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This Article is From Oct 14, 2020

'आम आदमी की दीवाली': सुप्रीम कोर्ट ने 2 नवंबर तक लोन राहत को लागू करने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई दो नवंबर तक के लिए टाली. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उम्मीद है कि तब तक सरकार दो करोड़ रुपये तक के लोन के लिए आदेश जारी करेगी.

'आम आदमी की दीवाली': सुप्रीम कोर्ट ने 2 नवंबर तक लोन राहत को लागू करने को कहा
नई दिल्ली:

Loan Moratorium Case : लोन पर मोहलत से दौरान चक्रवृद्धि ब्याज माफ करने के मामले में बुधवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की, सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि केंद्र सरकार के हाथ में आम आदमी की दीवाली है. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा, "जिन्होंने 2 करोड़ तक का ऋण लिया है इसे लागू करने के लिए औपचारिकताएं कब पूरी की जाएंगी?" इस पर केंद्र ने जवाब दिया, "राहत देने की बाहरी सीमा 15 नवंबर है. सरकार एक बड़ा बोझ उठा रही है, लेकिन हम इस आंकड़े का उल्लेख नहीं कर रहे हैं. सरकार द्वारा दी गई राहत जो भी लागू होगी, यह हो जाएगा."

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आम लोग चिंतित हैं. हम 2 करोड़ तक के ऋण वाले लोगों से चिंतित हैं. केंद्र ने जवाब दिया कि यह 15 नवंबर तक केवल कुछ औपचारिकताओं द्वारा किया जाएगा. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार को एक महीने की जरूरत क्यों है? हम इस निर्णय के लिए सरकार की आवश्यकता के साथ सहमत नहीं हैं. जब आपने निर्णय ले लिया है कि एक महीने की देरी क्यों हो रही है?हमारे विचार में निर्णय को लागू करने के लिए एक महीने की आवश्यकता नहीं है और यह सरकार की ओर से उचित नहीं है."

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देरी आम आदमी के हितों में नहीं है. आम आदमी की दुर्दशा देखें. हम आदेश पारित नहीं कर रहे हैं. आम आदमी की दुर्दशा पर विचार करें. छोटे लोगों के लिए राहत देना एक स्वागत योग्य निर्णय है. लेकिन कुछ ठोस परिणामों की जरूरत है.

मामले में सुनवाई जारी है.वहीं केंद्र ने अदालत को सूचित किया था कि उसने निजी व्यक्तियों सहित 8 क्षेत्रों के लिए 2 करोड़ तक के ऋणों के पुनर्भुगतान पर चक्रवृद्धि ब्याज माफ करने का निर्णय लिया है. केंद्र ने कहा है कि वह  विभिन्न क्षेत्रों को अधिक राहत नहीं दे सकता है और अदालतों को राजकोषीय नीति में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए.

RBI ने भी अदालत को यह कहा कि छह महीने से अधिक की अवधि को रोकना संभव नहीं है क्योंकि यह समग्र ऋण अनुशासन को प्रभावित करेगा.

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जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस आर सुभाष रेड्डी और जस्टिस एम  आर  शाह की तीन-जजों की बेंच ने ईएमआई पर राहत पाने के लिए याचिका पर सुनवाई की. सुनवाई के दौरान पी चिदंबरम और एसजी तुषार मेहता के बीच बहस हुई.
चिदंबरम ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट सरकार से एक बयान चाहता है और आश्वासन मांग रहा है. अदालत एक संदेश भेजना चाहती है. सुप्रीम कोर्ट ने कह कि हम बयान नहीं बल्कि एक आदेश चाहते है. इस पर चिदंबरम ने कहा कि चूंकि अदालत आम आदमी को संदेश भेजना चाहता है.

एसजी तुषार मेहता ने कहा कि अदालत कोई संदेश नहीं भेज रही है. सरकार पहले ही आम आदमी को संदेश भेज चुकी है.  मैं चिदंबरम के विचारों के खिलाफ हूं कि अदालत संदेश भेजना चाहती है.

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई दो नवंबर तक के लिए टाली. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उम्मीद है कि तब तक सरकार दो करोड़ रुपये तक के लोन के लिए आदेश जारी करेगी. जस्टिस एम आर शाह ने कहा कि आम लोगों की दीवाली सरकार के हाथ में है.
 

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