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This Article is From Jun 03, 2024

1980 से 2014- अरुणाचल में कभी कांग्रेस का जलवा था, आज सिर्फ 1 सीट

अरुणाचल प्रदेश में कांग्रेस के नीचे आने और बीजेपी के ऊपर बढ़ने की कहानी बड़ी दिलचस्‍प है. अरुणाचल प्रदेश में 1980 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 13 सीटें जीती थीं, तब यहां विधानसभा की कुल 30 सीटें थीं. इसके बाद 1984 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 30 में से 21 सीटों पर जीत दर्ज कर सरकार बनाई थी. बीजेपी को तब सिर्फ एक सीट से संतुष्‍ट होना पड़ा था.

1980 से 2014- अरुणाचल में कभी कांग्रेस का जलवा था, आज सिर्फ 1 सीट
अरुणाचल में 'अर्श से फर्श' पर कांग्रेस...
नई दिल्‍ली:

अरुणाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव (Arunachal Pradesh Assembly Election) में कांग्रेस का प्रदर्शन एक बार फिर बेहद निराशाजनक रहा. कांग्रेस को अरुणाचल में सिर्फ 1 सीट मिली है. वहीं, बीजेपी ने अरुणाचल प्रदेश की 60 सदस्यीय विधानसभा में 46 सीट जीतकर लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की है. अरुणाचल प्रदेश में कभी कांग्रेस का जलवा था, लेकिन अब स्थिति यह है कि 60 विधानसभा क्षेत्रों में से 41 पर उसे उम्मीदवार भी नहीं मिले. एक ऐसा राज्य जहां की राजनीति पर कांग्रेस का दबदबा तीन दशकों से अधिक समय तक कामय रहा, वहां देश की सबसे पुरानी पार्टी की ये दशा हैरान करती है. 

19 सीटों पर लड़ा चुनाव, जीती सिर्फ 1 सीट 

कांग्रेस ने 2019 के विधानसभा चुनाव में चार सीटें जीती थीं, लेकिन इस बार पार्टी की स्थिति बेहद खराब नजर आई. कांग्रेस इस विधानसभा चुनाव में सिर्फ 19 सीटों पर चुनाव लड़ी थीं. अरुणाचल कांग्रेस के कई वरिष्‍ठ नेताओं ने चुनाव मैदान में उतरने से पहले ही हाथ खड़े कर दिये. कई नेताओं के नाम भी फाइनल हो गए थे, लेकिन उन्‍होंने पार्टी हाईकमान के आदेश की अवहेलना करते हुए चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया. कुमार वाई, जिन्हें पूर्वी कामेंग जिले के बामेंग निर्वाचन क्षेत्र से मैदान में उतारा गया था, चुनावी मुकाबले में कांग्रेस के एकमात्र विजेता रहे हैं.

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चुनाव से पहले ही मैदान छोड़कर भागे कांग्रेस नेता

अरुणाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही कांग्रेस की मुश्किलें सामने आ गई थीं. कांग्रेस ने इस चुनाव के लिए 35 उम्मीदवारों की सूची तैयार की थी, जिनमें से 10 ने अपना नामांकन दाखिल ही नहीं किया. बाकी बचे उम्‍मीदवारों में से पांच ने अपना नाम अंतिम समय में वापस ले लिया. कनुबारी में एक अन्य उम्मीदवार, सोम्फा वांगसा ने नामांकन पत्रों की जांच के बाद सीट "सरेंडर" कर दी और भाजपा में शामिल हो गईं. इसे लेकर कांग्रेस पार्टी काफी खफा है और सख्‍त कदम उठाने के बारे में सोच रही है, ताकि भविष्‍य में पार्टी के सामने ऐसे विकट समस्‍या सामने न आए.

अरुणाचल में खेमा क्‍यों बदल रहे कांग्रेस नेता?

