- आंध्र प्रदेश लोक सेवा आयोग की 2020 की ग्रुप-1 परीक्षा में मूल्यांकन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं.
- एसआईटी की जांच में 736 रिकॉर्ड में से 718 में मूल्यांकन में हेरफेर, ओवरराइटिंग और signature mismatch मिले.
- डिजिटल मूल्यांकन के बाद 326 चयनित अभ्यर्थियों में से 202 अभ्यर्थी मैनुअल मूल्यांकन में बाहर हो गए थे.
आंध्र प्रदेश लोक सेवा आयोग (APPSC) की वर्ष 2020 की ग्रुप-1 मुख्य परीक्षा के मूल्यांकन में एसआईटी (SIT) की जांच में भारी अनियमितताएं और गड़बड़ियां पाई गई हैं. हाई कोर्ट के निर्देश पर गठित एसआईटी ने अपनी अंतिम रिपोर्ट अदालत को सौंप दी है, जिसमें उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में गंभीर स्तर पर हेरफेर की बात सामने आई है.
अब यह मामला अब राजनीतिक रंग भी ले चुका है. TDP ने पिछली YSRCP सरकार पर सवाल उठाए हैं और मूल्यांकन प्रक्रिया में हेरफेर के लिए पूर्व APPSC चेयरमैन, DGP गौतम सवांग और पूर्व सचिव P.S.R. आंजनेयुलु को जिम्मेदार ठहराया है. आंजनेयुलु ने YS जगन के कार्यकाल के दौरान इंटेलिजेंस चीफ के तौर पर भी काम किया था.
डिजिटल मूल्यांकन के बाद चयनित 326 उम्मीदवारों में से 202 अभ्यर्थी मैनुअल मूल्यांकन के बाद बाहर हो गए थे, जिसके बाद हाई कोर्ट ने दोबारा परीक्षा कराने के आदेश दिए थे. एसआईटी द्वारा जांचे गए 736 रिकॉर्ड में से 718 (97.55%) में ओवरराइटिंग, signature mismatch और 169 वैल्यूएशन स्लिप पर व्हाइटनर (Correction Fluid) का इस्तेमाल पाया गया है. इस मामले पर आंध्र प्रदेश में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं, हालांकि एसआईटी को मूल उत्तर पुस्तिकाओं के बदलने या सीधे तौर पर उनसे छेड़छाड़ के सबूत नहीं मिले हैं.
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि तीसरे मूल्यांकन के लिए भेजे जाने वाले मामलों की संख्या 0.45% से बढ़कर 10.2% हो गई. यह विवाद 2022 में शुरू हुआ, जब उम्मीदवारों ने मूल्यांकन प्रक्रिया को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. मार्च 2024 में, कोर्ट ने दूसरे और तीसरे मूल्यांकन को गैर-कानूनी घोषित कर दिया, जिसके बाद फरवरी 2026 में SIT का गठन किया गया.
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