देहरादून:
उत्तराखंड में बाढ़ में फंसे 97 हजार लोगों को अब तक बचा लिया गया है जबकि छह हजार से ज़्यादा लोग अब भी फंसे हुए हैं।
सोमवार को बारिश के कारण राहत के काम में ख़ासी दिक्कत आई... कई जगह तेज़ बारिश हुई... हेलीकॉप्टर रोज़ की तरह उड़ान नहीं भर पाए लेकिन बावजूद इन सबके वायुसेना ने अपनी मुहिम जारी रखी।
मौसम विभाग के अनुसार राज्य में अगले तीन दिन भारी बारिश की आशंका है। विभाग ने इसके लिए अलर्ट जारी किया है। इसके चलते राहत के काम में परेशानी हो सकती है।
सोमवार को आपदा प्रभावित उत्तराखंड के देहरादून और अन्य हिस्सों में भारी बारिश के कारण राज्य में चल रहे राहत कार्यों में रुकावट पैदा हुई।
सेना, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रया बल (एनडीआरएफ) और भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के कर्मी पिछले सप्ताह मची तबाही के बाद वहां फंसे लोगों को निकालने में तत्परता से जुटे हुए हैं।
सरकार ने कहा है कि अभी तक 557 शव मिले हैं। कुछ अधिकारियों और राहतकर्मियों ने कहा है कि मारे गए लोगों की संख्या यदि हजारों में नहीं तो सैकड़ों में हो सकती है।
राज्य सरकार के अधिकारियों ने बताया कि रुद्रप्रयाग में बारिश हो रही है और तिलवाड़ा तथा गौरीकुंड का संपर्क एक बार फिर टूट गया है।
सेना के एक अधिकारी ने बताया कि गौरीकुंड में 500 से ज्यादा लोग फंसे हुए हैं। भारी बारिश के कारण लोगों को सुरक्षित निकालने का काम रोक दिया गया है।
गुप्तकाशी, हर्षिल और बद्रीनाथ में भी बारिश होने की जानकारी मिली है। इन जगहों पर अभी भी हजारों की तादाद में लोग फंसे पड़े हैं।
देवप्रयाग में भारी बारिश और खराब मौसम के कारण वायुसेना के आठ हेलीकॉप्टर राहत अभियान से वापस बुला लिए गए हैं। विपरीत मौसम में हेलीकॉप्टर की उड़ान खतरनाक और असंभव हो गया है।
रुद्रप्रयाग क्षेत्र में अलकनंदा और मंदाकिनी का जलस्तर एक बार फिर बढ़ गया है। पिथौरागढ़, नैनीताल, चंपावत, उधमसिंहनगर और हल्द्वानी समेत राज्य के अन्य हिस्सों में सोमवार को भारी बारिश हुई।
उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन मंत्री यशपाल आर्य ने बताया कि राज्य सरकार और अन्य एजेंसियों का ध्यान अब चारधाम यात्रा मार्ग में फंसे लोगों को बचाने पर केंद्रित है।
पौढ़ी के थालिसैन में बादल फटने की जानकारी मिली है। प्रारंभिक जानकारी में वहां से किसी जनहानि की सूचना नहीं मिली है।
राहत अभियान में जुटे सेना के अधिकारियों ने स्वीकार किया कि बारिश और खराब मौसम ने फंसे हुए लोगों को निकालने के काम को धीमा कर दिया है और मौसम के साफ होने के बाद ही हेलीकॉप्टर उड़ान भर सकेंगे।
इलाके का हवाई सर्वेक्षण किया गया है। सुरक्षित लौट आए लोगों ने बताया कि अभी भी 15000 से ज्यादा लोग फंसे हुए हैं।
नई दिल्ली में सेव द चिल्ड्रेन संगठन ने सोमवार को कहा कि उत्तराखंड में फंसे हजारों बच्चों और महिलाओं को मौसम खराब होने से पहले भोजन और दवा मुहैया कराने की तत्काल आवश्यकता है।
