- केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत 2028 तक अपनी पहली एडवांस मेक इन इंडिया नैनो चिप विकसित कर लेगा
- भारत में 2022 से सेमीकंडक्टर क्षेत्र में तेजी आई है और अब तक छह सेमीकंडक्टर प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं
- 23 अक्टूबर 2028 तक भारत का पहला स्वदेशी डिजाइन और निर्माण वाला मोबाइल फोन बाजार में उपलब्ध होगा
NDTV World Summit 2026 में केंद्रीय रेल, सूचना प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारत के सेमीकंडक्टर मिशन, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर बड़ा विजन पेश किया. उन्होंने कहा कि भारत साल 2028 तक अपनी पहली एडवांस 'मेक इन इंडिया' नैनो चिप तैयार कर लेगा.
कब तैयार होगी भारत की पहली मेक इन इंडिया चिप?
समिट के दौरान NDTV के CEO और एडिटर-इन-चीफ राहुल कंवल ने अश्विनी वैष्णव के ऑफिस में दीवार पर लगी एक खाली कील का जिक्र किया. इस पर मंत्री ने बताया कि वह कील किसी तस्वीर के लिए नहीं, बल्कि भारत की पहली स्वदेशी सेमीकंडक्टर चिप के लिए सुरक्षित रखी गई है. उन्होंने कहा कि 2028 में जब भारत की पहली चिप तैयार होगी, तब उसकी तस्वीर वहीं लगाई जाएगी.
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उन्होंने कहा कि भारत में 1962 से सेमीकंडक्टर सेक्टर में प्रयास होते रहे हैं. नेहरू, इंदिरा गांधी और मनमोहन सिंह सरकारों के दौरान भी इस क्षेत्र में काम हुआ, लेकिन इसका प्रोडक्शन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में संभव हो पाया. वैष्णव ने बताया कि 2022 से शुरू हुई इस यात्रा के तहत देश में पांच सेमीकंडक्टर प्लांट लगचुके हैं और छठा प्लांट तैयार किया जा रहा है.
मंत्री ने कहा कि देश की 300 से ज्यादा यूनिवर्सिटी में सेमीकंडक्टर से जुड़ी ट्रेनिंग दी जा रही है. भारत अब इस क्षेत्र में जापान और यूरोप समेत कई देशों को एक्सपोर्ट भी कर रहा है. उन्होंने दावा किया कि आने वाले वर्षों में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण और निर्यात के क्षेत्र में और बड़ी भूमिका निभाएगा.
भारत कब बनाएगा पहला मोबाइल?
जब उनसे पूछा गया कि भारत अपना मेक इंडिया मोबाइल फोन कब बनाएगा? इस पर अश्विनी वैष्णव ने कहा कि 23 अक्टूबर 2028 की तारीख नोट कर लीजिए. उस समय भारतीय डिजाइन, भारतीय निर्माण और भारतीय ब्रांड वाला मोबाइल फोन लोगों के हाथों में होगा. वैष्णव ने बताया कि एक स्मार्टफोन में रेडियो कम्युनिकेशन, एंटीना, मेमोरी, कैमरा, डिस्प्ले और पावर मैनेजमेंट जैसी कई जटिल तकनीकें होती हैं, इसलिए इसका डिजाइन और निर्माण चुनौतीपूर्ण है.
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर बोलते हुए वैष्णव ने कहा कि 1952 से 1999 के बीच भारत इस क्षेत्र में काफी पीछे रह गया था. उनके अनुसार 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मेक इन इंडिया' विजन के बाद देश ने मोबाइल, ड्रोन, मिसाइल और ट्रेन जैसे एडवांस प्रोडक्ट की मैनुफेक्चरिंग में बड़ी प्रगति की है. उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्टर बन चुका है और जल्द ही दूसरे स्थान पर पहुंचने का लक्ष्य रखता है.

AI को लेकर भी दिया बड़ा संकेत
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर बोलते हुए अश्विनी वैष्णव ने कहा कि उपभोक्ता स्तर पर AI का प्रसार हाल के सालो में तेजी से हुआ है. उन्होंने कहा कि इनोवेशन के साथ-साथ लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी जरूरी है, क्योंकि डिजिटल दुनिया में फिजिकल बाउंड्री उतनी प्रभावी नहीं रहतीं.
मंत्री ने कहा कि जिस तरह न्यूक्लियर इंडस्ट्री में वैश्विक स्तर पर नियम बनाए गए हैं, उसी तरह AI के लिए भी दुनिया को कुछ साझा बुनियादी सिद्धांतों पर सहमति बनानी चाहिए. उन्होंने जोर देकर कहा कि AI को 'ह्यूमन-सेंट्रिक' होना चाहिए और उस पर प्रभावी नियंत्रण की व्यवस्था भी होनी चाहिए.
AI नियमन के सवाल पर वैष्णव ने संकेत दिया कि सरकार आने वाले कुछ हफ्तों में एक कंसल्टेशन पेपर जारी करेगी. उन्होंने कहा कि AI के फायदे और संभावित जोखिम दोनों को समझते हुए सरकार उद्योग, आईटी कंपनियों और अलग-अलग सेक्टर के एक्सपर्ट्स के साथ मिलकर नीतिगत ढांचा तैयार कर रही है.
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