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चक्रवात अर्नब का भयावह चेहरा: टनों मलबे के नीचे दफन हुआ पूरा गांव, 2 शव मिले, 10 अब भी लापता

चक्रवात अर्नब के बाद ओडिशा के गिड़ीपाबाली गांव में हुए भीषण भूस्खलन ने पूरी बस्ती को मलबे में दफन कर दिया. दो शव बरामद हुए हैं जबकि 10 लोग अब भी लापता हैं. तलाश अभियान रोकने के बाद परिवार सांकेतिक अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे हैं.

चक्रवात अर्नब का भयावह चेहरा: टनों मलबे के नीचे दफन हुआ पूरा गांव, 2 शव मिले, 10 अब भी लापता
Odisha Landslide: ओडिशा के गंजाम और कंधमाल जिले की सीमा पर स्थित खूबसूरत गिड़ीपाबाली गांव को पूरी तरह से तबाह कर दिया है. बारिश की वजह से हुए लैंड स्लाइड की वजह से पूरा पहाड़ी टोला मलबे में दब गया है
कुमार देव

चक्रवात अर्नब के बाद हुई मूसलाधार बारिश ने ओडिशा के गंजाम और कंधमाल जिले की सीमा पर स्थित खूबसूरत गिड़ीपाबाली गांव को पूरी तरह से तबाह कर दिया है. बारिश की वजह से हुए लैंड स्लाइड की वजह से  पूरा पहाड़ी टोला मलबे में दब गया है और मलबे के विशाल ढेर के नीचे दबे अपनों को पाने की उम्मीद अब लगभग टूट चुकी है. इस भयानक हादसे में अब भी 10 लोग लापता हैं, जबकि दो लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं. कई दिनों तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद जब सफलता नहीं मिली, तो अब पीड़ित परिवार भारी मन से अपने लापता प्रियजनों के सांकेतिक अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे हैं. जाहिर है यह घटना सिर्फ एक आपदा नहीं, बल्कि उजड़े घरों, बिखरे परिवारों और टूटी उम्मीदों की दर्दनाक कहानी बन गई है.

आधी रात के बाद टूट पड़ा पहाड़, पूरी बस्ती हुई तबाह

दरअसल बीते 28 अक्टूबर की तड़के करीब 3 बजे गिड़ीपाबाली की पहाड़ियों में अचानक सब कुछ बदल गया. ज्यादातर लोग गहरी नींद में थे, तभी भारी बारिश के बीच पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा मिट्टी, विशाल चट्टानों, पेड़ों और पानी के साथ नीचे खिसक आया. कुछ ही पलों में कई घर मलबे के नीचे दब गए. लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला. जो लोग किसी तरह भागकर बच सके, उनकी आंखों के सामने घर, सामान और परिवार के सदस्य मलबे में समा गए.

Odisha Landslide Gidipabali Village: चक्रवात अर्नब की वजह से मूसलाधार बारिश हुई और गंजाम जिले में मौजूद गिड़ीपाबाली गांव पूरी तरह मलबे में समा गया. बचाव अभियान अब बंद हो गया है.

Odisha Landslide Gidipabali Village: चक्रवात अर्नब की वजह से मूसलाधार बारिश हुई और गंजाम जिले में मौजूद गिड़ीपाबाली गांव पूरी तरह मलबे में समा गया. बचाव अभियान अब बंद हो गया है.
Photo Credit: कुमार देव

जिस गिड़ीपाबाली बस्ती में कभी परिवार आबाद थे, वहां अब चारों तरफ सिर्फ मिट्टी, विशाल चट्टानें, उखड़े पेड़ और मलबा दिखाई देता है. कई मकान पूरी तरह जमीन के नीचे दब चुके हैं. घरों का सामान, पशुधन और लोगों की जीवनभर की कमाई देखते ही देखते खत्म हो गई.  

12 लोग लापता हुए, दो के शव मिले

हादसे के बाद शुरुआती जानकारी में 12 लोगों के लापता होने की बात सामने आई थी. बचाव अभियान के दौरान दो शव बरामद किए गए. मृतकों की पहचान 52 वर्षीय रबी मलिक और 29 वर्षीय सलमान प्रधान के रूप में हुई है. हालांकि 10 लोग अब भी लापता हैं. उनके परिवार हर दिन किसी चमत्कार की उम्मीद में इंतजार कर रहे हैं, लेकिन समय के साथ उम्मीदें कमजोर पड़ती जा रही हैं.  घटना के बाद NDRF, ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल (ODRAF), फायर ब्रिगेड, रेलवे और अन्य एजेंसियों की टीमें मौके पर पहुंचीं.  मलबे में दबे लोगों की तलाश के लिए खोजी कुत्तों, लाइफ डिटेक्शन उपकरणों, ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार, ड्रिलिंग मशीनों और नियंत्रित विस्फोट तकनीकों का इस्तेमाल किया गया. बचावकर्मियों ने लगातार कई दिनों तक अभियान चलाया, लेकिन परिस्थितियां बेहद चुनौतीपूर्ण बनी रहीं.

