सर्दियों का मौसम कई लोगों को पसंद होता है, लेकिन ये मौसम कुछ लोगों के लिए मेंटल हेल्थ से जुड़ी चुनौतियां भी लेकर आता है. ठंड बढ़ने के साथ कई लोग उदासी, थकान, सुस्ती और मूड में बदलाव महसूस करने लगते हैं. अक्सर इसे सामान्य मौसमी बदलाव समझकर इग्नोर कर दिया जाता है, लेकिन इसके पीछे शरीर और दिमाग में होने वाले वैज्ञानिक परिवर्तन जिम्मेदार होते हैं. इस विषय पर फोर्टिस हॉस्पिटल के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. विनीत बंगा से बातचीत की. उन्होंने बताया कि ठंड के मौसम में उदास महसूस करने के ब्रेन में हार्मोनल बदलाव होते हैं. दरअसल, सर्दियों में सूरज की रोशनी कम मिलने से ब्रेव के कई हार्मोन प्रभावित होते हैं, जिसका असर सीधे हमारे मूड पर पड़ता है. यहां इस विषय को अच्छे से समझते हैं-
धूप की कमी बिगाड़ देती है मूड
डॉक्टर कहते हैं कि सर्दियों में दिन छोटे और रातें लंबी हो जाती हैं. ऐसे में लोगों को पर्याप्त धूप नहीं मिल पाती. सूरज की रोशनी हमारे ब्रेन में बनने वाले सेरोटोनिन नामक केमिकल्स को प्रभावित करती है. इसे फील गुड केमिकल भी कहा जाता है. जब धूप कम मिलती है, तो सेरोटोनिन का लेवल घटने लगता है, जिससे व्यक्ति उदास, चिड़चिड़ा और निराश महसूस कर सकता है.
क्यों बढ़ जाती है सुस्ती और नींद?
डॉ. बंगा का कहना है कि सर्दियों में शरीर मेलाटोनिन हार्मोन का ज्यादा प्रोडक्शन करता है. ये हार्मोन नींद को कंट्रोल करने का काम करता है. लंबे समय तक अंधेरा रहने की वजह से मेलाटोनिन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे व्यक्ति को दिनभर नींद आने लगती है और एनर्जी की कमी महसूस होती है. यही वजह है कि ठंड के दिनों में बिस्तर छोड़ना मुश्किल लगने लगता है.
क्या है सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर?
डॉक्टर बताते हैं कि कुछ लोगों में ये समस्या सामान्य उदासी तक सीमित नहीं रहती. ये सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर (SAD) का रूप ले सकती है. ये एक प्रकार का सीजनल डिप्रेशर है, जो मुख्य रूप से सर्दियों में देखने को मिलता है. इसके लक्षणों में लगातार उदास रहना, किसी काम में मन न लगना, भूख में बदलाव, ज्यादा नींद आना और सोशल एक्टिविटी से दूरी बनाना शामिल हैं.
सर्दियों में मेंटल हेल्थ का कैसे रखें ख्याल?
डॉ. विनीत का कहना है कि अगर आप सर्दियों में अपने मेंटल हेल्थ को सही रखना चाहते हैं, तो रोजाना कम से कम 20-30 मिनट धूप में जरूर बैठें. नियमित रूप से एक्सरसाइज करें, संतुलित आहार लें और पर्याप्त नींद लें. दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताने से भी मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रहता है. अगर उदासी या डिप्रेशन के लक्षण लंबे समय तक बने रहें तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है.
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