
शिवसेना के विश्वनाथ महादेश्वर मुंबई के नए मेयर चुन लिए गए हैं
मुंबई:
शिवसेना के विश्वनाथ पांडुरंग महादेश्वर बीजेपी के समर्थन से मुंबई के नए मेयर चुने गए. शो ऑफ़ हैंड्स में भाजपा ने शिवसेना के उम्मीदवार का साथ दिया.
इससे पहले मुंबई में बीएमसी चुनाव में शिवसेना को कांटे की टक्कर देने के बाद बीजेपी ने मेयर पद का चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया था. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसकी घोषणा करते हुए कहा था कि बीजेपी अब मुंबई के मेयर का चुनाव नहीं लड़ेगी. साथ ही पार्टी ने डिप्टी मेयर का चुनाव भी नहीं लड़ने का फैसला किया था. उन्होंने कहा कि यह फैसला मुंबई की जनता के हितों को देखते हुए और उनके जनमत को सम्मान देने के लिए लिया गया. बीजेपी मुंबई हित में शिवसेना का साथ देगी.
227-सदस्यीय महानगरपालिका में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला. इस चुनाव में शिवसेना 84 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी. भाजपा को 82 सीटें मिली और वह मामूली अंतर से ही शिवसेना से पिछड़ गई.
उल्लेखनीय है कि भाजपा का यह कदम एक बेहद नपा-तुला राजनीतिक फ़ैसला है. महाराष्ट्र में सरकार बनाने में शिवसेना को भाजपा का समर्थन प्राप्त है. ऐसे में शिवेसना के ख़िलाफ़ मेयर पद के उम्मीदवार को खड़ा करने पर भाजपा को राज्य सरकार में शिवसेना का समर्थन खो देने का डर था. समर्थन का फैसला राज्य में अपनी सरकार बचाये रखने की कोशिश है.
इससे पहले मुंबई में बीएमसी चुनाव में शिवसेना को कांटे की टक्कर देने के बाद बीजेपी ने मेयर पद का चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया था. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसकी घोषणा करते हुए कहा था कि बीजेपी अब मुंबई के मेयर का चुनाव नहीं लड़ेगी. साथ ही पार्टी ने डिप्टी मेयर का चुनाव भी नहीं लड़ने का फैसला किया था. उन्होंने कहा कि यह फैसला मुंबई की जनता के हितों को देखते हुए और उनके जनमत को सम्मान देने के लिए लिया गया. बीजेपी मुंबई हित में शिवसेना का साथ देगी.
227-सदस्यीय महानगरपालिका में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला. इस चुनाव में शिवसेना 84 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी. भाजपा को 82 सीटें मिली और वह मामूली अंतर से ही शिवसेना से पिछड़ गई.
उल्लेखनीय है कि भाजपा का यह कदम एक बेहद नपा-तुला राजनीतिक फ़ैसला है. महाराष्ट्र में सरकार बनाने में शिवसेना को भाजपा का समर्थन प्राप्त है. ऐसे में शिवेसना के ख़िलाफ़ मेयर पद के उम्मीदवार को खड़ा करने पर भाजपा को राज्य सरकार में शिवसेना का समर्थन खो देने का डर था. समर्थन का फैसला राज्य में अपनी सरकार बचाये रखने की कोशिश है.