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रात में नाइट बल्ब जलाकर सोने की आदत? जानिए दिमाग और दिल की सेहत पर इसका क्या असर पड़ता है

क्या नाइट बल्ब जलाकर सोना सही है? जानिए रोशनी में सोने के नुकसान, मेलाटोनिन पर असर, गहरी नींद के महत्व और न्यूरोसर्जन की सलाह.

रात में नाइट बल्ब जलाकर सोने की आदत? जानिए दिमाग और दिल की सेहत पर इसका क्या असर पड़ता है
सोते समय जलता रहता है नाइट बल्ब? दिमाग और दिल पर पड़ सकता है असर
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बहुत से लोग रात को नाइट बल्ब या हल्की रोशनी में सोते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह आदत आपकी नींद और स्वास्थ्य पर असर डाल सकती है? एक्सपर्ट्स के मुताबिक, नाइट बल्ब जलाकर सोने के नुकसान सिर्फ नींद तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह शरीर की जैविक घड़ी (Body Clock) को भी प्रभावित कर सकते हैं.

नाइट बल्ब जलाकर सोने के नुकसान

आखिर क्यों जरूरी है पूरा अंधेरा

जब रात होती है तो हमारा शरीर कुदरती तौर पर सोने के लिए तैयार होता है. हमारे दिमाग की पीनियल ग्रंथि से मेलाटोनिन नाम का एक हार्मोन निकलता है. इसे स्लीप हार्मोन भी कहते हैं. जब कमरे में पूरा अंधेरा होता है तब यह हार्मोन सही मात्रा में बनता है और हमें गहरी नींद आती है.

लेकिन अगर कमरे में नाइट बल्ब, टीवी या मोबाइल की हल्की सी भी लाइट जल रही हो तो दिमाग को लगता है कि अभी दिन ही चल रहा है. नतीजतन मेलाटोनिन का स्तर गिर जाता है और नींद की क्वालिटी खराब हो जाती है.

डॉ. अजय चौधरी कहते हैं, "हमारे दिमाग को यह समझने के लिए अंधेरा चाहिए कि सोने का समय हो चुका है. लगातार रोशनी इस प्रक्रिया में व्यवधान डाल सकती है."

एक्सपर्ट की राय: न्यूरोसर्जन क्या कहते हैं

दिल्ली के डॉ राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल के जाने-माने न्यूरोसर्जन डॉ अजय चौधरी का कहना है कि - "सोते समय कमरे में किसी भी तरह की रोशनी, चाहे वह हल्की ही क्यों न हो, हमारे नर्वस सिस्टम को लगातार एक्टिव रखती है. जब दिमाग को डीप स्लीप या गहरी नींद नहीं मिलती तो न्यूरोलॉजिकल रिकवरी नहीं हो पाती.

डॉ. अजय चौधरी कहते हैं, "गहरी नींद के दौरान मस्तिष्क दिनभर की सूचनाओं को व्यवस्थित करता है. यदि नींद बार-बार बाधित हो रही है तो अगले दिन ध्यान और एकाग्रता प्रभावित हो सकती है."

इसका सीधा असर हमारे ब्रेन फंक्शन्स, याददाश्त और अगले दिन के मूड पर पड़ता है. लगातार ऐसा होने से क्रोनिक स्ट्रेस और अनिद्रा की समस्या जन्म ले सकती है."

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हल्की रोशनी में सोने के बड़े नुकसान