प्रकृति की विनाशलीला का सामना करने वाले उत्तराखंड की सहायता के लिए दिल्ली के विधायकों ने एक माह का वेतन देने के अलावा अपने विधायक क्षेत्र विकास निधि से 10 लाख रुपये देने का फैसला लिया है। दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने सोमवार को इस आशय की घोषणा की।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उत्तराखंड के लिए राहत सामग्री से भरे ट्रकों को रवाना किया। इन ट्रकों पर भोजन सामग्री, दवाएं, कपड़े और कंबल हैं। इस मौके पर कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी मौजूद थे। बाद में राहुल स्थिति का जायजा लेने के लिए देहरादून पहुंचे।
मेघालय सरकार ने पैराग्लाइडर संघ के सदस्यों को शामिल करते हुए एक राहत दल उत्तराखंड में राहत अभियान में सहायता के लिए भेजा है। जिन इलाकों में हेलीकॉप्टर नहीं उतारा जा सकता, वहां पैराग्लाइडर उपयोगी साबित हो सकते हैं।
धर्मशाला में सैकड़ों की संख्या में तिब्बती शरणार्थियों ने सोमवार को आपदा में मारे गए लोगों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
भारी बारिश के चलते कई जगह जमीन धंसी है और रूद्रप्रयाग को श्रीनगर से जोड़ने वाली सड़क समेत कई रास्ते बंद हो गए हैं।
नेशनल हाइवे नंबर 58 भी बाधित हो गया है। यह बारिश बीती देर रात से गुप्तकाशी समेत आसपास के इलाकों में हो रही है। वायुसेना और दूसरी बचाव एजेंसियों का कहना है कि उन्हें बस तीन−चार घंटे का समय चाहिए।
सबसे बड़ी चुनौती हर्षिल में नौ दिन से फंसे 2000 लोगों को निकालना है। पांच हजार लोग बद्रीनाथ में फंसे हुए हैं।
रविवार को 12000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। राज्य के आपदा मंत्री का कहना है कि इस त्रासदी में कम से कम 5000 लोगों के मारे जाने की आशंका है।
राज्य के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कहा है कि मंदिर के आसपास पड़े शवों की शिनाख्त के बाद आज उनका अंतिम संस्कार भी किया जाएगा. क्योंकि पिछले नौ दिन से शवों के वहां पड़े रहने की वजह से महामारी के फैलने की आशंका है।
केंद्रीय गृहमंत्री सुशील शिंदे ने कहा है कि अब बचाव अभियान का केंद्र केदारनाथ से बद्रीनाथ की तरफ घूम रहा है। केदारनाथ से सभी फंसे हुए लोगों को निकाला जा चुका है, जबकि बद्रीनाथ में अब भी 5000 लोग अब भी फंसे हुए हैं
वायुसेना ने ऐलान किया है कि मौसम भले खराब हो उसका अभियान चलता रहेगा। खराब मौसम के बावजूद वायुसेना फंसे लोगों को निकालने के काम में लगी है। हरसिल−धरासू और रामपुर−कचर्म−पुह−सांगल इलाके में वायुसेना ने आज 52 उड़ानें भर कर 430 लोगों को निकाला है।
इस काम में 6 एमआई-17 और एएलएच हेलीकॉप्टर लगे हैं। वायुसेना के अधिकारियों का कहना है कि जब तक एक−एक बचे लोगों को निकाल नहीं लिया जाता तब हेलीकॉप्टर उड़ान भरते रहेंगे
उत्तराखंड के लम्बागढ़ में आईटीबीपी के 200 विशेषज्ञ पर्वतारोहियों ने अलकनंदा नदी पर रस्सियों का एक पुल बनाया है। इस पुल के जरिये लोगों को बचाने के काम में काफी तेजी आ गई है।
आईटीबीपी अब तक करीब 2 हजार लोगों को लम्बागड़ लेकर आई है। यहां से रस्सियों के इस पुल के जरिये इन्हें गोविंदघाट पर पहुंचाया गया है। जहां से पीड़ितों को जोशीमठ भेजा जा रहा है।
