
एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार (Sharad Pawar) ने कृषि कानूनों पर फिर सवाल उठाए हैं. पवार ने शनिवार को कहा कि ये कानून एमएसपी (MSP) पर उल्टा असर डालेंगे और मंडी व्यवस्था (Mandi System) को कमजोर करेंगे. पवार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ सर्वदलीय बैठक में डिजिटल माध्यम से शामिल हुए.
बैठक में संसद के बजट सत्र के लिए प्रस्तावित एजेंडे से जुड़े विषयों, किसान आंदोलन (Farmers Protest) , महिला आरक्षण विधेयक और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई. पवार ने कहा कि एमएसपी को कहीं अधिक मजबूत करने की जरूरत है.पवार ने ट्वीट किया कि सुधार लगातार चलने वाली प्रक्रिया है. एपीएमसी या मंडी प्रणाली में सुधारों के खिलाफ कोई भी व्यक्ति दलील नहीं देगा, लेकिन इस बहस का यह मतलब नहीं है कि इस प्रणाली को कमजोर या नष्ट किया जाए.
पूर्व कृषि मंत्री ने ट्वीट किया, ‘‘उनके कार्यकाल के दौरान, विशेष बाजार स्थापित करने के लिए मसौदा एपीएमसी नियमावली 2007 तैयार की गई थी, ताकि किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए वैकल्पिक मंच उपलब्ध कराया जा सके और मौजूदा मंडी प्रणली को मजबूत करने के लिए भी अत्यधिक सावधानी बरती गई. शरद पवार, 2004 से 2014 तक केंद्रीय कृषि मंत्री रहे थे. वह संशोधित आवश्यक वस्तु अधिनियम को लेकर भी चिंतित हैं.
अधिनियम के मुताबिक, यदि बागवानी उत्पाद की दरों में 100 प्रतिशत की वृद्धि हो जाती है और न सड़ने- गलने वाली वस्तुओं की कीमतें 50 प्रतिशत तक बढ़ जाती है, तो इस सूरत में ही सरकार मूल्य नियंत्रित करने के लिए हस्तक्षेप करेगी. भंडारण करने की सीमा अनाज, दाल, प्याज, आलू तिलहन पर हटा दी गई है. इससे यह आशंका पैदा हो सकती है कि कॉरपोरेट घराने वस्तुओं को कम कीमत पर खरीद सकते हैं और उसका भंडारण कर सकते हैं जिसके बाद वे उसे उपभोक्ताओं को अधिक कीमत पर बेचेंगे.
(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं