नरोदा पाटिया दंगों के दोषी बाबू बजरंगी की फाइल फोटो
अहमदाबाद:
गुजरात दंगों के समय हुए भीषण नरसंहरों में एक के दोषी और दक्षिणपंथी संगठन बजरंग दल के पूर्व बाबू बजरंगी तीन महीने बाद जेल लौट आए हैं।
साल 2012 में गुजरात की पूर्व मंत्री माया कोडनानी और बाबू बजरंगी सहित 30 दूसरे लोगों को नरोदा पाटिया नरसंहार का दोषी पाया गया था। इस नरसंहार को गुजरात दंगों के सबसे खूनी अध्याय के तौर पर जाना जाता है, जहां अल्पसंख्यक समुदाय के 97 लोग एक दिन मारे गए थे।
बाबू बजरंगी जिसका असल नाम बाबूभाई पटेल को इस अपराध का दोषी पाते हुए अदालत ने उम्र कैद की सजा सुनाई थी। कोर्ट ने अहमदाबाद में साबरमती जेल में बंद बाबू बजरंगी को आंखों के इलाज के लिए तीन महीने की अस्थायी ज़मानत दी थी। हालांकि उनके डॉक्टरों ने कहा कि वह बड़ी तेज़ी से आंखों की रोशनी खो रहे हैं, जिसके बाद गुजरात हाईकोर्ट ने उनकी जमानत बढ़ा दी थी। बजरंगी की लंबी जमानत अवधि को लेकर हुई आलोचना और विवादों पर टिप्पणी करते हुए उनके वकील अनिल पटेल ने कहा कि जेल लौटने के सभी निर्देषों का पालन किया गया है।
इस पहले बाबू बजरंगी को एक रिश्तेदार की शादी में शिरकत से लेकर बीमार पिता की तीमारदारी की वजह बताकर चार अलग-अलग मौकों पर जेल से बाहर जाने की इजाजत मिल चुकी है।
नरोदा पाटिया दंगों के पीड़ितों में से एक शमसाद पठान इस पर कहते हैं, 'उनके लिए, जेल से बाहर या अंदर रहना कोई बड़ी बात नहीं, लेकिन दंगा पीड़ितों के लिए है... ये दोषी जेल से बाहर आने पर पीड़ितों के लिए एक खतरा बन सकते हैं।'
साल 2012 में गुजरात की पूर्व मंत्री माया कोडनानी और बाबू बजरंगी सहित 30 दूसरे लोगों को नरोदा पाटिया नरसंहार का दोषी पाया गया था। इस नरसंहार को गुजरात दंगों के सबसे खूनी अध्याय के तौर पर जाना जाता है, जहां अल्पसंख्यक समुदाय के 97 लोग एक दिन मारे गए थे।
बाबू बजरंगी जिसका असल नाम बाबूभाई पटेल को इस अपराध का दोषी पाते हुए अदालत ने उम्र कैद की सजा सुनाई थी। कोर्ट ने अहमदाबाद में साबरमती जेल में बंद बाबू बजरंगी को आंखों के इलाज के लिए तीन महीने की अस्थायी ज़मानत दी थी। हालांकि उनके डॉक्टरों ने कहा कि वह बड़ी तेज़ी से आंखों की रोशनी खो रहे हैं, जिसके बाद गुजरात हाईकोर्ट ने उनकी जमानत बढ़ा दी थी। बजरंगी की लंबी जमानत अवधि को लेकर हुई आलोचना और विवादों पर टिप्पणी करते हुए उनके वकील अनिल पटेल ने कहा कि जेल लौटने के सभी निर्देषों का पालन किया गया है।
इस पहले बाबू बजरंगी को एक रिश्तेदार की शादी में शिरकत से लेकर बीमार पिता की तीमारदारी की वजह बताकर चार अलग-अलग मौकों पर जेल से बाहर जाने की इजाजत मिल चुकी है।
नरोदा पाटिया दंगों के पीड़ितों में से एक शमसाद पठान इस पर कहते हैं, 'उनके लिए, जेल से बाहर या अंदर रहना कोई बड़ी बात नहीं, लेकिन दंगा पीड़ितों के लिए है... ये दोषी जेल से बाहर आने पर पीड़ितों के लिए एक खतरा बन सकते हैं।'
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