- तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में आंखों के इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति मांगी है.
- कलकत्ता हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी को विदेश जाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था.
- अभिषेक पर चुनाव के दौरान भड़काऊ भाषण देने का मामला दर्ज है, और अदालत की अनुमति के बिना वे विदेश नहीं जा सकते.
तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर विदेश जाने की इजाजत मांगी है. वो अपनी आंखों का इलाज विदेश में कराना चाहते हैं. लेकिन भारत में कई केसों में उनका नाम शामिल है, अभिषेक के खिलाफ पुलिस और अन्य एजेंसी जांच कर रही है. ऐसे में कलकत्ता हाई कोर्ट ने उन्हें इलाज के लिए विदेश जाने की इजाजत नहीं दी है. जिसके बाद बंगाल की पूर्व सीएम ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर आंखों के इलाज के लिए विदेश जाने देने की इजाजत मांगी है. शीर्ष अदालत 3 अगस्त को इस याचिका पर सुनवाई कर सकती है.
कलकत्ता हाईकोर्ट ने विदेश जाने की नहीं दी थी इजाजत
इससे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने उन्हें विदेश जाने की इजाजत देने से इनकार कर दिया था. हाईकोर्ट ने बनर्जी को सलाह दी थी कि वे पहले कोलकाता के सरकारी SSKM अस्पताल के विशेषज्ञों से परामर्श लें.
अदालत की अनुमति के बिना नहीं जा सकते विदेश
दरअसल अभिषेक बनर्जी पर चुनाव के दौरान भड़काऊ भाषण देने से जुड़े एक आपराधिक मामला दर्ज है. इसी मामले में हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी को राहत देते हुए दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा दी थी. हालांकि, कोर्ट ने यह सख्त शर्त रखी थी कि वे अदालत की पूर्व अनुमति के बिना देश से बाहर नहीं जा सकते हैं.
अभिषेक बनर्जी का कहना है कि उनकी आंखों में दिक्कत है. जिसके इलाज के लिए उन्हें विदेश जाना होगा. लेकिन कलकत्ता हाईकोर्ट ने उन्हें विदेश जाने की अनुमति नहीं दी. हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद वो यहां पहुंचे हैं. हालांकि शीर्ष अदालत में मामले को अब तक सूचीबद्ध नहीं किया गया है.
उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने बनर्जी को दंडात्मक कार्रवाई से राहत देने के साथ पूर्व की तरह जांच में सहयोग करने और अदालत की अनुमति के बिना विदेश यात्रा न करने का निर्देश दिया था.
हाईकोर्ट ने कहा था- कलकता में कई नामी आंख के अस्पताल
डायमंड हार्बर से लोकसभा सदस्य बनर्जी ने आंखों के इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की थी. उच्च न्यायालय ने उनके अनुरोध को स्वीकार करने को लेकर अनिच्छा जताते हुए कहा कि कोलकाता में आंख के कई नामी अस्पताल हैं.
न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने मौखिक टिप्पणी की कि सांसद को सरकारी एसएसकेएम अस्पताल के नेत्र रोग विभाग के प्रमुख के पास जाना चाहिए, जो यह तय करेंगे कि उनके आंखों की समस्या का इलाज वहां हो सकता है या नहीं.
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