- अजित पवार का अंतिम संस्कार बारामती के विद्या प्रतिष्ठान ग्राउंड में राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा
- अजित पवार ने बारामती में सड़कों, सिंचाई प्रोजेक्टों और स्कूल-कॉलेज बनाने में अहम भूमिका निभाई है
- अजित पवार का बारामती से गहरा भावनात्मक जुड़ाव था, जहां वो सुबह 6 बजे से जनता दरबार लगाते थे
महाराष्ट्र के पुणे जिले का बारामती, अजित पवार का पावर सेंटर. वो गढ़, जहां 'दादा' के शब्द ही शासन हुआ करते थे! महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार अब उसी बारामती की मिट्टी में विलीन होने जा रहे हैं. गुरुवार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा.
बारामती के विकास के पर्याय थे अजित पवार
बुधवार को हुए विमान हादसे ने न सिर्फ महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम बल्कि बारामती को विकास का मॉडल बनाने वाले, ग्राउंड जीरो के नायक को भी छीन लिया. अजित पवार जिन्हें प्यार से लोग 'दादा' कहते थे, न केवल एनसीपी के बड़े नेता थे बल्कि बारामती के विकास के पर्याय थे. बारामती से उनका जुड़ाव महज एक चुनाव क्षेत्र का नहीं बल्कि 'मिट्टी के बेटे' की तरह था.
चाचा का विजन, भतीजे ने धरातल पर उतारा
पवार परिवार की राजनीति में दशकों तक एक स्पष्ट विभाजन रहा, जिसने इस गढ़ को अजेय बनाया. शरद पवार ने राष्ट्रीय राजनीति और दिल्ली पर फोकस किया. वहीं महाराष्ट्र की कमान और खासतौर से पुणे जिले का माइक्रो मैनेजमेंट अजित पवार ने संभाला. शरद पवार ने विजन दिया, तो अजित पवार ने उसे धरातल पर उतारा. बारामती में सड़कों का जाल, सिंचाई परियोजनाएं और शैक्षणिक संस्थानों का निर्माण अजित पवार की प्रशासनिक पकड़ का ही परिणाम था.
सुबह 6 बजे से लगता था 'दादा' का दरबार
बारामती सिर्फ पवार परिवार की पारंपरिक सीट नहीं है, यह उनके 'कल्याणकारी मॉडल' का सेंटर रहा है. विद्या प्रतिष्ठान जैसे संस्थान और MIDC के जरिए रोजगार पैदा करना हमेशा अजित पवार की प्राथमिकताओं में रहे. बारामती से अजित पवार का किस कदर लगाव था, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्हें आमतौर पर बारामती के हर गांव के कार्यकर्ता का नाम याद रहता था. सुबह 6 बजे से जनता दरबार लगाना उनकी पहचान थी.
सूखे इलाके को बनाया सबसे विकसित तहसील
बारामती के लोग प्रशासन से ज्यादा 'दादा' के शब्दों पर भरोसा किया करते थे. उन्होंने बारामती को एक सूखे इलाके से महाराष्ट्र के सबसे विकसित तहसील में बदल दिया था. बारामती के लोगों के लिए दादा केवल डिप्टी सीएम नहीं थे, वो परिवार के मुखिया थे. बारामती से उनका जुड़ाव विकास के साथ-साथ भावनात्मक भी था.
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मर्जी के बिना पत्ता भी नहीं हिलता
अजित पवार का राजनीतिक उदय पुणे जिला सहकारी बैंक और चीनी मिलों के जरिए हुआ. पुणे जिले की राजनीति पर उनका ऐसा प्रभाव था कि पुणे नगर निगम से लेकर पिंपरी-चिंचवाड़ और जिला परिषद तक में, उनकी मर्जी के बिना पत्ता भी नहीं हिलता था.
विद्या प्रतिष्ठान ग्राउंड में अंतिम संस्कार
ये महज संयोग नहीं कि अजित पवार का निधन और अंतिम संस्कार बारामती में ही हो रहा है. वही बारामती, जिसे सजाने संवारने में उन्होंने अपना पूरा जीवन लगा दिया. काटेवाडी उनका पैतृक गांव और विद्या प्रतिष्ठान ग्राउंड जहां अंतिम संस्कार होना है, उनके संघर्षों और सफलता के गवाह रहे हैं.
अजित पवार की राजनीति एक्शन की राजनीति थी. उन्होंने बारामती को ऐसी पहचान दिलाई कि आज वह देश के सबसे हाई प्रोफाइल निर्वाचन क्षेत्रों में गिना जाता है. अजित का अंतिम संस्कार उसी विद्या प्रतिष्ठान के मैदान पर होगा, जिसे उन्होंने खुद सींचा था, यह उनके और बारामती के अटूट रिश्ते का अंतिम अध्याय होगा.
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