
फाइल फोटो
जम्मू:
कई मीडिया हाउस ने कथित रूप से गलती से जम्मू के एक स्थानीय नागरिक अब्दुल माजिद की तस्वीर लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के उन छह मृत आतंकवादियों की तस्वीरों के साथ दिखाई जो शनिवार उत्तर कश्मीर के बांदीपुरा जिला में मुठभेड़ में मारे गये थे.
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अब्दुल माजिद ने बताया, ‘‘जब मैंने इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया में मृत आतंकवादियों की तस्वीरों के साथ अपनी देखी तो मैं हैरान रह गया. किसी ने मेरे फेसबुक अकाउंट से मेरी तस्वीर डाउनलोड कर ली और मृत आतंकवादियों में से एक के तौर पर मेरी तस्वीर वितरित कर दी.’’ माजिद ने इसे साजिश बताते हुए जांच की मांग की है.
माजिद यहां के खटी का तालाब में व्यंजन की दुकान चलाते हैं. वह विवाहित है और उनके दो बच्चे भी हैं तथा वह इस्लाम धर्म का प्रचार प्रसार करने वाले धार्मिक समूह से भी जुडे़ हैं. उन्होंने कहा इस संबंध में मैंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है. उन्होंने कहा, ‘‘मैं कोई आतंकवादी नहीं हूं. वे मेरी तस्वीर कैसे इस्तेमाल कर सकते हैं? यह मीडिया और राज्य प्रशासन की लापरवाही है.’’ माजिद की तस्वीर कई अखबारों ने पहले पन्ने पर प्रमुखता से छापी थी और उनका उपनाम ‘अबु जारगम’ बताया था.
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उन्होंने कहा, ‘‘यह खबर मेरे परिवार के लिये बहुत बड़ा झटका था. वे सभी बहुत निराश थे.’’ उन्होंने कहा, ‘‘मुझे नहीं मालूम यह किसकी साजिश है. लेकिन जिसने भी यह किया है उससे मेरी छवि तार-तार हुई है. यह मीडिया और प्रशासन की लापरवाही है. आखिर उन्होंने कैसे बगैर सबूत किसी बेकसूर की तस्वीर प्रकाशित की.’’
(इनपुट भाषा से)
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अब्दुल माजिद ने बताया, ‘‘जब मैंने इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया में मृत आतंकवादियों की तस्वीरों के साथ अपनी देखी तो मैं हैरान रह गया. किसी ने मेरे फेसबुक अकाउंट से मेरी तस्वीर डाउनलोड कर ली और मृत आतंकवादियों में से एक के तौर पर मेरी तस्वीर वितरित कर दी.’’ माजिद ने इसे साजिश बताते हुए जांच की मांग की है.
माजिद यहां के खटी का तालाब में व्यंजन की दुकान चलाते हैं. वह विवाहित है और उनके दो बच्चे भी हैं तथा वह इस्लाम धर्म का प्रचार प्रसार करने वाले धार्मिक समूह से भी जुडे़ हैं. उन्होंने कहा इस संबंध में मैंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है. उन्होंने कहा, ‘‘मैं कोई आतंकवादी नहीं हूं. वे मेरी तस्वीर कैसे इस्तेमाल कर सकते हैं? यह मीडिया और राज्य प्रशासन की लापरवाही है.’’ माजिद की तस्वीर कई अखबारों ने पहले पन्ने पर प्रमुखता से छापी थी और उनका उपनाम ‘अबु जारगम’ बताया था.
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उन्होंने कहा, ‘‘यह खबर मेरे परिवार के लिये बहुत बड़ा झटका था. वे सभी बहुत निराश थे.’’ उन्होंने कहा, ‘‘मुझे नहीं मालूम यह किसकी साजिश है. लेकिन जिसने भी यह किया है उससे मेरी छवि तार-तार हुई है. यह मीडिया और प्रशासन की लापरवाही है. आखिर उन्होंने कैसे बगैर सबूत किसी बेकसूर की तस्वीर प्रकाशित की.’’
(इनपुट भाषा से)
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