
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)
नई दिल्ली:
आधार पर सोशल मीडिया हब बनाने के खिलाफ दाखिल याचिका पर अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट को भरोसा दिया कि वो इस संबंध में याचिकाकर्ता महुआ मोइत्रा के सुझाव पर विचार कर योजना में शामिल करने को तैयार हैं. सुप्रीम कोर्ट इस मामले में अगले हफ्ते सुनवाई करेगा.
आधार पर सोशल मीडिया हब बनाने के खिलाफ याचिका पर जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है. पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने AG से सहायता मांगी थी. याचिका में आरोप है कि आधार प्राधिकरण सोशल मीडिया की निगरानी करना चाहता है. UIDAI द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफार्मों जैसे ट्विटर, फेसबुक, यूट्यूब, गूगल प्लस आदि पर आधार से संबंधित गतिविधियों की निगरानी के लिए एक निजी एजेंसी की सेवाएं लेने के कथित प्रस्ताव के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने AG के के वेणुगोपाल की सहायता मांगी है.
बंगाल की तृणमूल कांग्रेस विधायक महुआ मोइत्रा ने दाखिल की है याचिका. याचिका में अदालत से आग्रह किया है कि वह 18 जुलाई को जारी किए गए प्रस्ताव को रद्द करें क्योंकि ये अनुच्छेद 14 (समानता), 19 (1) (ए) (भाषण की स्वतंत्रता) और संविधान के 21 (जीवन, स्वतंत्रता और निजता) का उल्लंघन है
याचिकाकर्ता की ओर से पेश अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि मामला गंभीर है क्योंकि इस मुद्दे में निजता का मौलिक अधिकार शामिल है जिसका भारत का विशिष्ट पहचान विकास प्राधिकरण (यूआईडीएआई) द्वारा उल्लंघन किया जा रहा है. हालांकि बेंच ने केंद्र और यूआईडीएआई को औपचारिक नोटिस नहीं किया और इस मामले में एजी की सहायता मांगी थी.
आधार पर सोशल मीडिया हब बनाने के खिलाफ याचिका पर जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है. पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने AG से सहायता मांगी थी. याचिका में आरोप है कि आधार प्राधिकरण सोशल मीडिया की निगरानी करना चाहता है. UIDAI द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफार्मों जैसे ट्विटर, फेसबुक, यूट्यूब, गूगल प्लस आदि पर आधार से संबंधित गतिविधियों की निगरानी के लिए एक निजी एजेंसी की सेवाएं लेने के कथित प्रस्ताव के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने AG के के वेणुगोपाल की सहायता मांगी है.
बंगाल की तृणमूल कांग्रेस विधायक महुआ मोइत्रा ने दाखिल की है याचिका. याचिका में अदालत से आग्रह किया है कि वह 18 जुलाई को जारी किए गए प्रस्ताव को रद्द करें क्योंकि ये अनुच्छेद 14 (समानता), 19 (1) (ए) (भाषण की स्वतंत्रता) और संविधान के 21 (जीवन, स्वतंत्रता और निजता) का उल्लंघन है
याचिकाकर्ता की ओर से पेश अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि मामला गंभीर है क्योंकि इस मुद्दे में निजता का मौलिक अधिकार शामिल है जिसका भारत का विशिष्ट पहचान विकास प्राधिकरण (यूआईडीएआई) द्वारा उल्लंघन किया जा रहा है. हालांकि बेंच ने केंद्र और यूआईडीएआई को औपचारिक नोटिस नहीं किया और इस मामले में एजी की सहायता मांगी थी.
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