हार्टबीट को सामान्य बनाए रखने के लिए पेसमेकर लगवाने वाले मरीजों के मन में अक्सर एक सवाल रहता है कि क्या अब वे पहले जैसी जिंदगी जी पाएंगे? लोगों में मन में उठे इन्हीं सवालों का जवाब जानने के लिए हमने नारायणा हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट के डायरेक्टर डॉ. देवेंद्र कुमार श्रीमल से जानकारी ली. डॉ. देवेंद्र ने कहा कि पेसमेकर लगाने के बाद लोगों के मन में इस तरह के सवाल उठना काफी नॉर्मल है.अच्छी बात ये है कि ज्यादातर लोग पेसमेकर लगने के बाद नॉर्मल और एक्टिव जीवन जी सकते हैं. हालांकि, शुरुआती कुछ सप्ताह में कुछ जरूरी सावधानियां बरतना बेहद जरूरी होता है, ताकि घाव जल्दी भरे, पेसमेकर सुरक्षित रहे और उसकी कार्यक्षमता पर कोई असर न पड़े.
घाव की देखभाल सबसे जरूरी
डॉ. कहते हैं कि पेसमेकर लगाने के बाद जिस जगह डिवाइस लगाया गया है, वहां के घाव को साफ और सूखा रखना चाहिए. अगर घाव के आसपास लालिमा, सूजन, ज्यादा दर्द, खून या किसी तरह का रिसाव दिखाई दे, तो इसे नजरअंदाज न करें. बुखार के साथ ऐसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें, क्योंकि ये इंफेक्शन का संकेत हो सकता है.
शुरुआती हफ्तों में हाथ और कंधे का रखें ध्यान
डॉक्टर आमतौर पर सलाह देते हैं कि पहले 2 से 4 सप्ताह तक भारी सामान न उठाएं और ज्यादा जोर लगाने वाले कामों से बचें. जिस तरफ पेसमेकर लगाया गया है, उस हाथ को कंधे से ऊपर बार-बार उठाने या ज्यादा खींचने से बचना चाहिए. हालांकि, हाथ को बिल्कुल स्थिर रखना भी सही नहीं है. डॉक्टर का कहना है कि हल्की एक्टिविटी करते रहने से कंधे में जकड़न नहीं होती.
कब शुरू कर सकते हैं एक्सरसाइज?
शुरुआती दिनों में भारी एक्सरसाइज और ऐसी गतिविधियों से बचना चाहिए, जिनमें कंधों पर ज्यादा दबाव पड़ता हो. रिकवरी पूरी होने के बाद अधिकतर लोग धीरे-धीरे वॉकिंग, हल्की एक्सरसाइज और अपनी सामान्य दिनचर्या में लौट सकते हैं. हालांकि, कॉन्टैक्ट स्पोर्ट्स या ऐसे खेल जिनमें पेसमेकर वाली जगह पर चोट लगने का खतरा हो, डॉक्टर की सलाह के बाद ही करने चाहिए.
मोबाइल फोन इस्तेमाल करते समय रखें ये बात याद
आज के आधुनिक पेसमेकर सामान्य घरेलू उपकरणों और मोबाइल फोन से आमतौर पर प्रभावित नहीं होते. फिर भी मोबाइल फोन को पेसमेकर के ठीक ऊपर वाली शर्ट की जेब में रखने से बचना चाहिए. कॉल करते समय संभव हो, तो पेसमेकर से विपरीत कान का इस्तेमाल करें. वहीं, तेज चुंबकीय क्षेत्र वाले उपकरणों और कुछ औद्योगिक मशीनों से दूरी बनाए रखना बेहतर होता है.
MRI या सर्जरी से पहले डॉक्टर को जरूर बताएं
अगर आपको MRI, सर्जरी या किसी अन्य मेडिकल प्रोसेस से गुजरना है, तो डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ को पहले से बताएं कि आपके शरीर में पेसमेकर लगा हुआ है. कुछ आधुनिक पेसमेकर MRI-compatibile होते हैं, लेकिन इसकी पुष्टि डॉक्टर और डिवाइस मॉडल के आधार पर ही की जानी चाहिए.
नियमित जांच क्यों है जरूरी?
कार्डियोलॉजिस्ट का कहना है कि पेसमेकर लगने के बाद नियमित फॉलोअप बेहद जरूरी होता है. इन जांचों के दौरान डॉक्टर डिवाइस की कार्यक्षमता, बैटरी और लीड्स की स्थिति की जांच करते हैं. मरीज को अपना पेसमेकर ID कार्ड हमेशा साथ रखना चाहिए और किसी भी स्वास्थ्यकर्मी को इसकी जानकारी जरूर देनी चाहिए.
इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
अगर कहते हैं कि पेसमेकर लगने के बाद सांस फूलना, सीने में दर्द, बार-बार चक्कर आना, बेहोशी, पैरों में सूजन या लगातार हिचकी जैसी समस्या होने लगे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. ये संकेत किसी जटिलता की ओर इशारा कर सकते हैं.
अंत में डॉक्टर कहते हैं कि हर मरीज की स्थिति अलग होती है. पेसमेकर का प्रकार, लगाने की तकनीक और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार सावधानियां बदल सकती हैं. इसलिए डिस्चार्ज के दौरान कार्डियोलॉजिस्ट द्वारा दी गई सलाह का पालन करना सबसे महत्वपूर्ण है.
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