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रात में मोबाइल देखने से पेट की चर्बी क्यों बढ़ने लगती है? जान लीजिए क्या कहती है स्टडी

Nighttime Phone Use Impact: क्या रात को मोबाइल फोन देखने से पेट की चर्बी (Belly fat) बढ़ने लगती है? अगर आप भी रात को बिस्तर पर लेटकर मोबाइल स्क्रॉल करते हैं, तो यह लेख आपके लिए है.

रात में मोबाइल देखने से पेट की चर्बी क्यों बढ़ने लगती है? जान लीजिए क्या कहती है स्टडी
रात में मोबाइल देखना और पेट की चर्बी बढ़ने का सीधा संबंध नहीं है.

Belly Fat Causes: आजकल ज्यादातर लोग पेट की चर्बी बढ़ने से परेशान हैं. फिजिकली फिट हर कोई दिखना चाहता है, लेकिन आजकल के खानपान और लाइफस्टाइल रूटीन ने न सिर्फ मोटापा और शरीर की चर्बी को बढ़ाया बल्कि कई बीमारियों का रिस्क भी बढ़ गया है. मोटापा कैसे कम करें? पेट की चर्बी कैसे घटाएं? ये बहुत बड़े सवाल हैं, जिनका जवाब हर कोई जानना चाहता है. हालांकि इससे भी पहले ये जानना जरूरी है कि पेट की चर्बी बढ़ने के पीछे सबसे बड़ा कारण क्या है? 

क्या रात को मोबाइल फोन देखने से पेट की चर्बी (Belly fat) बढ़ने लगती है? अगर आप भी रात को बिस्तर पर लेटकर मोबाइल स्क्रॉल करते हैं, तो यह लेख आपके लिए है. सही जानकारी न होने पर हम अक्सर बिना वजह चिंतित हो जाते हैं या गलत धारणा बना लेते हैं. लेकिन, विज्ञान क्या कहता है? चलिए इसे आसान शब्दों में समझते हैं.

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि पेट की चर्बी न सिर्फ देखने, बल्कि सेहत के लिए बहुत खतरनाक है. खासकर वही चर्बी जो पेट के अंदर जमा होती है. इसे विसरल फैट कहा जाता है और यह स्वास्थ्य के लिए ज्यादा खतरनाक होती है. यह डायबिटीज, हार्ट डिजीज और मेटाबोलिक समस्याओं का खतरा बढ़ाती है.

हम रात को मोबाइल क्यों देखते हैं?

इसके पीछे कई कारण हैं सोशल मीडिया, वीडियो, गेमिंग या बस आदत. लेकिन, फोन स्क्रीन की रोशनी में एक खास तरह की नीली (blue) लाइट होती है, जो हमारे शरीर के सर्कैडियन रिदम यानी बायोलॉजिकल क्लॉक को प्रभावित करती है.

हमारा शरीर दिन-रात के चक्र में काम करता है. रात को यह मेलाटोनिन नाम का हार्मोन बनाता है, जो नींद लाने में मदद करता है. जब हम मोबाइल की स्क्रीन देखते हैं, तो नीली लाइट मेलाटोनिन के प्रोडक्शन को रोक देती है और हमें नींद आने में देर होती है.

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नींद का बिगड़ना और वजन बढ़ना

अब बात आती है वजन और पेट की चर्बी से. बहुत सारी वैज्ञानिक रिसर्च बताती हैं कि नींद की कमी सीधे शरीर में हार्मोनल बदलाव लाती है:

  • घ्रेलिन नाम का हार्मोन बढ़ जाता है, जो भूख को बढ़ाता है.
  • लेप्टिन नाम का हार्मोन घट जाता है, जो भूख को कंट्रोल करता है.
  • कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) बढ़ सकता है, जिससे फैट जमा होने का खतरा बढ़ता है.

इन सभी बदलावों के कारण हम रात को जंक फ़ूड या कैलोरी-भरी चीजें ज्यादा खाने लगते हैं और सुबह थकान की वजह से कम एक्टिव रहते हैं. दोनों चीजें मिलकर पेट की चर्बी बढ़ाती हैं.

वैज्ञानिक रिसर्च क्या कहती है?

एक अध्ययन ने बताया कि जिन लोगों ने रात में स्क्रीन का इस्तेमाल किया, उनका ओवरवेट होने का जोखिम बढ़ा हुआ पाया गया. उदाहरण के लिए एक शोध में यह पाया गया कि बार-बार रात में स्मार्टफोन उपयोग करने वालों में ओवरवेट होने की संभावना 51% ज्यादा थी बनिस्बत उन लोगों के जिन्होंने रात को फोन नहीं देखा. यह शोध PMC (PubMed Central) पर प्रकाशित है:

इस शोध के अनुसार, रात में स्क्रीन टाइम केवल नींद को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि दिनभर के कैलोरी उपयोग, भूख और मोटापे से जुड़ी आदतों को भी प्रभावित करता है.

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फोन देखने की आदत कैसे चर्बी बढ़ाती है?

  • नींद में देरी: फोन स्क्रीन की वजह से नींद देर से आती है, इससे बॉडी का हार्मोन संतुलन बिगड़ता है.
  • भूख बढ़ना: देर रात खाने की इच्छा बढ़ती है या स्नैकिंग का मन करता है.
  • एक्टिविटी कम होना: रात को देर तक फोन पर रहने से अगली सुबह सुस्ती रहती है और फिजिकल एक्टिविटी कम होती है.   
  • मानसिक तनाव: सामाजिक मीडिया की वजह से तनाव भी बढ़ सकता है, जिससे कोर्टिसोल का स्तर बढ़ता है और फैट जमा होता है.

क्या इससे बचा जा सकता है?

हां, यह बिल्कुल संभव है. लेकिन, कुछ सरल उपाय उपनाने होंगे.

  • सोने से कम से कम 1-2 घंटे पहले फोन का उपयोग बंद करें.
  • फोन स्क्रीन की ब्लू लाइट को कम करने के लिए नाइट मोड या फ़िल्टर का उपयोग करें.
  • एक निश्चित समय पर सोने की आदत बनाएं.
  • रात में भारी खाने से बचें और हल्का, सेहतमंद खाना खाएं.

कुल मिलाकर, रात में मोबाइल देखने से पेट की चर्बी बढ़ना कोई सीधा कारण नहीं है, लेकिन यह आपकी नींद, भूख और लाइफस्टाइल को प्रभावित करता है और पेट की चर्बी बढ़ने में योगदान दे सकता है.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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