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नो इंडियंस अलाउड से मेयर तक का सफर, NDTV समिट में रोहतक से लंदन गई मां-बेटे की जोड़ी ने बताई अपनी जर्नी

ब्रिटेन में कभी नस्लीय आधार पर भेदभाव झेलना पड़ा या फिर स्थानीय लोगों में चिंता दिखी? इस सवाल के जवाब में तुषार कुमार ने बताया कि कई बार ऐसा होता है कि युनाइटेड किंगडम में प्रवासी लोगों को लेकर स्थानीय जनता में चिंता दिखती है.

  • हरियाणा के रोहतक से ब्रिटेन पहुंचे प्रवीन रानी और तुषार कुमार ने मेयर बनने का गौरव हासिल किया है
  • 23 साल के तुषार कुमार ने मई में मेयर पद की शपथ ली थी, उनकी मां भी मेयर हैं
  • ब्रिटेन में प्रवासियों के प्रति स्थानीय जनता में नौकरी और स्वास्थ्य सेवा को लेकर चिंता भी पाई जाती है
नई दिल्ली:

हरियाणा के रोहतक से निकलकर ब्रिटेन में मेयर बनने तक का सफर तय करने वाले मां-बेटे प्रवीन रानी और तुषार कुमार आज NDTV वर्ल्ड समिट के मंच पर थे. 23 साल के तुषार कुमार ने इसी साल मई में एल्सट्री और बोरेहामवुड टाउन काउंसिल के मेयर के तौर पर शपथ ली थी. इसके कुछ दिन बाद ही उनकी मां हेर्ट्समेर बॉरो काउंसिल की पहली भारतीय मेयर बनी थीं. उनकी यह सफलता भारतीय मूल के उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जो अपने देश से सात समंदर दूर बसे हुए हैं. हालांकि यह सफर आसान नहीं रहा है. NDTV वर्ल्ड समिट में अपनी यात्रा के बारे में दोनों ने बताया और चुनौतियां भी साझा कीं.

क्या उन्हें ब्रिटेन में कभी नस्लीय आधार पर भेदभाव झेलना पड़ा या फिर स्थानीय लोगों में चिंता दिखी? इस सवाल के जवाब में तुषार कुमार ने बताया कि कई बार ऐसा होता है कि युनाइटेड किंगडम में प्रवासी लोगों को लेकर स्थानीय जनता में चिंता दिखती है. उन्हें लगता है कि उनकी नौकरियां सेफ रहें. उनकी हेल्थ सर्विसेज पर बहुत दबाव न पड़े. इसलिए कभी समस्याएं भी आती हैं, लेकिन फिर भी युनाइटेड किंगडम एक अच्छी सभ्यता है. क्या आप वहां पूरे समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं. इस पर तुषार कुमार ने कहा कि हम तो भारत के वसुधैव कुटुम्बकम की भावना को ही अमल में लाते हैं. 

उन्होंने कहा कि मैं भले ही भारतीय मूल का हूं, लेकिन मेरा पद ऐसा है कि मुझे सबके लिए काम करना है. क्या नस्लवाद को लेकर चर्चा होती है? इस पर तुषार कुमार ने कहा कि निश्चित तौर पर ऐसी बातें भी सामने आती हैं. कुछ ऐसे मामलों का भी सामना करना पड़ता है. यदि किसी ने अपनी पूरी जिंदगी ही यूके में बिता दी है और उसके बाद भी कोई आपको कहे कि आपका यहां कुछ नहीं है तो ऐसी बात दिल तोड़ने वाली होती है. तुषार कुमार पहली बार जब खड़े हुए तो चुनाव हार गए थे. इसके बाद दोबारा लड़े तो जीत मिली और वह 23 साल की उम्र में ही मेयर बन गए थे. मैंने गरीबों की मदद की थी और जब जीत मिली तो शायद यही वजह थी, जिससे मुझे सफलता मिली. 

अब आगे अपनी राह क्या देखते हैं? इस पर तुषार कुमार ने कहा कि मैं राजनीति में बहुत दिलचस्पी लेता हूं. मैंने ईमानदारी से काम करने का प्रयास किया है. तुषार कुमार ने कहा कि कभी हम सुनते थे कि नो डॉग, नो इंडियंस अलाउंड. वहां से आज जहां हम हैं, वहां तक का सफर शानदार रहा है. प्रवीन रानी ने कहा कि हमने बहुत कुछ पीछे छोड़ा है. अब ब्रिटेन में भी ऐसे ही होली और दीवाली के त्योहार मनाते हैं.

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