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जमीयत प्रमुख महमूद मदनी के बयान पर भड़की विहिप, बताया-'भारत की संप्रभुता के लिए खतरा'

साल 1919 में स्थापित जमीयत उलेमा-ए-हिंद का दावा है कि वह भारतीय मुसलमानों का सबसे बड़ा और सर्वाधिक प्रभावशाली संगठन है. इसके दो गुट हैं, जिनमें से एक का नेतृत्व महमूद मदनी करते हैं.

जमीयत प्रमुख महमूद मदनी के बयान पर भड़की विहिप,  बताया-'भारत की संप्रभुता के लिए खतरा'
विनोद बंसल ने महमूद मदनी के बयान पर कड़ा विरोध जताया है.
  • VHP ने महमूद मदनी के बयान को भारत की संप्रभुता के लिए गंभीर खतरा बताया है
  • मदनी ने मुसलमानों के खिलाफ प्रशासनिक संरक्षण के साथ की जा रही कार्रवाई को गंभीर चिंता का विषय बताया है
  • विनोद बंसल ने अवैध संरचनाओं के विध्वंस को कानून के तहत उचित कार्रवाई बताया और मस्जिद या मदरसे बताना गलत कहा

विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद (एमएम) प्रमुख महमूद मदनी के बयान को भारत की संप्रुभता के लिए खतरा बताया है. विहिप की ये प्रतिक्रिया महमूद मदनी के बुधवार को दिए बयान के बाद आई है. मदनी ने कहा था कि  मुसलमानों को निशाना बनाए जाने और ऐसे कदमों को प्रशासनिक संरक्षण दिया जाना गंभीर चिंता का विषय है. साथ ही उन्होंने न्यायिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाए थे. सबसे बड़ी बात है कि मदनी ने दुनिया के अन्य देशों तक इस बात को पहुंचाने की वकालत भी की थी.

महमूद मदनी ने क्या कहा था? 

मदनी ने कहा था कि “प्रशासनिक संरक्षण” के साथ एक खास समुदाय के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई गंभीर चिंता का विषय है. उन्होंने आरोप लगाया था कि लोगों को अब ऐसा लगने लगा है कि न्यायिक व्यवस्था प्रभावी कानूनी सुरक्षा और त्वरित समाधान नहीं दे रही है. इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि दुनियाभर में भारत के कई दोस्त हैं और इन दोस्तों को साथ लेकर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि देश “अपने रास्ते से न भटके.”

विहिप ने क्या कहा

विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने दावा किया कि मदनी की अंतरराष्ट्रीय मंचों का रुख करने संबंधी टिप्पणी भारत की संप्रभुता के लिए खतरा है. बंसल ने कहा, “अगर किसी व्यक्ति या उसके कट्टरपंथी गुट का भारत के संविधान, सरकार, प्रशासन और यहां तक ​​कि न्यायपालिका से भी भरोसा उठ गया है, तो वह अब भी यहां क्यों रह रहा है?”

बंसल ने दावा किया कि अधिकारियों की ओर से गिराई गई इमारतें कानून का उल्लंघन करके बनाई गई अवैध संरचनाएं थीं. बंसल ने कहा कि इन संरचनाओं को मस्जिद, मदरसा और इबादत स्थल बताना, गलत काम और उसके लिए जिम्मेदार लोगों, दोनों का बचाव करने जैसा है. उन्होंने कहा, “अब भारत बदल गया है. मौलानाओं की ऐसी भड़काऊ सोच भी बदलनी होगी.”

जमीयत उलेमा-ए-हिंद को जानिए

बंसल ने मदनी और अन्य मौलानाओं पर ‘भारत माता की जय' और ‘वंदे मातरम्' जैसे नारे सुनकर भड़कने का आरोप लगाया और कहा कि ये लोग भारतीय अदालतों में खुलेआम आतंकवादियों का पक्ष लेते हैं. विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने मुस्लिम समुदाय से अपील की कि वे “उकसाने वाले और राष्ट्र-विरोधी मौलवियों” से जल्द से जल्द दूरी बना लें. साल 1919 में स्थापित जमीयत उलेमा-ए-हिंद का दावा है कि वह भारतीय मुसलमानों का सबसे बड़ा और सर्वाधिक प्रभावशाली संगठन है. इसके दो गुट हैं, जिनमें से एक का नेतृत्व महमूद मदनी करते हैं.

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