सांस लेना जिंदगी की सबसे बुनियादी जरूरत है. जब तक सांसें सही चल रही हैं, सब ठीक लगता है. लेकिन आज के दौर में जिस तरह हवा में प्रदूषण बढ़ रहा है और हमारी जीवनशैली बिगड़ रही है, फेफड़ों की सेहत पर भारी खतरा मंडरा रहा है. वर्ल्ड लंग डे के मौके पर देश के जाने-माने लिवर और हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. एसके सरीन ने फेफड़ों को परखने का एक बहुत ही सीधा और मजेदार तरीका बताया है. इसके लिए आपको किसी महंगे अस्पताल में जाकर लंबी लाइनों में खड़े होने की जरूरत नहीं है. आप बस एक साधारण गुब्बारे की मदद से घर पर ही जान सकते हैं कि आपके फेफड़े कितने मजबूत हैं.
फेफड़ों की सेहत पर ध्यान देना क्यों जरूरी है
अक्सर लोग दिल और पेट की बीमारियों को लेकर तो फिक्रमंद रहते हैं, मगर फेफड़ों को तब तक नजरअंदाज करते हैं जब तक कि सांस फूलने की नौबत न आ जाए. सिगरेट का धुआं, धूल-मिट्टी और गाड़ियों से निकलने वाला जहरीला धुआं धीरे-धीरे हमारे फेफड़ों की कार्यक्षमता को खोखला कर देता है. कई बार जब बीमारी पकड़ में आती है, तब तक काफी देर हो चुकी होती है. इसलिए वक्त रहते अपने फेफड़ों का ख्याल रखना और उनकी कपैसिटी जांचना बेहद जरूरी है.
गुब्बारा टेस्ट क्या है और इसे कैसे करें
डॉ. एसके सरीन बताते हैं कि यह टेस्ट फेफड़ों की हवा सोखने और बाहर फेंकने की क्षमता को मापने का एक आसान घरेलू तरीका है. इसे कोई भी व्यक्ति अपने घर पर बैठकर आजमा सकता है.
- सबसे पहले एक सामान्य आकार का नया गुब्बारा लें.
- एक कुर्सी पर रीढ़ की हड्डी सीधी करके आराम से बैठ जाएं.
- अपनी नाक से एक गहरी सांस अंदर खींचें, ताकि सीने में पूरी हवा भर जाए.
- अब गुब्बारे को मुंह से लगाएं और पूरी ताकत से एक ही सांस में हवा को गुब्बारे के अंदर फूंक दें.
- ध्यान रहे कि आपको बीच में रुककर दोबारा सांस नहीं लेनी है, बस एक ही बार में अपनी पूरी हवा बाहर निकालनी है.
नतीजों को कैसे समझें
- जब आप गुब्बारे में हवा भर दें, तो उसका साइज देखकर आप अपनी सांस की ताकत का अंदाजा लगा सकते हैं:
- अगर गुब्बारा पहली ही कोशिश में सामान्य आकार या उससे बड़ा फूल जाता है, तो इसका मतलब है कि आपके फेफड़ों की क्षमता बहुत अच्छी है और वे पूरी मजबूती से काम कर रहे हैं.
- अगर पूरी ताकत लगाने के बाद भी गुब्बारा बहुत छोटा रहता है या उसमें हवा भरने में आपको भारी परेशानी होती है, तो यह संकेत है कि आपके फेफड़ों की हवा रोकने की ताकत कम हो रही है.
- यदि फूंक मारते ही आपको तेज खांसी आ जाए, सीने में दर्द उठे या चक्कर जैसा लगे, तो आपको सतर्क हो जाना चाहिए.
डॉक्टर की खास हिदायत
डॉ. सरीन का कहना है कि यह टेस्ट कोई अंतिम मेडिकल रिपोर्ट नहीं है, बल्कि यह एक शुरुआती चेतावनी जैसा है. अगर आप गुब्बारे को ठीक से नहीं फुला पा रहे हैं, तो इसका सीधा मतलब है कि आपको अपनी दिनचर्या बदलने की जरूरत है. यदि सांस लेने में लगातार तकलीफ हो रही हो, तो बिना देर किए किसी पल्मोनोलॉजिस्ट यानी फेफड़ों के माहिर डॉक्टर को दिखाना चाहिए.
फेफड़ों को लोहे जैसा मजबूत बनाने के उपाय
अपने फेफड़ों को लंबे समय तक सेहतमंद रखने के लिए डॉ. सरीन कुछ बुनियादी बदलाव करने की सलाह देते हैं:
- गहरी सांस लेने वाले प्राणायाम जैसे अनुलोम-विलोम और कपालभाति को अपनी रोज की आदत बनाएं.
- बीड़ी, सिगरेट या हुक्के के धुएं से कोसों दूर रहें और एक्टिव स्मोकिंग के साथ-साथ पैसिव स्मोकिंग से भी बचें.
- सुबह के वक्त जब प्रदूषण कम हो, तब हल्की सैर या जॉगिंग करें ताकि फेफड़ों को ताजी आक्सीजन मिले.
- घर के अंदर हवा को साफ रखने के लिए पौधे लगाएं और खाना बनाते समय धुएं की सही निकासी का ध्यान रखें.
- भरपूर पानी पिएं और डाइट में हरी सब्जियां, ताजे फल व एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर चीजें शामिल करें.
वर्ल्ड लंग डे हमें याद दिलाता है कि हर सांस की एक कीमत है. आज ही एक छोटा सा गुब्बारा उठाइए और अपने पूरे परिवार के साथ यह टेस्ट करके देखिए कि आपकी सांसों में कितना दम है. सही वक्त पर की गई छोटी सी सावधानी आपको आने वाले समय में बड़ी सांस की बीमारियों से सुरक्षित रख सकती है.
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