रामनगरी अयोध्या में श्रीराम लला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद तीसरी बार पहुंचे समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राम मंदिर से दूरी बरकरार रखी. अखिलेश यादव ने अयोध्या विधानसभा सीट से सपा के उम्मीदवार पवन पांडेय के कृष्णापुर आवास पर भागवत कथा सुनी.
अयोध्या में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मीडिया से कहा कि जब से हमने अयोध्या में अपनी पार्टी का प्रत्याशी घोषित किया है, भाजपा सर्वे पर सर्वे करा रही है. उन्होंने कहा कि हमको पता है कि हर सर्वे में भाजपा पीछे छूट जा रही है. इतना ही नहीं, उन्होंने कहा कि सुनने में आ रहा है कि अयोध्या में भाजपा को नया प्रत्याशी ही नहीं मिल पा रहा है.
अखिलेश की सीएम योगी को चुनौती
अखिलेश यादव के कहा कि अयोध्या में विकास के बड़े-बड़े दावे करने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अगर इतने ही आश्वस्त हैं तो खुद अयोध्या से चुनाव लड़कर दिखाएं.
उन्होंने सीएम योगी आदित्यनाथ को अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती दे डाली. उन्होंने कहा कि दूध का दूध और पानी का पानी करने का झूठा दावा करने वाले का 'पानी' जनता उतार देगी. इस बार अयोध्या ही नहीं, पूरे प्रदेश की जनता 'धन' चुराने वालों को नहीं बख्शेगी.
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सरकार बनने पर अयोध्या के विकास तो देंगे गति
अखिलेश यादव ने कहा कि सपा की सरकार बनने पर अयोध्या के विकास को गति देंगे. सपा की सरकार में भेदभाव नहीं होगा. सुनिश्चित करेंगे कि अयोध्या के विकास का अधिकांश फायदा अयोध्या के लोगों को मिले, बाहरियों को नहीं.
उन्होंने कहा कि जैसे समाजवादी पेंशन दी थी, वैसे ही हर साल महिलाओं को 400,00 रुपये देंगे. अयोध्या की पहचान को वैश्विक स्तर पर ले जाने के लिए जो भी करना होगा, हमारी सरकार आने पर हम करेंगे.
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सीख देती है भागवत कथा
अखिलेश यादव ने कहा कि ये प्रभु श्रीराम की जन्मस्थली है. सभी हरि भक्त मिलकर जय राधे-श्याम कह रहे हैं. यही खूबसूरती है. मैं सोच रहा था कि अयोध्या जाकर किन बात को रखूंगा.
अखिलेश ने कहा कि हम बचपन से रामायण-महाभारत सुनते हैं. हमारे लिए प्रभु श्री राम ही प्रभु श्री कृष्ण हैं. कथा मन और मनोबल को बढ़ाती है. भागवत कथा सीख देती है. सत्ता की एजेंसियों को सीखना चाहिए कि प्रेम, दया और अपनापन ही सबसे बड़ा धर्म है.
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अयोध्या से पवन पांडेय सपा के प्रत्याशी
अखिलेश यादव ने 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए अयोध्या सीट से पवन पांडेय को अपनी पार्टी का प्रत्याशी घोषित किया है. उन्होंने करीब दो महीने पहले तेज नारायण पांडेय ‘पवन पांडेय' के नाम की घोषणा की थी.
अखिलेश सनातन विरोधी हैंः भाजपा
भाजपा ने अखिलेश यादव को सनातन विरोधी बताया है. यूपी के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव अयोध्या धाम जाकर भी रामलला के दर्शन नहीं करेंगे, क्योंकि कारसेवकों के खून से समाजवादी पार्टी के हाथ रंगे हुए हैं.
आगरा, उत्तर प्रदेश: उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे पर कहा, "समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव अयोध्या धाम जाकर भी रामलला के दर्शन नहीं करेंगे, क्योंकि कारसेवकों के खून से समाजवादी पार्टी के हाथ रंगे हुए हैं। वे सनातन संस्कृति के घोर विरोधी हैं। ये केवल मुस्लिम तुष्टिकरण पर आधारित पार्टियां हैं। ये जातिवाद और मुस्लिम तुष्टिकरण के कारण ही राजनीति में हैं। इनका सर्व समाज से कोई लेना-देना नहीं है। ये सनातन संस्कृति के घोर विरोधी हैं।"
— IANS Hindi (@IANSKhabar) October 8, 2026
उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश सनातन संस्कृति के घोर विरोधी हैं. ये केवल मुस्लिम तुष्टिकरण पर आधारित पार्टियां हैं. ये जातिवाद और मुस्लिम तुष्टिकरण के कारण ही राजनीति में हैं. इनका सर्व समाज से कोई लेना-देना नहीं है.
वहीं, यूपी सरकार में मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने तो यहां तक कह दिया कि अखिलेश को मुस्लिमों से प्यार है.
अलीगढ़, उत्तर प्रदेश: मंत्री ओपी राजभर ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव के बयान पर कहा, "सही कह रहे हैं वे, क्योंकि उन्हें मुस्लिम प्रेम है। वे मस्जिद जा सकते हैं, वहां नमाज पढ़ सकते हैं और फातिहा पढ़ सकते हैं, लेकिन मंदिर नहीं जा सकते। वे सनातन को नहीं मानते हैं। जैसे वे इस्लाम को मानते हैं। अगर वे इस्लाम को नहीं मानते हैं, तो फिर मस्जिद में कैसे जाते हैं? वहां नमाज कैसे पढ़ते हैं और फातिहा कैसे पढ़ते हैं? मजे की बात यह है कि आप उठाकर देखिए, मौलाना ने ही उनकी पत्नी के मस्जिद में जाने पर सवाल उठाया था। लेकिन उस पर भी अखिलेश यादव ने कहीं कुछ नहीं कहा, शायद इस डर से कि मियां-भाई लोग नाराज न हो जाएं। जो अपनी पत्नी की सुरक्षा नहीं कर सकता, उसके लिए एक द्रौपदी के अपमान को लेकर इतना बड़ा महाभारत हुआ था और कृष्ण भगवान ने उनकी इज्जत बचाई थी। वे कृष्ण के वंशज हैं और अपनी पत्नी की इज्जत नहीं बचा पा रहे हैं, जबकि उनके मौलाना इस तरह की बातें कर रहे हैं। तो फिर कृष्ण जन्माष्टमी पर आप मथुरा क्यों नहीं गए? अगर कृष्ण भगवान और राम एक ही हैं, तो जब आप अयोध्या गए थे, तब राम मंदिर जाकर दर्शन क्यों नहीं किए? यह सवाल खड़ा होता है।"
— IANS Hindi (@IANSKhabar) October 8, 2026
राजभर ने कहा कि उन्हें मुस्लिम प्रेम है. वे मस्जिद जा सकते हैं, वहां नमाज पढ़ सकते हैं और फातिहा पढ़ सकते हैं, लेकिन मंदिर नहीं जा सकते. वे सनातन को नहीं मानते हैं. जैसे वे इस्लाम को मानते हैं. अगर वे इस्लाम को नहीं मानते हैं, तो फिर मस्जिद में कैसे जाते हैं? वहां नमाज कैसे पढ़ते हैं और फातिहा कैसे पढ़ते हैं?
उन्होंने कहा कि अगर कृष्ण भगवान और राम एक ही हैं, तो जब आप अयोध्या गए थे, तब राम मंदिर जाकर दर्शन क्यों नहीं किए? यह सवाल खड़ा होता है.
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