इलाहाबाद:
नोएडा के दंतविज्ञानी दंपती राजेश और नुपुर तलवार ने सोमवार को अपनी पुत्री आरुषि की हत्या मामले में उन विभिन्न तथ्यों का हवाला देते हुए पूरक हलफनामा दायर किया जिसके बारे में उनका दावा है कि यह तथ्य जांच के दौरान सामने आए थे लेकिन जांच एजेंसी ने इन्हें नजरअंदाज कर दिया। तलवार दंपती ने अपने हलफनामे में दावा किया कि छह नवंबर 2008 को किये गये डीएनए परीक्षण के निष्कर्ष में बताया गया था कि उनके घर की छत, घर में पाई गई व्हिस्की की बोतल और एक अन्य नौकर कृष्णा के तकिए पर पाए गए अंगुलियों के निशान एक ही व्यक्ति के थे और निश्चित तौर पर यह व्यक्ति पुरुष था। दंपती ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें आरुषि के कंप्यूटर तक पहुंच से प्रतिबंधित कर दिया गया था जबकि उन्होंने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत एक आवेदन दिया था। इस कंप्यूटर को सीबीआई ने जांच के लिए जब्त कर लिया था। तलवार दंपती ने कहा कि उन्हें कंप्यूटर तक पहुंच मुहैया करायी जाए ताकि यह पता लगाया जा सके कि राउटर को किसने स्विच ऑफ किया होगा जो इंटरनेट तक पहुंच के लिए आवश्यक है। 15 मई 2008 को राउटर उस समय चालू अवस्था में पाया गया था जब आरूषि अपने कमरे में मृत पायी गयी थी। तलवार दंपती ने यह भी कहा कि इसके अलावा आरूषि की मां नुपुर के खिलाफ भी कोई सबूत नहीं पाया गया था। तलवार दंपती के वकील गोपाल चतुर्वेदी ने तर्क दिया कि यदि मुकदमे के दौरान हत्याकांड में उनके खिलाफ कोई सबूत सामने आता है, तो अदालत दंड प्रक्रिया संहिता की केवल धारा 319 के तहत नुपुर के खिलाफ कार्यवाही कर सकती है। सीबीआई के वकील नजरूल इस्लाम जाफरी ने पिछले शुक्रवार को किये गये तलवार के इस दावे को, कि जांच एजेंसी को याचिका का विरोध करने का कोई अधिकार नहीं है, यह कहते हुए खारिज किया कि सीबीआई इस मामले में कोई पक्ष नहीं है और वह केवल अदालत की मदद के लिए इस मामले में तर्क पेश कर रही है।