टाइम्‍स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, कांग्रेस सूत्रों के बताया कि भाजपा के साथ कथित तौर पर साठगांठ करने वालों को निशाना बनाते हुए पार्टी के कई वरिष्ठ सदस्यों को पहले ही निष्कासित कर दिया गया था, जिनमें उम्मीदवारों की शॉर्टलिस्ट में से नौ नेता शामिल थे, जिन्होंने चुनाव ही नहीं लड़ा. सूत्रों ने बताया कि पीसीसी की अनुशासनात्मक समिति ने उन्हें छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया. इन उम्मीदवारों ने पार्टी को यह भी सूचित नहीं किया कि वे चुनाव नहीं लड़ने जा रहे हैं. कांग्रेस के एक पदाधिकारी ने बताया कि उन्होंने आखिरी क्षण तक कांग्रेस के टिकट के लिए संघर्ष किया, लेकिन बाद में पीछे हट गए. अरुणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नबाम तुकी ने कांग्रेस नेताओं के चुनाव मैदान से आश्चर्यजनक पलायन के लिए "मनी पावर" को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि  पार्टी की अनुशासन समिति की सिफारिशों के अनुसार दलबदलुओं को निष्कासित किया जाता रहेगा. हम निस्संदेह निराश हैं, लेकिन हतोत्साहित नहीं हैं.

अरुणाचल में कांग्रेस का 'अर्श से फर्श' तक का सफर

अरुणाचल प्रदेश में 1980 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 13 सीटें जीती थीं, तब यहां विधानसभा की कुल 30 सीटें थीं. इसके बाद 1984 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 30 में से 21 सीटों पर जीत दर्ज कर सरकार बनाई थी. बीजेपी को तब सिर्फ एक सीट से संतुष्‍ट होना पड़ा था. 1990 में अरुणाचल प्रदेश में परिसीमन के बाद विधानसभा सीटों की संख्‍या डबल यानि 60 हो गईं. इस बार भी कांग्रेस का दबदबा कायम रहा और कांग्रेस की झोली में 37 सीटें आईं. साल 1995 में हुए अरुणाचल प्रदेश के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 43 सीटों के साथ और बड़ी पार्टी बनकर उभरी. इस साल कांग्रेस ने सभी 60 सीटों पर चुनाव लड़ा था. इसके बाद 1999 के चुनाव में तो कांग्रेस ने यहां रिकॉर्ड ही बना दिया. विधानसभा की 60 में से 53 सीटों पर शानदार जीत दर्ज कर विपक्षीयों को सोचने पर मजबूर कर दिया. हालांकि, 2004 में कांग्रेस की विधानसभा सीटें घटीं, लेकिन 34 सीटें जीतकर कांग्रेस तब भी सत्‍ता पर काबिज रही. 2009 में कांग्रेस के खाते में 42 सीटें आईं. 2014 में फिर कांग्रेस की 42 सीटों पर जीत हुई. लेकिन इसके बाद 2019 में तस्‍वीर पलट गई. इस बार बीजेपी के खाते में 41 सीटें आईं और कांग्रेस सिर्फ 4 सीटों पर सिमट कर रह गई.

अरुणाचल में BJP की शानदार जीत

बीजेपी को अरुणाचल प्रदेश की 60 सदस्यीय विधानसभा में 46 सीट जीतकर लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की, पार्टी को 2019 की तुलना में चार अधिक सीटें मिली हैं. विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत हासिल करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस का सफाया कर दिया, जिसके खाते में केवल एक सीट आई और यह एनपीपी (5), राकांपा (3) तथा पीपीए (2) के बाद पांचवें स्थान पर खिसक गई. तीन सीट निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में गईं. मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कहा कि 'उगते सूरज की भूमि' अरुणाचल प्रदेश में जैसा हुआ है, वैसा ही चार जून को देश के अन्य हिस्सों में होगा, जब लोकसभा चुनाव के लिए मतों की गिनती होगी. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रचंड जीत के लिए अरुणाचल प्रदेश के लोगों को बधाई दी.

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विपक्षी कांग्रेस ने 60 सदस्यीय विधानसभा में 19 उम्मीदवार उतारे थे और वह केवल बामांग सीट से जीत हासिल करने में कामयाब रही जहां राज्य के पूर्व गृह मंत्री कुमार वाई ने भाजपा के डोबा लामनियो को 635 मतों के मामूली अंतर से हराया. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नबाम तुकी ने कहा कि पार्टी चुनाव परिणामों से 'निराश है लेकिन हतोत्साहित नहीं' है. उन्होंने कहा, "हम हार के कारणों पर आत्मनिरीक्षण करेंगे और आने वाले दिनों में संगठन पर काम करेंगे."

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