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'अर्नब' का कहर: आज रात तट से टकराएगा भीषण चक्रवात, आंध्र-ओडिशा में रेड अलर्ट, यूपी तक असर

चक्रवात से निपटने के लिए दक्षिण तटीय रेलवे और पूर्वी तटीय रेलवे क्षेत्रों में करीब 600 किलोमीटर रेलवे ट्रैक की विशेष निगरानी की जा रही है.

'अर्नब' का कहर: आज रात तट से टकराएगा भीषण चक्रवात, आंध्र-ओडिशा में रेड अलर्ट, यूपी तक असर
अर्नब चक्रवात बहुत तेजी से भारतीय तट की तरफ बढ़ रहा है.
  • बंगाल की खाड़ी में बना चक्रवात अर्नब आंध्र प्रदेश और यनम तट के पास 28 अक्टूबर की तड़के लैंडफॉल कर सकता है
  • आंध्र प्रदेश में 84 हजार से अधिक लोगों को 290 राहत शिविरों में सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया है
  • चक्रवात अर्नब का नाम बांग्लादेश ने सुझाया है और इसका संबंध बंगाली भाषा में समुद्र या महासागर से माना जाता है

बंगाल की खाड़ी में बना भीषण चक्रवाती तूफान अर्नब अब आंध्र प्रदेश और यनम तट से टकराने के बेहद करीब पहुंच चुका है. मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि यह 28 अक्टूबर की तड़के 2 से 4 बजे के बीच लैंडफॉल कर सकता है. आंध्र प्रदेश, ओडिशा, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में भारी बारिश, तेज हवाओं और बाढ़ जैसे हालात की आशंका के बीच प्रशासन हाई अलर्ट पर है. हजारों लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाया गया है, जबकि रेल और हवाई सेवाओं पर भी असर पड़ा है.

अर्नब मंगलवार को और अधिक ताकतवर होकर "वेरी सीवियर साइक्लोनिक स्टॉर्म" में बदल गया है. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, मंगलवार शाम 5:30 बजे यह आंध्र प्रदेश तट के बेहद करीब पहुंच चुका था और काकीनाडा से लगभग 90 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित था. विभाग का अनुमान है कि यह 28 अक्टूबर की तड़के 2 से 4 बजे के बीच बापटला और विशाखापत्तनम के बीच, यनम के दक्षिणी हिस्से के पास तट से टकराएगा. लैंडफॉल के समय हवाओं की अधिकतम रफ्तार 125 से 135 किलोमीटर प्रतिघंटा और झोंकों की गति 150 किलोमीटर प्रतिघंटा तक पहुंच सकती है.

आंध्र प्रदेश और ओडिशा में सबसे ज्यादा खतरा

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कहा है कि राज्य सरकार पूरी तरह अलर्ट पर है और जनजीवन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है. तटीय और निचले इलाकों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है. सरकार ने 290 राहत शिविर बनाए हैं, जिनमें 84 हजार से अधिक लोगों को शिफ्ट किया जा चुका है.

राज्य के श्रीकाकुलम, विजयनगरम, काकीनाडा, कोनसीमा, एलुरु, पश्चिम गोदावरी और विशाखापत्तनम समेत कई जिलों में अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है. कुछ क्षेत्रों में 30 सेंटीमीटर तक बारिश होने की संभावना जताई गई है. समुद्र का पानी निचले इलाकों में घुस सकता है, जिसे देखते हुए लोगों को घरों के भीतर रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है.

उत्तर प्रदेश तक दिखेगा असर

चक्रवात का प्रभाव केवल दक्षिण भारत तक सीमित नहीं रहेगा. उत्तर प्रदेश में भी 28 से 31 अक्टूबर के बीच बेमौसम बारिश, गरज-चमक और तेज हवाएं चलने की संभावना है. राहत आयुक्त कार्यालय ने किसानों और आम नागरिकों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है.

28 अक्टूबर को सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, वाराणसी, भदोही, गाजीपुर और बलिया में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं. इन जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया है. वहीं 29 अक्टूबर को कई जिलों में भारी बारिश और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की हवाओं की आशंका के चलते ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है. प्रयागराज, चित्रकूट, कौशांबी, फतेहपुर, प्रतापगढ़, रायबरेली और अमेठी सहित कई जिलों में वर्षा का अनुमान है.

रेलवे और उड़ानों पर असर

चक्रवात से निपटने के लिए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेलवे तैयारियों की समीक्षा की है. दक्षिण तटीय रेलवे और पूर्वी तटीय रेलवे क्षेत्रों में करीब 600 किलोमीटर रेलवे ट्रैक की विशेष निगरानी की जा रही है. रेलवे बोर्ड से लेकर डिवीजन स्तर तक वॉर रूम सक्रिय कर दिए गए हैं. मरम्मत सामग्री, डीजल इंजन, एंबुलेंस और आपदा राहत उपकरण संवेदनशील स्थानों पर तैनात किए गए हैं.

वहीं विजयवाड़ा और विशाखापत्तनम एयरपोर्ट से मंगलवार और बुधवार की कुल 21 उड़ानें रद्द कर दी गई हैं. समुद्र में मछली पकड़ने वाली नौकाओं के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है और कई जिलों में स्कूल भी बंद कर दिए गए हैं.

आखिर 'अर्नब' नाम क्यों रखा गया?

दिलचस्प बात यह है कि चक्रवात अर्नब का नाम बांग्लादेश ने सुझाया है. यह नाम उत्तर हिंद महासागर क्षेत्र के लिए तैयार आधिकारिक सूची का हिस्सा है. इस सूची को भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान, श्रीलंका, मालदीव, म्यांमार, ओमान, कतर, सऊदी अरब, यूएई, यमन, ईरान और थाईलैंड सहित 13 देशों ने मिलकर तैयार किया है.

'अर्नब' शब्द का संबंध बंगाली भाषा में समुद्र या महासागर से माना जाता है. हालांकि मौसम विभाग ने इसका आधिकारिक अर्थ जारी नहीं किया है. चक्रवातों को नाम देने का उद्देश्य आम लोगों, प्रशासन, मीडिया और आपदा एजेंसियों के बीच संवाद को आसान बनाना होता है ताकि चेतावनी और राहत कार्यों में भ्रम की स्थिति पैदा न हो.

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