- अशोक सिंघल की 100वीं जयंती पर VHP ने बनाई बड़ी योजना
- जन्मशती वर्ष में हजारों संगोष्ठियां और जनसभाएं आयोजित होंगी
- भारतीय संस्कृति और वैदिक परंपरा पर केंद्रित होंगे कार्यक्रम
विश्व हिंदू परिषद ने अपने पूर्व अध्यक्ष और राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से एक अशोक सिंघल की जन्मशती को बड़े स्तर पर मनाने की तैयारी की है. संगठन ने घोषणा की है कि आगामी एक वर्ष तक देश और विदेश के हजारों स्थानों पर संगोष्ठियां, जनसभाएं, सेवा कार्यक्रम और जागरूकता अभियान आयोजित किए जाएंगे. वीएचपी का कहना है कि इन आयोजनों का उद्देश्य अशोक सिंघल के जीवन संदेश को समाज तक पहुंचाना, भारतीय संस्कृति के प्रति गौरव की भावना विकसित करना और सामाजिक समरसता व संगठनात्मक कार्यों को नई ऊर्जा देना है.
भारत मंडपम से होगा शुभारंभ
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक वीएचपी अध्यक्ष आलोक कुमार ने नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस वार्ता में जन्मशती वर्ष कार्यक्रमों की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि अशोक सिंघल जन्मशती वर्ष का औपचारिक शुभारंभ रविवार को दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित समारोह से होगा. इस कार्यक्रम का आयोजन विश्व हिंदू परिषद और अशोक सिंघल फाउंडेशन संयुक्त रूप से करेंगे.

Photo Credit: कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए VHP पदाधिकारी
कई प्रमुख हस्तियां होंगी शामिल
आलोक कुमार के अनुसार उद्घाटन समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और महामंडलेश्वर स्वामी परमानंद गिरि जी महाराज मौजूद रहेंगे. संगठन ने इसे जन्मशती वर्ष के प्रमुख आयोजनों में शामिल किया है.

अशोक सिंघल
कौन थे अशोक सिंघल?
अशोक सिंघल का जन्म 27 सितंबर 1926 को उत्तर प्रदेश के आगरा में हुआ था. वे वर्ष 1942 से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हुए थे. वर्ष 1950 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रौद्योगिकी संस्थान से धातु इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने संघ के पूर्णकालिक प्रचारक के रूप में कार्य शुरू किया. बाद में उन्होंने दिल्ली और हरियाणा के प्रांत प्रचारक के रूप में भी जिम्मेदारियां निभाईं.
वीएचपी में निभाई अहम भूमिका
- वर्ष 1980 में उन्हें विश्व हिंदू परिषद के कार्य के लिए नियुक्त किया गया. इसके बाद वे संगठन में संयुक्त महामंत्री बने.
- वर्ष 1984 में उन्हें वीएचपी का महामंत्री बनाया गया. बाद में वे संगठन के अध्यक्ष बने और दिसंबर 2011 तक इस पद पर रहे.
- अशोक सिंघल को विशेष रूप से राम जन्मभूमि आंदोलन में उनकी सक्रिय भूमिका के लिए जाना जाता है. 1980 के दशक के अंतिम वर्षों और उसके बाद के दौर में वे इस आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे.
- 17 नवंबर 2015 को गुरुग्राम के एक निजी अस्पताल में उनका निधन हो गया था.
जन्मशती वर्ष में क्या होंगे कार्यक्रम
वीएचपी अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि अशोक सिंघल ने अपनी दूरदर्शी सोच के माध्यम से देश और समाज के लिए उल्लेखनीय योगदान दिया था. उन्होंने कहा कि संगठन ने उनकी प्रेरणादायी जीवन यात्रा, विचारों और योगदानों को सम्मान देने का निर्णय लिया है. इसी उद्देश्य से पूरे वर्ष देश और विदेश में हजारों संगोष्ठियां, सार्वजनिक सभाएं और अन्य कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे.
अधूरे कार्यों को आगे बढ़ाने पर जोर
आलोक कुमार ने कहा कि संगठन अशोक सिंघल की स्मृति का सम्मान उनके अधूरे प्रयासों को आगे बढ़ाकर करेगा. उन्होंने कहा कि इनमें अवैध धर्मांतरण पर प्रतिबंध, गोहत्या पर रोक, घर वापसी अभियान को बढ़ावा देना तथा वैदिक ज्ञान और संस्कृत का प्रचार-प्रसार जैसे विषय शामिल हैं. इन मुद्दों पर जनजागरण और संवाद के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे.
47 प्रमुख स्थानों पर होंगे उद्घाटन कार्यक्रम
वीएचपी के अनुसार 27 सितंबर से 4 अक्टूबर के बीच देश के 47 प्रमुख स्थानों पर जन्मशती वर्ष के उद्घाटन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. इसके बाद पूरे वर्ष सेवा कार्यों, सामाजिक समरसता, जनजागरण अभियानों और विभिन्न विषयों पर संगोष्ठियों का आयोजन किया जाएगा. संगठन का कहना है कि इन कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में सेवा, संस्कार, संगठन और सामाजिक सद्भाव से जुड़े प्रयासों को नई गति देने का लक्ष्य रखा गया है.
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