लापता लोगों की सूची
सोमवार को बारिश के कारण राहत के काम में ख़ासी दिक्कत आई... कई जगह तेज़ बारिश हुई... हेलीकॉप्टर रोज़ की तरह उड़ान नहीं भर पाए लेकिन बावजूद इन सबके वायुसेना ने अपनी मुहिम जारी रखी।
मौसम विभाग के अनुसार राज्य में अगले तीन दिन भारी बारिश की आशंका है। विभाग ने इसके लिए अलर्ट जारी किया है। इसके चलते राहत के काम में परेशानी हो सकती है।
सोमवार को आपदा प्रभावित उत्तराखंड के देहरादून और अन्य हिस्सों में भारी बारिश के कारण राज्य में चल रहे राहत कार्यों में रुकावट पैदा हुई।
सेना, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रया बल (एनडीआरएफ) और भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के कर्मी पिछले सप्ताह मची तबाही के बाद वहां फंसे लोगों को निकालने में तत्परता से जुटे हुए हैं।
सरकार ने कहा है कि अभी तक 557 शव मिले हैं। कुछ अधिकारियों और राहतकर्मियों ने कहा है कि मारे गए लोगों की संख्या यदि हजारों में नहीं तो सैकड़ों में हो सकती है।
राज्य सरकार के अधिकारियों ने बताया कि रुद्रप्रयाग में बारिश हो रही है और तिलवाड़ा तथा गौरीकुंड का संपर्क एक बार फिर टूट गया है।
सेना के एक अधिकारी ने बताया कि गौरीकुंड में 500 से ज्यादा लोग फंसे हुए हैं। भारी बारिश के कारण लोगों को सुरक्षित निकालने का काम रोक दिया गया है।
गुप्तकाशी, हर्षिल और बद्रीनाथ में भी बारिश होने की जानकारी मिली है। इन जगहों पर अभी भी हजारों की तादाद में लोग फंसे पड़े हैं।
देवप्रयाग में भारी बारिश और खराब मौसम के कारण वायुसेना के आठ हेलीकॉप्टर राहत अभियान से वापस बुला लिए गए हैं। विपरीत मौसम में हेलीकॉप्टर की उड़ान खतरनाक और असंभव हो गया है।
रुद्रप्रयाग क्षेत्र में अलकनंदा और मंदाकिनी का जलस्तर एक बार फिर बढ़ गया है। पिथौरागढ़, नैनीताल, चंपावत, उधमसिंहनगर और हल्द्वानी समेत राज्य के अन्य हिस्सों में सोमवार को भारी बारिश हुई।
उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन मंत्री यशपाल आर्य ने बताया कि राज्य सरकार और अन्य एजेंसियों का ध्यान अब चारधाम यात्रा मार्ग में फंसे लोगों को बचाने पर केंद्रित है।
पौढ़ी के थालिसैन में बादल फटने की जानकारी मिली है। प्रारंभिक जानकारी में वहां से किसी जनहानि की सूचना नहीं मिली है।
राहत अभियान में जुटे सेना के अधिकारियों ने स्वीकार किया कि बारिश और खराब मौसम ने फंसे हुए लोगों को निकालने के काम को धीमा कर दिया है और मौसम के साफ होने के बाद ही हेलीकॉप्टर उड़ान भर सकेंगे।
इलाके का हवाई सर्वेक्षण किया गया है। सुरक्षित लौट आए लोगों ने बताया कि अभी भी 15000 से ज्यादा लोग फंसे हुए हैं।
नई दिल्ली में सेव द चिल्ड्रेन संगठन ने सोमवार को कहा कि उत्तराखंड में फंसे हजारों बच्चों और महिलाओं को मौसम खराब होने से पहले भोजन और दवा मुहैया कराने की तत्काल आवश्यकता है।