आखिर क्यों रोकना पड़ा सर्च ऑपरेशन?

भूस्खलन के बाद घटनास्थल पर कई टन वजनी चट्टानें जमा हो गईं. कुछ स्थानों पर मलबे की गहराई करीब 30 फीट तक बताई जा रही है. गांव तक पहुंचने के लिए कोई पक्की मोटर सड़क नहीं है. बचाव दलों को फिसलन भरे और खतरनाक पहाड़ी रास्तों से होकर पहुंचना पड़ा. भारी मशीनों को मौके तक ले जाना भी बेहद मुश्किल साबित हुआ. इस दौरान लगातार छोटे-छोटे भूस्खलनों ने बचावकर्मियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ा दी.

Odisha Landslide Gidipabali Village: चक्रवात अर्नब के बाद हुए लैंडस्लाड में गांव इस तरह से मलबे के नीचे दब गया.

Odisha Landslide Gidipabali Village: चक्रवात अर्नब के बाद हुए लैंडस्लाड में गांव इस तरह से मलबे के नीचे दब गया.
Photo Credit: कुमार देव

विशाल चट्टानों को हटाने, ड्रिलिंग करने और नियंत्रित विस्फोट के जरिए रास्ता बनाने की कोशिशें की गईं, लेकिन कोई बड़ी सफलता नहीं मिली. लगातार खराब मौसम, दोबारा बारिश की आशंका और नए भूस्खलन के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने 4-5 नवंबर से तलाशी अभियान स्थगित कर दिया. हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि हालात अनुकूल होने पर आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा.

सबसे दर्दनाक पहलू: अंतिम दर्शन भी नसीब नहीं

इस त्रासदी का सबसे भावुक पहलू उन परिवारों की पीड़ा है, जिनके अपने अब भी लापता हैं. प्रशासन ने परिजनों को बताया है कि सामाजिक और धार्मिक परंपराओं के अनुसार वे सांकेतिक अंतिम संस्कार की प्रक्रिया अपना सकते हैं, क्योंकि आशंका है कि कई लोगों के अवशेष मलबे की गहरी परतों के नीचे दबे हो सकते हैं. परिवारों का दर्द सिर्फ अपनों को खोने का नहीं है, बल्कि उन्हें अंतिम बार देख भी न पाने का है. यही वजह है कि कई परिवार भारी मन से सांकेतिक अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे हैं. राज्य सरकार ने प्रत्येक मृतक के परिवार को 4 लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की है. प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया है. गंजाम जिले में पुनर्वास के लिए तैयार परिवारों को पहले अस्थायी आवास और बाद में स्थायी घर उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है. राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि परिवारों की भावनाओं को देखते हुए भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र में प्रयास पूरी तरह बंद न किए जाएं.

चक्रवात अर्नब ने दक्षिण ओडिशा में मचाई तबाही

गिड़ीपाबाली की त्रासदी चक्रवात अर्नब के बाद दक्षिण ओडिशा में हुई व्यापक तबाही का सबसे भयावह चेहरा बनकर सामने आई है. मूसलाधार बारिश के कारण गंजाम, गजपति और कंधमाल जिलों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए. 100 से अधिक गांव जलमग्न हुए या बाहरी दुनिया से कट गए. अकेले गंजाम जिले में एक लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए. हजारों लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाना पड़ा. खेत डूब गए, सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हो गए तथा कई इलाकों में संपर्क व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई.

सिर्फ एक आपदा नहीं, दर्द की लंबी कहानी

आज गिड़ीपाबाली सिर्फ एक भूस्खलन प्रभावित गांव का नाम नहीं रह गया है. यह उन परिवारों की कहानी है जो अपने प्रियजनों की राह देख रहे हैं. यह उन लोगों की कहानी है जो सब कुछ गंवाने के बाद नई जिंदगी शुरू करने की कोशिश कर रहे हैं. जिन पहाड़ियों ने कभी इन परिवारों को आश्रय दिया था, वही आज उनकी सबसे बड़ी त्रासदी की गवाह बन गई हैं. मलबे के ढेर के नीचे पसरा सन्नाटा और राहत शिविरों में इंतजार कर रहे परिवार इस दर्दनाक आपदा की भयावहता को बयां कर रहे हैं. गिड़ीपाबाली में उम्मीदें अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं, लेकिन हर गुजरते दिन के साथ यह इंतजार और भी ज्यादा पीड़ादायक होता जा रहा है.
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