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This Article is From May 25, 2022

अनूठा अदालती इंसाफ : सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के आरोपी को एक हफ्ते तक शरबत पिलाने का सुनाया फरमान

कोर्ट ने आरोपी को हापुड़ के किसी सार्वजनिक स्थान पर राहगीरों को ठंडा पानी और शरबत पिलाने का निर्देश दिया है. साथ ही कोर्ट ने मामले में डीएम और एसपी को भी मदद करने के लिए कहा है, जिससे कि यह गतिविधि शांतिपूवर्क बिना किसी बाधा के संचालित हो और इच्छित सद्भावना व सौहार्द उत्पन्न हो सके.

अनूठा अदालती इंसाफ : सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के आरोपी को एक हफ्ते तक शरबत पिलाने का सुनाया फरमान
अदालत ने जारी किया आदेश
प्रयागराज:

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के आरोपी को जमानत देते हुए सद्भावना और सौहार्द बनाने के लिए एक सप्ताह तक शरबत परोसने का निर्देश दिया है. दरअसल हापुड़ के नवाब पर उस भीड़ का हिस्सा होने का आरोप लगाया गया था जो उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद एक समूह संघर्ष में शामिल थी. जज अजय भनोट ने आदेश में नवाब को जमानत देते हुए कहा, "गंगा जमुनी तहज़ीब बातचीत में मनाई जाने वाली रस्म नहीं है, वास्तव में, यह आचरण में इस्तेमाल होने वाला आत्मबल है. गंगा जमुनी तहज़ीब संस्कृति मतभेदों की सहनशीलता मात्र नहीं है, बल्कि विविधता को स्वीकार करने की चीज है. उत्तर प्रदेश की प्रकृति भारतीय दर्शन को सामने लाती है."

अदालत ने यह भी कहा कि आवेदक ट्रायल के दौरान सबूतों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा और किसी गवाह को प्रभावित नहीं करेगा और तय तारीख पर ट्रायल कोर्ट के सामने पेश होगा. याचिकाकर्ता के वकील ने प्रस्ताव दिया था कि दोनों पक्ष मई-जून 2022 में अपनी पसंद की तारीख और समय पर हापुड़ जिले के एक सार्वजनिक स्थान पर एक सप्ताह के लिए राहगीरों और प्यासे यात्रियों को शर्बत परोसेंगे. अदालत ने निर्देश दिया कि पक्ष इस संबंध में हापुड़ के पुलिस अधीक्षक और हापुड़ के जिलाधिकारी को आवेदन कर सकते हैं. "स्थानीय पुलिस और प्रशासन यह सुनिश्चित करेंगे कि उचित व्यवस्था की जाए ताकि गतिविधि शांति से और बिना किसी बाधा के जारी रह सके और सद्भावना और सौहार्द पैदा कर सके."

अदालत ने महात्मा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीयों की कई पीढ़ियों ने गुलामी की बेड़ियों से आजादी पाने के लिए अपना खून, पसीना, आंसू और परिश्रम किया. आपको बता दें कि आरोपी 11 मार्च 2022 से जेल में है. राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के बीच हुए विवाद के बाद प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जो उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद हिंसक विवाद में बदल गया था. इस मामले में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 147, 148, 504, 307, 354खा और 324 के तहत हापुड़ जिले के सिम्भावली पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज की गई थी.

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