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PACL घोटाले में ED का बड़ा एक्शन, 567 करोड़ रुपये की 48 संपत्तियां अटैच

CBI की चार्जशीट और सप्लीमेंट्री चार्जशीट के मुताबिक, आरोपियों ने देशभर में लाखों निवेशकों से 48 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम जुटाई. निवेशकों को कृषि जमीन बेचने और विकसित करने के नाम पर निवेश के लिए तैयार किया गया था. जांच एजेंसियों के मुताबिक, निवेशकों को अलग-अलग प्लान के जरिए पैसा लगाने के लिए कहा गया. इनमें Cash Down Payment और Instalment Payment Plans शामिल थे.

PACL घोटाले में ED का बड़ा एक्शन, 567 करोड़ रुपये की 48 संपत्तियां अटैच
नई दिल्ली:

PACL से जुड़े हजारों करोड़ रुपये के कथित निवेश घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई की है. ED के दिल्ली जोनल ऑफिस ने महाराष्ट्र के पुणे, मुंबई और रायगढ़ में मौजूद 48 अचल संपत्तियों को अस्थायी तौर पर अटैच किया है. इन संपत्तियों की मौजूदा बाजार कीमत करीब 567.45 करोड़ रुपये बताई गई है.

ED के मुताबिक ये संपत्तियां प्रतीक कुमार, उनके बेटे अंश प्रतीक कुमार और उनसे जुड़ी तीन कंपनियों बीमिंग इन्फ्राडेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, गणराज प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड और ग्रीनफील्ड एस्टेट्स लिमिटेड के नाम पर हैं. जांच में ED का दावा है कि इन कंपनियों पर प्रतीक कुमार का लाभकारी मालिकाना हक और नियंत्रण है. यह पूरा मामला PACL और उससे जुड़ी कंपनियों की कथित अवैध कलेक्टिव इन्वेस्टमेंट स्कीम से जुड़ा है. ED की जांच CBI, नई दिल्ली में दर्ज FIR के आधार पर शुरू हुई थी. CBI ने इस मामले में IPC की धारा 120-B यानी आपराधिक साजिश और 420 यानी धोखाधड़ी के तहत केस दर्ज किया था.

PACL के पैसों को दूसरी संपत्तियों में लगाने का आरोप

निवेशकों से एग्रीमेंट, पावर ऑफ अटॉर्नी और दूसरे दस्तावेजों पर साइन भी करवाए गए. लेकिन आरोप है कि ज्यादातर मामलों में निवेशकों को जमीन नहीं मिली. ED के मुताबिक करीब 48 हजार करोड़ रुपये की रकम अभी भी निवेशकों को वापस नहीं की गई है. ED की जांच में सामने आया कि PACL से निवेशकों से जुटाए गए पैसों को कथित तौर पर दूसरी जगह डायवर्ट किया गया. ED का आरोप है कि इसी डायवर्ट किए गए पैसे से महाराष्ट्र में ये संपत्तियां खरीदी गईं.

यानी जांच एजेंसी के मुताबिक, निवेशकों से जुटाई गई रकम को PACL से निकालकर ऐसी संपत्तियों की खरीद में इस्तेमाल किया गया, जिन्हें अब Proceeds of Crime यानी अपराध से हासिल रकम से बनाई गई संपत्ति माना जा रहा है. ED ने इस मामले में साल 2016 में ECIR दर्ज किया था. इसके बाद साल 2018 में चार्जशीट दाखिल की गई. इसके अलावा ED ने 2022, 2025 और 2026 में छह सप्लीमेंट्री चार्जशीट भी दाखिल की हैं. इन शिकायतों में मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में अलग-अलग आरोपियों और कंपनियों को आरोपी बनाया गया.

ED के मुताबिक, प्रतीक कुमार को 20 अगस्त 2022 की पहली सप्लीमेंट्री चार्जशीट में आरोपी  बनाया गया था. इस मामले में स्पेशल कोर्ट ने 19 सितंबर 2022 को संज्ञान लिया था. इसके बाद कोर्ट ने 9 अप्रैल 2025 को प्रतीक कुमार के खिलाफ NBW जारी किया. ED के मुताबिक, महाराष्ट्र में की गई इस ताजा कार्रवाई के बाद PACL मामले में जांच एजेंसी की ओर से अब तक अटैच की गई चल और अचल संपत्तियों की कुल कीमत करीब 30,235.21 करोड़ रुपये हो गई है. इन संपत्तियों में भारत के अलावा विदेशों में मौजूद संपत्तियां और दूसरी एसेट्स भी शामिल हैं.

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