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Ashwini Vaishnaw के ऑफिस में कुर्सी के पीछे क्यों लगी है कील? NDTV World Summit में खोला राज

अश्विनी वैष्णव के ऑफिस में उनकी कुर्सी के पीछे खाली कील लगी है. पहली नजर में यह सामान्य दिखती है, लेकिन इसके पीछे छिपी कहानी भारत के तकनीकी भविष्य से जुड़ी है.

NDTV World Summit 2026 में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव
रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव
  • NDTV World Summit 2026 में अश्विनी वैष्णव ने अपने कार्यालय की दीवार पर लगी खाली कील का अर्थ बताया.
  • वह कील भारत में पहली स्वदेशी सेमीकंडक्टर चिप की तस्वीर के लिए आरक्षित स्थान है, जो भविष्य का प्रतीक है.
  • अश्विनी वैष्णव ने 2028 तक भारत की पहली स्वदेशी सेमीकंडक्टर चिप बनाने का लक्ष्य स्पष्ट किया.

NDTV World Summit 2026 में एक दिलचस्प किस्सा सामने आया. मंच पर कार्यक्रम में बातचीत के दौरान NDTV के CEO और एडिटर-इन-चीफ राहुल कंवल ने केंद्रीय IT और रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव के कार्यालय की दीवार पर लगी एक खाली कील का जिक्र किया. आमतौर पर ऐसी जगहों पर तस्वीरें या स्मृति चिह्न टंगे होते हैं, लेकिन यह कील खाली क्यों है, इसका जवाब काफी खास था.

कील किसी फोटो फ्रेम के लिए नहीं : अश्विनी वैष्णव

अश्विनी वैष्णव ने बताया कि उनके ऑफिस में कुर्सी के पीछे दीवार पर वह कील किसी फोटो फ्रेम के लिए नहीं, बल्कि भारत के तकनीकी भविष्य का प्रतीक है. उन्होंने कहा कि उस स्थान को भारत में निर्मित पहली स्वदेशी सेमीकंडक्टर चिप के लिए सुरक्षित रखा गया है. मंत्री के मुताबिक, जब देश का पहला सेमीकंडक्टर वेफर उत्पादन लाइन से निकलकर तैयार होगा, तब उसकी तस्वीर उसी कील पर लगाई जाएगी.

2028 तक सेमीकंडक्टर चिप बनाने का लक्ष्य

उन्होंने बताया कि यह खाली कील उन्हें हर दिन भारत के सेमीकंडक्टर सपने की याद दिलाती है और इसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है. वैष्णव ने भरोसा जताया कि वर्ष 2028 तक भारत अपनी पहली स्वदेशी सेमीकंडक्टर चिप बनाने में सफल होगा.

भारत कब बनाएगा पहला मोबाइल?

NDTV World Summit में अश्विनी वैष्णव ने कहा कि 23 अक्टूबर 2028 की तारीख नोट कर लीजिए. उस समय भारतीय डिजाइन, भारतीय निर्माण और भारतीय ब्रांड वाला मोबाइल फोन लोगों के हाथों में होगा. वैष्णव ने बताया कि एक स्मार्टफोन में रेडियो कम्युनिकेशन, एंटीना, मेमोरी, कैमरा, डिस्प्ले और पावर मैनेजमेंट जैसी कई जटिल तकनीकें होती हैं, इसलिए इसका डिजाइन और निर्माण चुनौतीपूर्ण है.

इसके साथ ही अश्विनी वैष्णव ने कहा, दुनिया में इस्तेमाल होने वाली कार, फ्रिज और मोबाइल फोन समेत कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में 75 से 90 नैनोमीटर की चिप्स का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है. उन्होंने बताया कि भारत ने सेमीकंडक्टर सेक्टर में तेजी से आगे बढ़ने का फैसला किया और पहली एडवांस चिप डेवलेप करने का लक्ष्य रखा. उनके मुताबिक यह चिप टाटा समूह के सहयोग से डेवलेप की जा रही है.

उन्होंने आगे कहा कि 'हम जापान के साथ कई काम कर चुके हैं. हमारे रणनीतिक संबंध हैं. हाल ही में जापान के मंत्री आए थे तो वह स्पीड से संतुष्ट थे. उनका कहना था कि हमने दुनिया में कहीं भी काम की इतनी गति नहीं देखी. इसके अलावा यहां काम करने वाले कुछ जापानी इंजीनियरों का भी कहना है कि हमने इतना तकनीक का प्रयोग नहीं देखा.'

इसके आगे वह पूरे प्रोजेक्ट की टाइमलाइन के बारे में ही जानकारी देने लगे. अश्विनी वैष्णव ने कहा, 'मैं आपको बता देता हूं कि 2017 में शिलान्यास हुआ. फिर करीब ढाई साल का वक्त डिजाइन तैयार करने में लगा. इसके बाद फिर कोरोना आ गया.'

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