प्रकृति की विनाशलीला का सामना करने वाले उत्तराखंड की सहायता के लिए दिल्ली के विधायकों ने एक माह का वेतन देने के अलावा अपने विधायक क्षेत्र विकास निधि से 10 लाख रुपये देने का फैसला लिया है। दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने सोमवार को इस आशय की घोषणा की।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उत्तराखंड के लिए राहत सामग्री से भरे ट्रकों को रवाना किया। इन ट्रकों पर भोजन सामग्री, दवाएं, कपड़े और कंबल हैं। इस मौके पर कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी मौजूद थे। बाद में राहुल स्थिति का जायजा लेने के लिए देहरादून पहुंचे।
मेघालय सरकार ने पैराग्लाइडर संघ के सदस्यों को शामिल करते हुए एक राहत दल उत्तराखंड में राहत अभियान में सहायता के लिए भेजा है। जिन इलाकों में हेलीकॉप्टर नहीं उतारा जा सकता, वहां पैराग्लाइडर उपयोगी साबित हो सकते हैं।
धर्मशाला में सैकड़ों की संख्या में तिब्बती शरणार्थियों ने सोमवार को आपदा में मारे गए लोगों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
भारी बारिश के चलते कई जगह जमीन धंसी है और रूद्रप्रयाग को श्रीनगर से जोड़ने वाली सड़क समेत कई रास्ते बंद हो गए हैं।
नेशनल हाइवे नंबर 58 भी बाधित हो गया है। यह बारिश बीती देर रात से गुप्तकाशी समेत आसपास के इलाकों में हो रही है। वायुसेना और दूसरी बचाव एजेंसियों का कहना है कि उन्हें बस तीन−चार घंटे का समय चाहिए।
सबसे बड़ी चुनौती हर्षिल में नौ दिन से फंसे 2000 लोगों को निकालना है। पांच हजार लोग बद्रीनाथ में फंसे हुए हैं।
रविवार को 12000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। राज्य के आपदा मंत्री का कहना है कि इस त्रासदी में कम से कम 5000 लोगों के मारे जाने की आशंका है।
राज्य के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कहा है कि मंदिर के आसपास पड़े शवों की शिनाख्त के बाद आज उनका अंतिम संस्कार भी किया जाएगा. क्योंकि पिछले नौ दिन से शवों के वहां पड़े रहने की वजह से महामारी के फैलने की आशंका है।
केंद्रीय गृहमंत्री सुशील शिंदे ने कहा है कि अब बचाव अभियान का केंद्र केदारनाथ से बद्रीनाथ की तरफ घूम रहा है। केदारनाथ से सभी फंसे हुए लोगों को निकाला जा चुका है, जबकि बद्रीनाथ में अब भी 5000 लोग अब भी फंसे हुए हैं
वायुसेना ने ऐलान किया है कि मौसम भले खराब हो उसका अभियान चलता रहेगा। खराब मौसम के बावजूद वायुसेना फंसे लोगों को निकालने के काम में लगी है। हरसिल−धरासू और रामपुर−कचर्म−पुह−सांगल इलाके में वायुसेना ने आज 52 उड़ानें भर कर 430 लोगों को निकाला है।
इस काम में 6 एमआई-17 और एएलएच हेलीकॉप्टर लगे हैं। वायुसेना के अधिकारियों का कहना है कि जब तक एक−एक बचे लोगों को निकाल नहीं लिया जाता तब हेलीकॉप्टर उड़ान भरते रहेंगे
उत्तराखंड के लम्बागढ़ में आईटीबीपी के 200 विशेषज्ञ पर्वतारोहियों ने अलकनंदा नदी पर रस्सियों का एक पुल बनाया है। इस पुल के जरिये लोगों को बचाने के काम में काफी तेजी आ गई है।
आईटीबीपी अब तक करीब 2 हजार लोगों को लम्बागड़ लेकर आई है। यहां से रस्सियों के इस पुल के जरिये इन्हें गोविंदघाट पर पहुंचाया गया है। जहां से पीड़ितों को जोशीमठ भेजा जा रहा है।
लापता लोगों की सूची
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