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World Asthma Day: घर के अंदर छिपे ये ट्रिगर्स बढ़ा सकते हैं Asthma Attack

World Asthma Day 2026: अक्सर लोग अस्थमा के बढ़ते लक्षणों के लिए बाहर के कारणों को जिम्मेदार मानते हैं, जैसे प्रदूषण, परागकण या मौसम में बदलाव. लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अस्थमा को बढ़ाने वाले कई कारण घर के अंदर भी मौजूद हो सकते हैं, जो बिना दिखे धीरे-धीरे समस्या बढ़ाते रहते हैं, भले ही आप खुद को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहे हों.

World Asthma Day: घर के अंदर छिपे ये ट्रिगर्स बढ़ा सकते हैं Asthma Attack
World Asthma Day 2026: घर के अंदर भी छिपे हैं अस्थमा को ट्रिगर करने के कारण. ( Image Created.AI)
वाशिंगटन:

World Asthma Day 2026: हर साल मई के पहले मंगलवार को वर्ल्ड अस्थमा डे मनाया जाता है. यह एक वैश्विक स्वास्थ्य जागरूकता दिवस है, जिसका उद्देश्य अस्थमा के बारे में लोगों को जागरूक करना है. अस्थमा एक लंबे समय तक रहने वाली सांस संबंधी बीमारी है, जो दुनियाभर में लाखों लोगों को प्रभावित करती है. इस दिन की शुरुआत साल 1998 में ग्लोबल इनिशिएटिव फॉर अस्थमा (GINA) ने की थी. इसका मकसद लोगों को अस्थमा के लक्षण, इसके ट्रिगर्स और इससे बचाव व सही देखभाल के तरीकों के बारे में जानकारी देना है.

अक्सर लोग अस्थमा के बढ़ते लक्षणों के लिए बाहर के कारणों को जिम्मेदार मानते हैं, जैसे प्रदूषण, परागकण या मौसम में बदलाव. लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अस्थमा को बढ़ाने वाले कई कारण घर के अंदर भी मौजूद हो सकते हैं, जो बिना दिखे धीरे-धीरे समस्या बढ़ाते रहते हैं, भले ही आप खुद को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहे हों.

घर के अंदर मौजूद अस्थमा ट्रिगर्स

हाउस डस्ट माइट्स 

सबसे आम लेकिन अक्सर नजरअंदाज किए जाने वाले ट्रिगर्स में हाउस डस्ट माइट्स शामिल हैं. ये बेहद छोटे जीव होते हैं, जो सोफा, कारपेट और बिस्तरों में पनपते हैं. इनके मल के छोटे कण सांस की नलियों में जलन पैदा कर सकते हैं, खासकर रात के समय. इससे खांसी, सीटी जैसी आवाज के साथ सांस आना और सांस फूलने जैसी समस्याएं हो सकती हैं.

मोल्ड

घर के अंदर लगने वाली फफूंदी यानी मोल्ड भी अस्थमा का एक बड़ा कारण है. यह नमी वाली जगहों जैसे बाथरूम और कम हवा आने वाली रसोई में तेजी से बढ़ती है. कई बार मोल्ड दिखाई नहीं देता, लेकिन इसके छोटे कण सांस की नलियों में जलन पैदा कर सकते हैं और अस्थमा अटैक का कारण बन सकते हैं.

क्लीनिंग प्रोडक्ट्स और एयर फ्रेशनर

क्लीनिंग प्रोडक्ट्स और एयर फ्रेशनर को भी अक्सर हल्के में लिया जाता है. इनमें मौजूद तेज केमिकल और खुशबू सांस की नलियों में जलन पैदा कर सकते हैं. जो जगह आपको साफ और फ्रेश लगती है, वही घर के अंदर सांस की परेशानी बढ़ा सकती है.

एयर कंडीशनर

आज की आधुनिक जीवनशैली में कुछ नए खतरे भी सामने आए हैं. लंबे समय तक एयर कंडीशनर का इस्तेमाल करने और उसके फिल्टर की नियमित सफाई न करने से बैक्टीरिया, धूल और एलर्जन हवा में फैल सकते हैं. इसके अलावा अगरबत्ती, मोमबत्ती या खाना पकाने के दौरान निकलने वाला धुआं भी परेशानी बढ़ा सकता है, खासकर उन घरों में जहां हवा आने-जाने की सही व्यवस्था नहीं होती.

अन्य कारण

तकिए, सॉफ्ट टॉयज और पर्दों जैसे मुलायम फर्नीचर में समय के साथ एलर्जन जमा हो सकते हैं. वहीं पालतू जानवर भावनात्मक सुकून जरूर देते हैं, लेकिन उनके शरीर से निकलने वाले छोटे कण हवा और सतहों पर जमा होकर घर की हवा को प्रभावित कर सकते हैं.

विशेषज्ञों का कहना है कि घर के अंदर खराब वेंटिलेशन यानी हवा का सही तरीके से न आना-जाना भी एक बड़ी समस्या है. बंद जगहों में ताजी हवा की कमी के कारण प्रदूषक और एलर्जन जमा होते रहते हैं. इससे साफ दिखने वाले घरों में भी अस्थमा के लक्षण बढ़ सकते हैं.

इसके अलावा घर में पेस्ट कंट्रोल करवाने के बाद और अगरबत्ती के इस्तेमाल के दौरान भी अस्थमा के लक्षण बढ़ने के मामले सामने आए हैं. कुछ मरीजों में हेयर डाई इस्तेमाल करने के बाद जानलेवा रिएक्शन तक देखे गए हैं. इसलिए एलर्जी या अस्थमा से पीड़ित लोगों को अपने ट्रिगर्स को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और सतर्क रहना चाहिए.

अस्थमा को मैनेज करने के टिप्स

अस्थमा को सही तरीके से कंट्रोल करने के लिए इन छिपे हुए ट्रिगर्स की पहचान करना जरूरी है. सिर्फ दवाओं पर निर्भर रहना काफी नहीं होता. कुछ आसान कदम मदद कर सकते हैं:

  • एयर फिल्टर की नियमित सफाई करें
  • घर में नमी न बनने दें
  • बिस्तर की चादरों को गर्म पानी से धोएं
  • घर में हवा आने-जाने की सही व्यवस्था रखें

इसके अलावा अपने लक्षणों पर ध्यान देना भी जरूरी है. अगर घर में रहने पर या किसी खास काम के दौरान लक्षण बढ़ते हैं, तो यह किसी इनडोर ट्रिगर का संकेत हो सकता है, जिसे पहचानना जरूरी है.

वर्ल्ड अस्थमा डे का मुख्य संदेश साफ है, अस्थमा को कंट्रोल करने के लिए बाहर के प्रदूषण से बचना जरूरी है, लेकिन घर के अंदर का माहौल सुरक्षित बनाना भी उतना ही जरूरी है.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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