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रेलमंत्री वैष्णव ने बताया बुलेट ट्रेन में देरी की क्या रहीं वजहें, जापानी मंत्री के आरोपों का दिया जवाब

अश्विनी वैष्णव ने बुलेट प्रोजेक्ट में देरी के लिए महाराष्ट्र की तत्कालीन उद्धव ठाकरे सरकार को भी जिम्मेदार ठहराया. उनका कहना था कि उद्धव ठाकरे की सरकार आ गई थी और वह मंजूरी में देरी करती थी.

  • अश्विनी वैष्णव ने बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में देरी के लिए महाराष्ट्र की तत्कालीन सरकार को जिम्मेदार ठहराया है
  • उन्होंने बताया कि बुलेट ट्रेन का शिलान्यास 2017 में हुआ और डिजाइन में ढाई साल का समय लगा था
  • कोरोना महामारी के कारण भी प्रोजेक्ट की गति प्रभावित हुई लेकिन काम अक्टूबर 2021 में शुरू हो गया था
नई दिल्ली:

बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में देरी को लेकर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने विस्तार से जानकारी दी है. NDTV वर्ल्ड समिट में उनसे जापान के पूर्व मंत्री हिडेकी माकिहारा के आरोपों के बारे में पूछा गया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत में यह प्रोजेक्ट देरी से चल रहा है और इसकी जिम्मेदार सरकार है. इस पर जवाब देते हुए वैष्णव ने कहा कि ऐसा नहीं है. उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट में हम बहुत मेहनत से जुटे हैं. कुछ कारण ऐसे थे, जिनकी वजह से वक्त की बर्बादी हुई थी. यही नहीं अब उन्होंने भऱोसा दिया है कि अगले साल ही इस प्रोजेक्ट का लोकार्पण होगा. 

अश्विनी वैष्णव ने कहा, 'हम जापान के साथ कई काम कर चुके हैं. हमारे रणनीतिक संबंध हैं. हाल ही में जापान के मंत्री आए थे तो वह स्पीड से संतुष्ट थे. उनका कहना था कि हमने दुनिया में कहीं भी काम की इतनी गति नहीं देखी. इसके अलावा यहां काम करने वाले कुछ जापानी इंजीनियरों का भी कहना है कि हमने इतना तकनीक का प्रयोग नहीं देखा.' इसके आगे वह पूरे प्रोजेक्ट की टाइमलाइन के बारे में ही जानकारी देने लगे. अश्विनी वैष्णव ने कहा, 'मैं आपको बता देता हूं कि 2017 में शिलान्यास हुआ. फिर करीब ढाई साल का वक्त डिजाइन तैयार करने में लगा. इसके बाद फिर कोरोना आ गया.'

उन्होंने इस प्रोजेक्ट में देरी के लिए महाराष्ट्र की तत्कालीन उद्धव ठाकरे सरकार को भी जिम्मेदार ठहराया. उनका कहना था कि महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की सरकार आ गई थी. वह महाराष्ट्र में इस प्रोजेक्ट में मंजूरी नहीं दे रहे थे. इसके चलते कंस्ट्रक्शन का काम शुरू नहीं हो सका. फिर भी हमने 2021 में काम शुरू किया गया. आज हम अक्तूबर 2021 में हैं और अब हम भऱोसा दे सकते हैं कि अगले साल इस प्रोजेक्ट के लोकार्पण समारोह में आएं. इस दौरान अश्विनी वैष्णव ने मोबाइल फोन की मैन्युफैक्चरिंग से लेकर एआई तक के बारे में विस्तार से बात की. 

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केंद्रीय मंत्री ने कहा, 'भारत में 1950 से 1990 तक मैन्युफैक्चरिंग पर हमने ज्यादा फोकस नहीं किया गया. 1991 के बाद इसकी शुरुआत हुई. फिर 2004 से 2014 तक इस पर थोड़ा ब्रेक लगा और जब 2014 में पीएम मोदी आए और मेक इन इंडिया के विचार से काम शुरू किया तो परिणाम आने शुरू हो गए. अब हम मोबाइल, ड्रोन, ट्रेन जैसी तमाम चीजें बना रहे हैं. क्या कभी आप सोच सकते थे कि भारत इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम का एक्सपोर्ट करेगा. अब यह हो रहा है.'

'AI पर कंसल्टेशन पेपर अगले कुछ सप्ताह में आएगा'

एआई को लेकर भी वैष्णव ने बात की. उन्होंने कहा कि एक वर्ग है, जो चाहता है कि इसे अपनी रफ्तार से फलने-फूलने दिया जाए. कुछ लोग इसे खतरा मान रहे हैं. इन सभी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने नए कानून बनाने का फैसला लिया है ताकि नई तकनीक पर थोड़ा नियंत्रण भी बना रहे. डिजिटल दुनिया में फिजिकल प्रसेंस मायने नहीं रखती. जैसे परमाणु हथियारों को लेकर एक संयम की स्थिति है. वैसे ही नियम हमें AI को लेकर भी बनाने होंगे.  क्या कोई AI लॉ होगा? इस पर अश्विनी वैष्णव ने कहा कि अगले कुछ सप्ताह में ही कंसलटेशन पेपर लाएंगे. इस पर हम इंडस्ट्री. पब्लिक और अन्य लोगों से सलाह लेंगे. फिर सभी लोगों की राय को समझने के बाद कोई अंतिम फैसला लिया जाएगा. हम इस संबंध में कई टेक कंपनियों से बात कर रहे हैं और अब यूजर्स तक पहुंचने की बारी है. 

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