अगर आप नियमित रूप से एक्सरसाइज करते हैं, संतुलित भोजन लेते हैं और आपका वजन भी सामान्य है, तो संभव है कि आपको लगे आपका दिल पूरी तरह सुरक्षित है. लेकिन आज के दौर में एक ऐसा खतरा है, जिस पर अधिकतर युवा ध्यान नहीं देते और वह है वायु प्रदूषण. आमतौर पर प्रदूषण को फेफड़ों की बीमारी से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन अब रिसर्च बता रहे हैं कि दूषित हवा हार्ट की सेहत को भी गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है.
दिल्ली स्थित सीके बिड़ला हॉस्पिटल के डायरेक्टर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अंशुल कुमार जैन का कहना है कि यंग और फिजिकल रूप से फिट होना इस बात की गारंटी नहीं है कि प्रदूषण का असर शरीर पर नहीं पड़ेगा. लगातार प्रदूषित हवा में सांस लेना समय के साथ हार्ट और ब्लड वेसेल्स को नुकसान पहुंचा सकता है. यहां विस्तार से जानते हैं इस विषय को-
कैसे हार्ट को नुकसान पहुंचाता है वायु प्रदूषण?
डॉ. जैन कहते हैं कि वायु प्रदूषण में मौजूद PM2.5 जैसे सूक्ष्म कण सबसे ज्यादा खतरनाक माने जाते हैं. ये इतने छोटे होते हैं कि सांस के जरिए फेफड़ों के अंदर गहराई तक पहुंच जाते हैं. वहां पहुंचकर ये सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को बढ़ाते हैं, जिसका असर ब्लड वेसेल्स और हार्ट पर पड़ सकता है.
डॉक्टर कहते हैं कि इसके कारण ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है, धमनियों में चर्बी जमने का प्रोसेस तेज हो सकती है और ब्लड वेसेल्स की सामान्य कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है. लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहने से हार्ट अटैक, स्ट्रोक और अनियमित हार्ट रिदम जैसी समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है.
युवाओं को क्यों रहना चाहिए सतर्क?
हार्ट डिजीज आमतौर पर अचानक नहीं होते, बल्कि कई रिस्क कारकों के धीरे-धीरे जुड़ने का परिणाम होते हैं. एक युवा व्यक्ति का कोलेस्ट्रॉल सामान्य हो सकता है, वह नियमित व्यायाम भी करता हो, लेकिन अगर वह रोजाना ट्रैफिक के बीच सफर करता है, व्यस्त सड़कों के किनारे रहता है या प्रदूषित वातावरण में ज्यादा समय बिताता है, तो शरीर लगातार हानिकारक कणों के संपर्क में रहता है.
डॉ. अंशुल जैन कहते हैं कि कई अध्ययनों में ये भी पाया गया है कि वायु प्रदूषण के संपर्क में आने वाले हेल्दी टीनएजर और युवाओं में भी अनियमित हृदय धड़कन की संभावना बढ़ सकती है. इसका मतलब ये नहीं कि हर युवा को हार्ट डिजीज होगा, लेकिन ये जरूर दर्शाता है कि सिर्फ कम उम्र होना पर्याप्त सुरक्षा नहीं है.
क्या प्रदूषण में एक्सरसाइज करना भी बन सकता है रिस्क?
फिजिकल एक्टिविटी हार्ट को हेल्दी रखने के लिए बेहद जरूरी है और इसे छोड़ना नहीं चाहिए. हालांकि, जब वायु गुणवत्ता बहुत खराब हो, तब बाहर तेज दौड़ना, साइकिल चलाना या हाई-इंटेंसिटी वर्कआउट करना रिस्क बढ़ा सकता है. इसकी वजह ये है कि एक्सरसाइज के दौरान सांस लेने की गति बढ़ जाती है और अधिक मात्रा में प्रदूषित हवा शरीर के भीतर पहुंचती है.
डॉक्टर कहते हैं कि बाहर एक्सरसाइज करने से पहले स्थानीय एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) जरूर जांचें. अगर प्रदूषण का स्तर बहुत ज्यादा है, तो उस दिन इंडोर वर्कआउट करना बेहतर विकल्प हो सकता है. साथ ही कम ट्रैफिक वाले रास्तों का चयन और पीक ट्रैफिक घंटों से बचना भी फायदेमंद हो सकता है.
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