प्रतीकात्मक चित्र
नई दिल्ली:
डीजल टैक्सी बैन मामले में केंद्र भी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। गुरुवार को सॉलीसिटर जनरल (SG) रंजीत कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि सुप्रीम कोर्ट के डीजल टैक्सी बैन से बीपीओ पर असर हो रहा है और वो देश छोड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र भी इस मामले में अर्जी दाखिल करेगा। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बीपीओ इसके लिए बसें क्यों नहीं ले लेते।
SG ने कहा कि बीपीओ के लिए ये संभव नहीं क्योंकि ये ज्यादातर रात के पिकअप एंड ड्राप के लिए होते हैं और कर्मचारियों की सुरक्षा भी अहम मुद्दा है। इस मामले में अमिक्स क्यूरी अपराजिता ने कोर्ट में कहा कि EPCA की ओर से रोडमैप बनाया जा रहा है। ये भी देखा जा रहा है कि टैक्सियों को फेज आउट करने के लिए क्या पांच साल का वक्त दिया जा सकता है?
कोर्ट ने कहा कि रोडमैप लेकर आएं और सोमवार को सुनवाई करेंगे।
इधर मेरू, मेगा जैसी कंपनियां भी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई हैं। उनकी ओर से कहा गया कि हम पहले से ही सिटी टैक्सी के तौर पर पंजीकृत हैं जबकि ओला उबर ऑल इंडिया परमिट वाली कैब इस्तेमाल कर रही हैं। वो हाईकोर्ट में अंडरटेकिंग दे चुकी हैं कि ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट की गाड़ियां नहीं चलाएंगी, लेकिन वो चला रही हैं जिसकी वजह से उनके कारोबार को नुकसान हो रहा है।
SG ने कहा कि बीपीओ के लिए ये संभव नहीं क्योंकि ये ज्यादातर रात के पिकअप एंड ड्राप के लिए होते हैं और कर्मचारियों की सुरक्षा भी अहम मुद्दा है। इस मामले में अमिक्स क्यूरी अपराजिता ने कोर्ट में कहा कि EPCA की ओर से रोडमैप बनाया जा रहा है। ये भी देखा जा रहा है कि टैक्सियों को फेज आउट करने के लिए क्या पांच साल का वक्त दिया जा सकता है?
कोर्ट ने कहा कि रोडमैप लेकर आएं और सोमवार को सुनवाई करेंगे।
इधर मेरू, मेगा जैसी कंपनियां भी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई हैं। उनकी ओर से कहा गया कि हम पहले से ही सिटी टैक्सी के तौर पर पंजीकृत हैं जबकि ओला उबर ऑल इंडिया परमिट वाली कैब इस्तेमाल कर रही हैं। वो हाईकोर्ट में अंडरटेकिंग दे चुकी हैं कि ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट की गाड़ियां नहीं चलाएंगी, लेकिन वो चला रही हैं जिसकी वजह से उनके कारोबार को नुकसान हो रहा है।
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Ashish Kumar Bhargava
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