केंद्र सरकार की SC से गुहार- इटली मरीन मामले में सुनवाई बंद की जाए, बताई यह वजह..

यह मामला वर्ष 2012 का है जब इटालियन नाविक सैलवाटोर गिरोन और मैसीमिलानो लैटोरे पर केरल के पास समुद्र में दो भारतीय मछुआरों को गोली मारने का आरोप लगा था.

केंद्र सरकार की SC से गुहार- इटली मरीन मामले में सुनवाई बंद की जाए, बताई यह वजह..

2012 में दो इटालियन नाविकों पर केरल के पास समुद्र में दो भारतीय मछुआरों को गोली मारने का आरोप लगा था

खास बातें

  • कहा, हमने इंटरनेशनल ट्रिब्‍यूनल का फैसले मान लिया है
  • ये अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता नियमों के मुताबिक बाध्यकारी है
  • सुप्रीम कोर्ट इस मामले में अगले हफ्ते करेगा सुनवाई
नई दिल्ली:

इटली मरीन मामले (Italian marines case) में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) से सुनवाई बंद करने की मांग की है, SC इस बारे में अगले हफ्ते सुनवाई करेगा. सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने कहा कि इस मामले में आदेश का पालन हो चुका है. मामला भारत और इटली के बीच बचा है, लिहाजा लंबित याचिका का निपटारा कर दिया जाए. इस पर CJI एसए बोबडे ने कहा कि अगले हफ्ते सुनवाई करेंगे. मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र ने कहा कि अदालत के आदेश के मुताबिक पीड़ित परिवारों को मुआवजा दिया जा चुका है. यह मामला केरल में इटली के मरीन द्वारा दो मछुआरों की हत्या का है. इससे पहले केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर मामले की सुनवाई को बंद करने का अनुरोध किया था.

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केंद्र सरकार (Central Government) ने अदालत से कहा है कि भारत ने UN Convention on the Law of the Sea (UNCLOS) के फैसले को मानने का फैसला किया है क्योंकि इसके बाद कोई अपील नहीं हो सकती और ये अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता नियमों के मुताबिक बाध्यकारी है लिहाजा अदालत इस मामले में लंबित सुनवाई को बंद कर दे. सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में सरकार को UNCLOS के फैसले को रिकॉर्ड पर रखने को कहा था. केंद्र सरकार ने उसके फैसले को दाखिल करते हुए कहा कि अदालत को केस का निपटारा कर देना चाहिए.

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इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने ही दोनों मेरीन को शर्तों के आधार पर इटली जाने की इजाजत दी थी. दरअसल UN Convention on the Law of the Sea (UNCLOS) के ट्रायब्यूनल ने कहा है कि UNCLOS के नियमों के तहत भारतीय अधिकारियों की कार्यवाई सही थी. इटालियन सैन्य अधिकारियों यानी इटली  UNCLOS Article 87(1)(a) और 90 के मुताबिक, भारत के नेविगेशन के अधिकार को रोक रहा था. दोनों भारत और इटली को इस घटना पर कार्यवाई का अधिकार था और कानूनी अधिकार भी कि इटालियन नाविकों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करें. ट्रायब्यूनल ने इटली के दोनों नाविकों के हिरासत में रखने के लिए भारत से मुआवज़े की मांग को खारिज कर दिया लेकिन ये माना कि इन नाविकों को देश के लिए काम करने के कारण भारतीय अदालतों की कार्रवाई से 'इम्युनिटी' थी, लेकिन भारत को जान-माल के नुकसान के लिए हर्जाना बनता है. ट्रायब्यूनल ने कहा कि भारत और इटली आपस में विचार कर हर्जाने की रकम तय कर सकते हैं.

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वर्ष 2012 का है मामला: यह मामला वर्ष 2012 का है जब इटालियन नाविक सैलवाटोर गिरोन और मैसीमिलानो लैटोरे पर केरल के पास समुद्र में दो भारतीय मछुआरों को गोली मारने का आरोप लगा था. इस मामले में सबसे बड़ा सवाल अधिकार क्षेत्र का था. इटली का कहना था कि ये घटना भारत की समुद्री सीमा के बाहर घटी लेकिन भारत ने इस पर सवाल उठाए. भारत ने ये भी कहा कि क्योंकि मारे गए मछुआरे भारतीय थे तो मामले को भारतीय कानूनों के तहत निबटा जाना चाहिए.