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PCOD से परेशान हैं? रोज करें चक्की चालनासन, वजन होगा कंट्रोल और हार्मोन रहेंगे बैलेंस

एमडीएनआईवाई के विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित अभ्यास से यह आसन न केवल शारीरिक स्वास्थ्य सुधारता है, बल्कि मानसिक शांति भी प्रदान करता है. इसके नियमित अभ्यास से यह पेट, कमर, पीठ और पेल्विक क्षेत्र को मजबूत बनाता है और कई स्वास्थ्य समस्याओं से राहत दिलाता है.

PCOD से परेशान हैं? रोज करें चक्की चालनासन, वजन होगा कंट्रोल और हार्मोन रहेंगे बैलेंस
चक्की चालनासन शरीर के कई हिस्सों को लाभ पहुंचाता है.

आज की अनियमित दिनचर्या शरीर को रोगी बनाती जा रही है. ऐसे में योगासन से तन मन को सेहतमंद रखा जा सकता है. एक्सपर्ट ऐसे ही एक बेहद कारगर आसन के रोजाना अभ्यास की सलाह देते हैं, जिसका नाम चक्की चालनासन है. मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा (एमडीएनआईवाई) के अनुसार, चक्की चालनासन मिल चर्निंग पोज या चक्की चलाने की मुद्रा एक सरल लेकिन बेहद प्रभावी योग आसन है. यह आसन पारंपरिक चक्की (जिससे अनाज पीसा जाता है) चलाने की क्रिया की नकल करता है और शरीर के कई हिस्सों को लाभ पहुंचाता है.

एमडीएनआईवाई के विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित अभ्यास से यह आसन न केवल शारीरिक स्वास्थ्य सुधारता है, बल्कि मानसिक शांति भी प्रदान करता है. इसके नियमित अभ्यास से यह पेट, कमर, पीठ और पेल्विक क्षेत्र को मजबूत बनाता है और कई स्वास्थ्य समस्याओं से राहत दिलाता है.

चक्की चालनासन 

चक्की चालनासन के लिए सबसे पहले जमीन पर सीधे पैर फैलाकर दंडासन की मुद्रा में बैठें. दोनों पैरों को थोड़ा खोलें और पैरों के बीच जगह बनाएं. इसके बाद दोनों हाथों को आगे की ओर फैलाएं, उंगलियां इंटरलॉक करें. पीठ सीधी रखते हुए ऊपरी शरीर को गोल-गोल घुमाएं, जैसे चक्की चल रही हो- दाएं से बाएं और फिर बाएं से दाएं. इस दौरान सांस सामान्य रखें, 10-20 चक्कर एक दिशा में, फिर विपरीत दिशा में घुमाएं. शुरुआत में 1-2 मिनट से शुरू करें, धीरे-धीरे बढ़ाएं.

चक्की चालनासन के फायदे

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चर्बी कम करता है

चक्की चालनासन के अभ्यास से कई फायदे मिलते हैं. यह पेट की चर्बी कम करता है और मांसपेशियों को टोन करता है, पेट की अतिरिक्त चर्बी को घटाने में मददगार है और आंतों को गैस, कब्ज और अपच से राहत दिलाता है. पीठ और कमर को मजबूती देता है, जिससे साइटिका से बचाव होता है.

गर्भाशय के लिए लाभदायी

महिलाओं के लिए यह विशेष लाभकारी है. यह गर्भाशय की मांसपेशियों को मजबूत करता है, जिससे पीरियड्स नियमित होते हैं, दर्द कम होता है, पीसीओडी/पीसीओएस की समस्या दूर करने में सहायक, प्रसव के बाद अतिरिक्त वजन घटाने में भी उपयोगी है. साथ ही पूरे शरीर में ब्लड फ्लो बढ़ता है, तनाव कम होता है और कोर मसल्स मजबूत होते हैं.

हालांकि, कुछ सावधानियां बरतनी भी जरूरी हैं. यदि गर्भावस्था में हैं तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें. गंभीर पीठ दर्द, स्लिप डिस्क, स्पाइनल समस्या या हाल की सर्जरी हो तो न करें. आसन करते समय यदि पैरों या पीठ में तेज दर्द हो तो इग्नोर करें. शुरुआत में धीरे-धीरे करें, ज्यादा जोर न लगाएं.

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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