World Thyroid Day 2026: महिलाओं की प्रजनन क्षमता यानी फर्टिलिटी सिर्फ उम्र पर निर्भर नहीं करती, बल्कि शरीर के हार्मोनल और मेटाबॉलिक बैलेंस से भी गहराई से जुड़ी होती है. थायरॉयड, इंसुलिन रेजिस्टेंस और PCOS जैसी समस्याएं न सिर्फ पीरियड्स को प्रभावित करती हैं, बल्कि गर्भधारण में दिक्कत, मिसकैरेज और प्रेग्नेंसी के दौरान कॉम्प्लीकेशन्स का खतरा भी बढ़ा सकती हैं. कई महिलाएं थकान, वजन बढ़ना, बाल झड़ना या इर्रेगुलर पीरियड्स जैसी समस्याओं को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देती हैं. लेकिन, एक्सपर्ट्स का कहना है कि शरीर अक्सर फर्टिलिटी प्रभावित होने से पहले ही संकेत देना शुरू कर देता है. अगर इन शुरुआती लक्षणों को समय रहते पहचान लिया जाए, तो गंभीर समस्याओं से बचाव संभव है और महिलाओं की रिप्रोडक्टिव हेल्थ बेहतर बनी रह सकती है.
थायरॉइड कैसे बिगाड़ता है पीरियड्स और फर्टिलिटी?
थायरॉइड हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म को कंट्रोल करते हैं, लेकिन इसका असर सिर्फ वजन तक सीमित नहीं रहता. यह पीरियड्स, ओव्यूलेशन और प्रेग्नेंसी को भी प्रभावित करता है. जब थायरॉयड ठीक से काम नहीं करता, तो पीरियड्स इर्रेगुलर होने लगते हैं और गर्भधारण की संभावना कम हो सकती है.
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डॉ. रजनी बंसल कहती हैं, "जब थायरॉइड डिसफंक्शन का इलाज लंबे समय तक नहीं किया जाता, तो इससे पीरियड्स इर्रेगुलर हो सकते हैं, फर्टिलिटी कम हो सकती है और मिसकैरेज का खतरा बढ़ सकता है."

छोटे-छोटे लक्षण भी हो सकते हैं बड़ी चेतावनी
अक्सर महिलाएं थकान, मूड स्विंग, बाल झड़ना या त्वचा में बदलाव जैसी समस्याओं को तनाव या बिजी लाइफस्टाइल का असर मान लेती हैं. लेकिन, एक्सपर्ट्स के मुताबिक ये हार्मोनल इंबैलेंस के संकेत हो सकते हैं.
डॉ. रजनी बंसल बताती हैं, "अगर थकान, वजन बढ़ना, बाल झड़ना, इर्रेगुलर पीरियड्स या मूड में बदलाव बार-बार दिखाई दें और लंबे समय तक बने रहें, तो इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ये शरीर के हार्मोनल बदलावों का संकेत हो सकते हैं."
इर्रेगुलर पीरियड्स को नॉर्मल समझना पड़ सकता है भारी
कई महिलाओं को लगता है कि कभी-कभार पीरियड्स लेट होना सामान्य बात है. हालांकि तनाव या यात्रा के कारण ऐसा हो सकता है, लेकिन अगर लगातार पीरियड्स मिस हों या साइकल इर्रेगुलर रहे, तो यह ओव्यूलेशन से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है.
एक्सपर्ट्स के अनुसार पॉलीएंडोक्राइन मेटाबॉलिक ओवेरियन सिंड्रोम (PMOS) महिलाओं में पीरियड्स गड़बड़ होने की एक आम वजह है. यह समस्या हार्मोनल बैलेंस को प्रभावित करती है और धीरे-धीरे फर्टिलिटी पर असर डाल सकती है.
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वजन बढ़ना और हार्मोनल बदलाव का कनेक्शन
अचानक वजन बढ़ना, खासकर पेट के आसपास फैट जमा होना, सिर्फ खराब डाइट का नतीजा नहीं होता. कई बार यह हार्मोनल और मेटाबॉलिक गड़बड़ी की ओर इशारा करता है.
इंसुलिन रेजिस्टेंस, जो PMOS से जुड़ा होता है, ओव्यूलेशन को प्रभावित कर सकता है. वहीं जरूरत से ज्यादा वजन बढ़ने से शरीर में सूजन और एस्ट्रोजन लेवल में बदलाव हो सकता है, जिससे प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है.
दूसरी तरफ बहुत तेजी से वजन कम होना या अत्यधिक दुबलापन भी ओव्यूलेशन को रोक सकता है और पीरियड्स को प्रभावित कर सकता है.
बाल झड़ना, मुंहासे और मूड स्विंग भी हैं संकेत
अगर लगातार बाल पतले हो रहे हैं, त्वचा सूखी रहने लगी है, चेहरे पर मुंहासे बढ़ रहे हैं या चेहरे और शरीर पर अनचाहे बाल आने लगे हैं, तो इसे सिर्फ ब्यूटी प्रॉब्लम समझने की गलती न करें.
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डॉक्टर्स का कहना है कि एंड्रोजन हार्मोन का बढ़ना ऐसी समस्याओं की वजह हो सकता है. यह PMOS और अन्य हार्मोनल डिसऑर्डर से जुड़ा हो सकता है, जो ओव्यूलेशन और फर्टिलिटी को प्रभावित करते हैं.

महिलाएं इलाज में देरी क्यों करती हैं?
समाज में आज भी कई महिलाएं अपनी स्वास्थ्य समस्याओं को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देती हैं. थकान को काम का बोझ, वजन बढ़ने को गलत खानपान और अनियमित पीरियड्स को आम समस्या मान लिया जाता है.
कई महिलाएं तब तक डॉक्टर के पास नहीं जातीं, जब तक गर्भधारण में परेशानी शुरू न हो जाए. तब तक हार्मोनल इंबैलेंस कई सालों से शरीर को प्रभावित कर चुका होता है.
समय पर जांच और हेल्दी लाइफस्टाइल है जरूरी
एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि अगर पीरियड्स, वजन, मूड, स्किन या एनर्जी में लगातार बदलाव महसूस हो रहे हों, तो समय रहते जांच जरूर करानी चाहिए. हार्मोनल टेस्ट, मेटाबॉलिक स्क्रीनिंग और रिप्रोडक्टिव हेल्थ चेकअप से शुरुआती स्तर पर समस्या का पता लगाया जा सकता है.
साथ ही रेगुलर एक्सरसाइज, अच्छी नींद, बैलेंस डाइट और तनाव कम करना हार्मोनल बैलेंस बनाए रखने में मदद करता है.
(डॉ. रजनी बंसल, फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट, नोवा IVF फर्टिलिटी, लुधियाना)
(अस्वीकरण: इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी विचार हैं. एनडीटीवी इस लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सटीकता, पूर्णता, उपयुक्तता या वैधता के लिए जिम्मेदार नहीं है. लेख में दी गई जानकारी, तथ्य या विचार एनडीटीवी के विचारों को नहीं दर्शाते हैं और एनडीटीवी इनके लिए कोई जिम्मेदारी या दायित्व नहीं लेता है.)
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