Loan Moratorium Case : लोन पर मोहलत से दौरान चक्रवृद्धि ब्याज माफ करने के मामले में बुधवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की, सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि केंद्र सरकार के हाथ में आम आदमी की दीवाली है. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा, "जिन्होंने 2 करोड़ तक का ऋण लिया है इसे लागू करने के लिए औपचारिकताएं कब पूरी की जाएंगी?" इस पर केंद्र ने जवाब दिया, "राहत देने की बाहरी सीमा 15 नवंबर है. सरकार एक बड़ा बोझ उठा रही है, लेकिन हम इस आंकड़े का उल्लेख नहीं कर रहे हैं. सरकार द्वारा दी गई राहत जो भी लागू होगी, यह हो जाएगा."
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आम लोग चिंतित हैं. हम 2 करोड़ तक के ऋण वाले लोगों से चिंतित हैं. केंद्र ने जवाब दिया कि यह 15 नवंबर तक केवल कुछ औपचारिकताओं द्वारा किया जाएगा. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार को एक महीने की जरूरत क्यों है? हम इस निर्णय के लिए सरकार की आवश्यकता के साथ सहमत नहीं हैं. जब आपने निर्णय ले लिया है कि एक महीने की देरी क्यों हो रही है?हमारे विचार में निर्णय को लागू करने के लिए एक महीने की आवश्यकता नहीं है और यह सरकार की ओर से उचित नहीं है."
-
AI से बुलेट ट्रेन तक... अश्विनी वैष्णव ने बताया भारत का फ्यूचर प्लान -
बिकिनी सीन करने में कृति सेनन को क्यों लगे 12 साल? बोलीं- 6-7 साल पहले ऐसा नहीं कर पातीं -
AI एक्ट्रेस टिली नॉरवुड को पसंद है ये बॉलीवुड फिल्म, कृति सेनन के सामने सुनाया फेमस डायलॉग -
‘AI एक्टर्स इंसानी एक्टर्स की जगह नहीं ले सकते’, बोलीं एलाइन वैन डेर वेल्डन -
NDTV World Summit 2026: वेजिटेरियन खिलाड़ियों को कौन सी दिक्कतें होती हैं? Savita, Neeru ने बताया -
नो इंडियंस अलाउड से मेयर तक का सफर, NDTV समिट में रोहतक से लंदन गई मां-बेटे की जोड़ी ने बताई अपनी जर्नी -
NDTV World Summit 2026 के मंच पर भारत की 'गोल्डन गर्ल्स' ने बताया जीत का मंत्रा! | Asian Games 2026 -
NDTV World Summit 2026: Lovlina Borgohain ने बताया जीवन का सबसे बड़ा चैलेंज! क्यों लगने लगे ठहाके? -
NDTV World Summit 2026: हॉकी चैंपियन नेहा गोयल का बड़ा खुलासा! दर्द में भी जीत का जश्न -
Ashwini Vaishnaw के ऑफिस में कुर्सी के पीछे क्यों लगी है कील? NDTV World Summit में खोला राज
यह भी पढ़ें- लोन मोरेटोरियम मामला: केंद्र से बड़ी राहत, 2 करोड़ तक के लोन पर माफ होगा चक्रवृद्धि ब्याज
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देरी आम आदमी के हितों में नहीं है. आम आदमी की दुर्दशा देखें. हम आदेश पारित नहीं कर रहे हैं. आम आदमी की दुर्दशा पर विचार करें. छोटे लोगों के लिए राहत देना एक स्वागत योग्य निर्णय है. लेकिन कुछ ठोस परिणामों की जरूरत है.
मामले में सुनवाई जारी है.वहीं केंद्र ने अदालत को सूचित किया था कि उसने निजी व्यक्तियों सहित 8 क्षेत्रों के लिए 2 करोड़ तक के ऋणों के पुनर्भुगतान पर चक्रवृद्धि ब्याज माफ करने का निर्णय लिया है. केंद्र ने कहा है कि वह विभिन्न क्षेत्रों को अधिक राहत नहीं दे सकता है और अदालतों को राजकोषीय नीति में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए.
RBI ने भी अदालत को यह कहा कि छह महीने से अधिक की अवधि को रोकना संभव नहीं है क्योंकि यह समग्र ऋण अनुशासन को प्रभावित करेगा.
यह भी पढ़ें- लोन मोरेटोरियम मामला : सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को एक हफ्ता और दिया, आखिरी प्लान के साथ आने को कहा
जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस आर सुभाष रेड्डी और जस्टिस एम आर शाह की तीन-जजों की बेंच ने ईएमआई पर राहत पाने के लिए याचिका पर सुनवाई की. सुनवाई के दौरान पी चिदंबरम और एसजी तुषार मेहता के बीच बहस हुई.
चिदंबरम ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट सरकार से एक बयान चाहता है और आश्वासन मांग रहा है. अदालत एक संदेश भेजना चाहती है. सुप्रीम कोर्ट ने कह कि हम बयान नहीं बल्कि एक आदेश चाहते है. इस पर चिदंबरम ने कहा कि चूंकि अदालत आम आदमी को संदेश भेजना चाहता है.
एसजी तुषार मेहता ने कहा कि अदालत कोई संदेश नहीं भेज रही है. सरकार पहले ही आम आदमी को संदेश भेज चुकी है. मैं चिदंबरम के विचारों के खिलाफ हूं कि अदालत संदेश भेजना चाहती है.
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई दो नवंबर तक के लिए टाली. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उम्मीद है कि तब तक सरकार दो करोड़ रुपये तक के लोन के लिए आदेश जारी करेगी. जस्टिस एम आर शाह ने कहा कि आम लोगों की दीवाली सरकार के हाथ में है.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं