दुनिया में चल रहा अमेरिका-इजराइल-ईरान युद्ध अब सिर्फ एक राजनीतिक या सैन्य संकट नहीं रह गया है, बल्कि यह एक बड़ा वैश्विक स्वास्थ्य संकट बनता जा रहा है. इस संघर्ष ने दवाओं की सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे कैंसर की दवाएं, इंसुलिन और जरूरी मेडिकल सहायता तक पहुंच खतरे में पड़ गई है. डब्ल्यूएचओ (WHO) ने भी चेतावनी दी है कि दवाओं की डिलीवरी में देरी, लागत में बढ़ोतरी और सप्लाई में रुकावटें तेजी से बढ़ रही हैं. खासकर एशिया, अफ्रीका और मिडिल ईस्ट के कमजोर देशों पर इसका असर ज्यादा दिख रहा है. अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो आने वाले समय में यह संकट और गहरा सकता है.
रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस युद्ध ने खाड़ी क्षेत्र में कैंसर, इंसुलिन जैसी जरूरी दवाइयों की सप्लाई को प्रभावित कर दिया है. WHO ने इस बात को कन्फर्म किया है कि उसकी इमरजेंसी मेडिसिन चैन सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई हैं.
कैसे प्रभावित हो रही है दवाओं की सप्लाई?
इस युद्ध ने हवाई, समुद्री और जमीनी ट्रांसपोर्ट सिस्टम को प्रभावित किया है, जो दवाओं की सप्लाई के लिए बेहद जरूरी हैं.
- मिडिल ईस्ट में कई देशों के एयरस्पेस बंद होने से फ्लाइट्स को लंबा रास्ता लेना पड़ रहा है.
- होरमुज जलसंधि में तनाव के कारण शिपिंग में देरी.
- ट्रांसपोर्ट और इंश्योरेंस की लागत बढ़ने से दवाएं महंगी हो रही हैं.
- दुबई जैसे बड़े लॉजिस्टिक्स हब से सप्लाई प्रभावित.
WHO की चेतावनी, बढ़ती लागत और देरी:
डब्ल्यूएचओ के अनुसार कुछ रूट्स पर सप्लाई लागत 30% तक बढ़ गई है. जरूरी दवाएं लंबी दूरी के रास्तों से भेजी जा रही हैं. बॉर्डर पर देरी और फ्यूल की कमी से सप्लाई धीमी हो गई है. कई जगह दवाओं का बैकलॉग बन रहा है.

कौन-कौन सी दवाएं सबसे ज्यादा प्रभावित?
- कैंसर की दवाएं: समय पर न मिलने से इलाज प्रभावित
- इंसुलिन: डायबिटीज मरीजों के लिए जरूरी
- वैक्सीन और इमरजेंसी किट: आपदा और युद्ध क्षेत्रों में जरूरी
इन दवाओं को खास तापमान और समय पर डिलीवरी की जरूरत होती है, इसलिए थोड़ी सी देरी भी गंभीर असर डाल सकती है.
किन देशों पर सबसे ज्यादा असर? | Which Countries Are Most Affected?
1. मिडिल ईस्ट (गाजा, लेबनान, खाड़ी देश): सीधे युद्ध का असर, इंपोर्ट पर निर्भरता ज्यादा.
2. दक्षिण एशिया (भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान): कच्चे माल और ऊर्जा पर निर्भरता, सप्लाई रूट बदलने से लागत बढ़ी.
3. अफ्रीका (सूडान, इथियोपिया, साउथ सूडान): मानवीय सहायता पर निर्भर, दवाओं की भारी कमी का खतरा.
4. दक्षिण-पूर्व एशिया (फिलीपींस आदि): फ्यूल संकट और लॉजिस्टिक्स महंगे.
5. विकसित देश (ऑस्ट्रेलिया आदि): सप्लाई को नए रास्तों से भेजा जा रहा है.
दवा सप्लाई चेन इतनी कमजोर क्यों? | Why Is the Medicine Supply Chain so Fragile?
ग्लोबल फार्मा सिस्टम पूरी तरह इंटरकनेक्टेड है:
- दवाओं के कच्चे पदार्थ अलग-अलग देशों से आते हैं.
- निर्माण, पैकेजिंग और वितरण अलग-अलग जगह होता है.
- जस्ट-इन-टाइम सिस्टम में स्टॉक कम रखा जाता है.
इसलिए किसी एक क्षेत्र में संकट पूरे सिस्टम को प्रभावित कर देता है.
क्या आने वाला है दवाओं का बड़ा संकट?
अभी बड़े लेवल पर कमी नहीं दिख रही, क्योंकि कई देशों के पास स्टॉक मौजूद है. लेकिन खतरे के संकेत साफ हैं:
- लंबा युद्ध स्टॉक खत्म कर सकता है.
- बढ़ती लागत दवाओं को महंगा बना सकती है.
- सप्लाई रूट बदलना लंबे समय तक संभव नहीं.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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