  1. गहरी नींद में रुकावट: अगर नाइट बल्ब जल रहा है तो भले ही आपको लगे कि आप सो रहे हैं, लेकिन आपका दिमाग पूरी तरह शांत नहीं हो पाता. आपकी नींद बार-बार टूटती है और सुबह उठकर भी थकान महसूस होती है.
  2. दिल की बीमारियों का खतरा: रिसर्च बताती है कि रात को रोशनी में सोने से हार्ट रेट बढ़ जाता है और नसों में तनाव रहता है. इससे ब्लड प्रेशर अनबैलेंस हो सकता है जो आगे चलकर दिल की बीमारियों की वजह बन सकता है. कुछ शोधों में रात के समय कृत्रिम रोशनी और हृदय स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों के बीच संबंध देखा गया है. 
  3. वजन और मोटापे की समस्या: कम नींद या अधूरी नींद मेटाबॉलिज्म को धीमा कर देती है. इससे भूख बढ़ाने वाले हार्मोन्स ज्यादा बनने लगते हैं और इंसान बिना सोचे-समझे ज्यादा खाने लगता है जिससे वजन बढ़ने लगता है.अपर्याप्त नींद मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है, जिसे कुछ अध्ययनों में इंसुलिन संवेदनशीलता से जोड़ा गया है
  4. आंखों पर लगातार दबाव: हल्की रोशनी में पलकों के अंदर की नसें पूरी तरह रिलैक्स नहीं हो पातीं. सुबह उठने पर आंखो में भारीपन, जलन या सूखापन महसूस हो सकता है. कुछ लोगों को सुबह आंखों में भारीपन या असहजता महसूस हो सकती है.
  5. डायबिटीज और इंसुलिन रेजिस्टेंस: जब शरीर को सही नींद नहीं मिलती तो इंसुलिन सही से काम नहीं करता. इससे खून में शुगर का लेवल बढ़ने लगता है और टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है.

नीली और सफेद रोशनी सबसे ज्यादा नुकसानदेह

नाइट बल्ब में किस रंग की रोशनी है, यह भी बहुत मायने रखता है. नीले और सफेद रंग की रोशनी दिमाग को सबसे ज्यादा एक्टिव करती है. अगर आप मोबाइल चार्जिंग की लाइट, टीवी का इंडिकेटर या एलईडी नाइट बल्ब चालू रखते हैं तो यह मेलाटोनिन को सबसे तेजी से रोकती है. लाल या बहुत धीमी एम्बर लाइट का असर थोड़ा कम होता है, लेकिन पूरी सेहत के लिए अंधेरा ही सबसे बेहतर माना गया है.

डॉ. अजय चौधरी कहते हैं कि कई लोग नाइट बल्ब से ज्यादा मोबाइल और टीवी की रोशनी से प्रभावित होते हैं. सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करना बेहतर विकल्प माना जाता है.

अच्छी और गहरी नींद के लिए अपनाएं ये आसान टिप्स

  • कमरे में पूरा अंधेरा रखें: सोते समय सभी लाइट्स बंद कर दें. अगर बाहर से स्ट्रीट लाइट आ रही हो तो मोटे परदों का इस्तेमाल करें.
  • आई मास्क का उपयोग करें: अगर किसी वजह से कमरे में अंधेरा करना मुमकिन नहीं है, तो आप आंखों पर स्लीपिंग मास्क लगा सकते हैं.
  • गैजेट्स को दूर रखें: सोने से कम से कम आधा घंटा पहले मोबाइल, लैपटॉप और टीवी से दूरी बना लें.
  • अगर बल्ब जरूरी ही हो: छोटे बच्चों या बुजुर्गों के लिए अगर रोशनी जरूरी है, तो बहुत धीमी और लाल या वॉर्म टोन वाली लाइट का इस्तेमाल करें, वह भी जमीन के पास नीचे की तरफ ताकि सीधी आंख पर रोशनी न पड़े.

रात की नींद शरीर और दिमाग की रिपेयरिंग का वक्त होती है. अगर आप रोजाना नाइट बल्ब जलाकर सो रहे हैं तो अनजाने में अपनी सेहत को नुकसान पहुंचा रहे हैं. इसलिए आज ही से इस आदत को बदले और अपने कमरे को बिल्कुल शांत और अंधेरा बनाकर सुकून भरी नींद लें.

FAQ

क्या नाइट बल्ब जलाकर सोना नुकसानदायक है?

हल्की रोशनी कुछ लोगों की नींद की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है.

सोने के लिए कौन सा रंग सबसे बेहतर है?

विशेषज्ञ आमतौर पर कम रोशनी और अंधेरे वातावरण को बेहतर मानते हैं.

मेलाटोनिन क्या होता है?

मेलाटोनिन एक हार्मोन है जो शरीर को सोने का संकेत देता है.

क्या मोबाइल की रोशनी भी नींद खराब करती है?

स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी नींद के पैटर्न को प्रभावित कर सकती है.

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