर साफ दिखने लगा है, जहां AI आधारित ऑटोमेशन टूल्स पहले से उपलब्ध हैं.
टेक सेक्टर में भर्ती पर सबसे ज्यादा दबाव
गोल्डमैन सैक्स रिसर्च की 'Is AI Impacting Global Labor Markets?' रिपोर्ट के मुताबिक, इंफॉर्मेशन एंड कम्यूनिकेशन सर्विसेज जैसे सेक्टर, जो AI के लिए सबसे ज्यादा एक्सपोज्ड माने जाते हैं, उनमें रोजगार की रफ्तार 2022 के बाद से धीमी हुई है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि ये ट्रेंड लगभग सभी प्रमुख विकसित इकोनॉमी वाले देशों में दिखाई दे रहा है. हालांकि, इसका असर अमेरिका में ज्यादा स्पष्ट नजर आ रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में टेक सेक्टर का रोजगार लंबे समय के ऐतिहासिक ट्रेंड की तुलना में नीचे चला गया है.
गोल्डमैन सैक्स रिसर्च के इकोनॉमिस्ट सारा डोंग (Sarah Dong) और जोसेफ ब्रिग्स (Joseph Briggs) ने कहा कि ये पैटर्न बताते हैं कि टेक सेक्टर में हायरिंग हेडविंड्स सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनका असर वैश्विक स्तर पर दिखाई दे रहा है. हालांकि, सीधे तौर पर रोजगार पर नकारात्मक असर के सबसे मजबूत संकेत अमेरिका में दिखाई देते हैं.
सिर्फ टेक कंपनियां ही प्रभावित नहीं
AI का असर सिर्फ सॉफ्टवेयर और टेक्नोलॉजी कंपनियों तक सीमित नहीं है. रिपोर्ट के मुताबिक, कई दूसरे नॉलेज-बेस्ड और प्रोफेशनल सर्विसेज में भी रोजगार ऐतिहासिक ट्रेंड की तुलना में कम हुआ है.
इनमें कॉल सेंटर्स, सॉफ्टवेयर पब्लिशिंग, मैनेजमेंट कंसल्टिंग और एडवर्टाइजिंग सर्विसेज जैसे सेक्टर शामिल हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, विकसित देशों में इन सेक्टरों में रोजगार अपने पुराने ट्रेंड से काफी नीचे चला गया है.
अमेरिका में कॉल सेंटर जॉब्स 39% नीचे
रिपोर्ट में कॉल सेंटर एम्प्लॉयमेंट का उदाहरण दिया गया है. Goldman Sachs के मुताबिक, अमेरिका में कॉल सेंटर जॉब्स का स्तर ऐतिहासिक ट्रेंड से 39% नीचे है. वहीं, कनाडा में ये रोजगार ट्रेंड से 33% नीचे और जर्मनी में 27% नीचे है.
इससे संकेत मिलता है कि जिन कामों को AI और ऑटोमेशन टूल्स आसानी से कर सकते हैं, वहां कंपनियों की हायरिंग स्ट्रैटजी में बदलाव दिखाई दे रहा है.
AI से किन नौकरियों पर ज्यादा असर?
रिसर्च बताती है कि AI का शुरुआती असर उन कामों पर ज्यादा दिखाई दे रहा है जहां रूटीन, डिजिटल और ज्ञान आधारित कार्यों को ऑटोमेट करना संभव है.
यानी फिलहाल AI का प्रभाव सिर्फ 'नौकरी खत्म होने' के रूप में नहीं दिख रहा है. कई मामलों में इसका असर नई भर्ती की रफ्तार धीमी होने के रूप में सामने आ रहा है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन इंडस्ट्रीज में Labour-Automating Tools पहले से उपलब्ध हैं, वहां AI से जुड़े रोजगार संबंधी दबाव दिखाई दे रहे हैं.
क्या AI से ब्लू-कॉलर जॉब्स पर असर नहीं पड़ेगा?
गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट ये नहीं कहती कि ब्लू कॉर जॉब्स (Blue-Collar Jobs) पर AI का कोई असर नहीं होगा. रिपोर्ट का मौजूदा विश्लेषण सिर्फ ये बताता है कि अब तक AI से जुड़ा रोजगार प्रभाव मुख्य रूप से व्हाइट कॉलर और नॉलेज बेस्ड सेक्टरों में अधिक दिखाई दे रहा है.
टेक्नोलॉजी के बढ़ते इस्तेमाल के साथ कंपनियां कई ऐसे कामों को ऑटोमेट कर रही हैं, जिनमें पहले बड़ी संख्या में लोगों की जरूरत होती थी. इसका असर नई नौकरियों के निर्माण की रफ्तार और कंपनियों के हायरिंग प्लान्स पर पड़ सकता है.
जॉब मार्केट में आगे क्या बदल सकता है?
रिपोर्ट के मुताबिक, जैसे-जैसे AI आधारित ऑटोमेशन टूल्स ज्यादा सेक्टरों में उपलब्ध होंगे, रोजगार बाजार पर उनका असर भी व्यापक हो सकता है. फिलहाल सबसे ज्यादा असर उन सेक्टरों में दिख रहा है जहां AI को सीधे काम में इस्तेमाल करना आसान है. इसलिए आने वाले समय में कंपनियों की हायरिंग, प्रोडक्टिविटी और वर्कफोर्स रिक्वायरमेंट्स में बदलाव रोजगार बाजार की दिशा तय करने वाले अहम फैक्टर हो सकते हैं.
रिपोर्ट बताती है कि कि AI का प्रभाव अभी पूरे लेबर मार्केट में समान नहीं है. इसका असर खासतौर पर उन्हीं उद्योगों में ज्यादा दिख रहा है जहां कर्मचारियों द्वारा किए जाने वाले कामों को ऑटोमेट करने वाली तकनीक पहले से उपलब्ध है.
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