- केंद्र सरकार ने पश्चिम एशिया तनाव के बीच देश में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कमी न होने की बात कही.
- राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में मंत्रियों की बैठक में जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता और सप्लाई चेन की समीक्षा की गई.
- भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा तेल रिफाइनिंग देश है और घरेलू जरूरत से अधिक रिफाइनिंग क्षमता रखता है.
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच केंद्र सरकार ने कहा है कि देश में जरूरी सामानों की कोई कमी नहीं है. सरकार ने लोगों से पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की घबराहट में ज्यादा खरीदारी नहीं करने की अपील की है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अगुवाई में पश्चिम एशिया पर बने मंत्रियों के अनौपचारिक समूह की बैठक मंगलवार को नई दिल्ली में हुई. बैठक में देश में जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता और सप्लाई चेन की स्थिति की समीक्षा की गई.
बैठक में कई केंद्रीय मंत्री शामिल हुए. इनमें जे पी नड्डा, हरदीप सिंह पुरी, अश्वनी वैष्णव और किरेन रिजिजू भी मौजूद रहे. बैठक के बाद रक्षा मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि देश में सप्लाई की स्थिति सामान्य है. उन्होंने कहा कि सरकार हर जरूरी चीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए लगातार काम कर रही है.
मंत्रियों के समूह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की भी सराहना की. समूह ने कहा कि वैश्विक संकट के बावजूद आम लोगों पर असर कम रखने की कोशिश की जा रही है. सरकार ने बताया कि देश में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त भंडार मौजूद है. भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा तेल रिफाइनिंग देश है. देश की रिफाइनिंग क्षमता घरेलू जरूरत से ज्यादा है. इसी वजह से सप्लाई में किसी तरह की कमी नहीं है.

सरकार के मुताबिक, सरकारी तेल कंपनियां अभी अंतरराष्ट्रीय कीमतों का पूरा बोझ आम ग्राहकों पर नहीं डाल रही हैं. कंपनियां हर दिन करीब 550 करोड़ रुपये का नुकसान उठाकर राहत दे रही हैं. हालांकि, सरकार ने यह भी कहा कि कुछ औद्योगिक उपभोक्ता सस्ते खुदरा ईंधन का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं. कुछ जगहों पर कालाबाजारी की शिकायतें भी मिली हैं. इसे रोकने के लिए राज्यों और तेल कंपनियों के साथ मिलकर निगरानी बढ़ाई गई है.
बैठक में खाद की उपलब्धता पर भी चर्चा हुई. सरकार ने कहा कि खरीफ सीजन 2026 के लिए खाद का स्टॉक मजबूत स्थिति में है. अभी तक जरूरत का आधे से ज्यादा भंडार उपलब्ध हो चुका है. सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, यूरिया, डीएपी और एनपीके समेत कई तरह के उर्वरकों की सप्लाई सामान्य बनी हुई है. संकट के बाद भी देश में करीब 122 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा खाद उपलब्ध कराई गई है.
सरकार की ओर से यह भी बताया कि मई और जून में बड़ी मात्रा में खाद भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने वाली है. इससे खेती के मौसम में किसानों को परेशानी नहीं होगी.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अधिकारियों से कहा कि किसानों के लिए खाद और दूसरी जरूरी कृषि सामग्री की उपलब्धता हर हाल में बनी रहनी चाहिए. उन्होंने कहा कि इससे खाद्य कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिलेगी. बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि छोटे और मझोले उद्योगों यानी MSME सेक्टर को राहत देने के लिए सरकार की इमरजेंसी क्रेडिट गारंटी योजना मददगार साबित हो रही है. इससे कारोबारियों पर कामकाजी पूंजी का दबाव कम हुआ है.
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