सुबह आंख खुलते ही फोन उठाना, नोटिफिकेशन चेक करना और रात को सोने से पहले रील्स देखते-देखते नींद आ जाना. Gen Z की जिंदगी में स्क्रीन अब सिर्फ एक डिवाइस नहीं, बल्कि रोजमर्रा की दिनचर्या का हिस्सा बन चुकी है. सवाल ये है कि क्या ये बढ़ता स्क्रीन टाइम सिर्फ आंखों को नुकसान पहुंचा रहा है या आपके ब्रेन की सेहत पर भी असर डालता है? इस विषय को समझने के लिए हमने फोर्टिस हॉस्पिटल के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. विनीत बंगा से बातचीत की. डॉक्टर कहते हैं कि काफी ज्यादा स्क्रीन टाइम को सीधे तौर पर स्ट्रोक की वजह नहीं माना जा सकता, लेकिन इसके साथ जुड़ी लाइफस्टाइ ऐसी कई स्थितियां पैदा कर सकती है, जो फ्यूचर में स्ट्रोक का खतरा बढ़ाती हैं.
समस्या स्क्रीन नहीं, जुड़ी लाइफस्टाइल है
घंटों मोबाइल, लैपटॉप या टैबलेट पर समय बिताने से अक्सर लोगों की फिजिकल एक्टिविटी कम हो जाती हैं. देर रात तक स्क्रीन देखने की वजह से नींद प्रभावित होती है और लगातार ऑनलाइन रहने का प्रेशर दिमाग पर बढ़ जाता है. धीरे-धीरे यही आदतें शरीर पर असर डालने लगती हैं.
डॉ. बंगा बताते हैं कि जब खराब नींद, शारीरिक रूप से स्थिर होना और तनाव लंबे समय तक बने रहते हैं, तो उनका असर ब्लड प्रेशर, वजन और मेटाबॉलिक हेल्थ पर पड़ सकता है. यही वे कारक हैं, जो आगे चलकर स्ट्रोक के रिस्क को बढ़ाने में भूमिका निभाते हैं.
सबसे बड़ा खतरा है हाई ब्लड प्रेशर
स्ट्रोक के लिए सबसे महत्वपूर्ण रिस्क कारकों में हाई ब्लड प्रेशर शामिल है. अगर इसके साथ धूम्रपान, बैलेंस डाइट और बैठे-बैठे रहने वाली जीवनशैली भी जुड़ जाए, तो खतरा और बढ़ सकता है.
यानी समस्या सिर्फ फोन देखने की नहीं है, बल्कि उस पूरी जीवनशैली की है जो स्क्रीन के इर्द-गिर्द बन जाती है. जब दिन का बड़ा हिस्सा एक जगह बैठे हुए बीतने लगे और शरीर की गतिविधियां लगातार कम हो जाएं, तब स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ने लगते हैं.
Gen Z को क्यों सतर्क रहने की जरूरत है?
डॉक्टर कहते हैं कि यंग एज में अक्सर स्ट्रोक को बुजुर्गों की बीमारी समझ ली जाती है, लेकिन बदलती जीवनशैली ने इस धारणा को चुनौती दी है. खराब नींद, स्ट्रेस, फास्ट फूड पर निर्भरता और घटती फिजिकल एक्टिविटी जैसी आदतें कम उम्र में भी स्वास्थ्य पर असर डाल सकती हैं.
डॉ. बंगा सलाह देते हैं कि स्क्रीन टाइम को कंट्रोल करना, पर्याप्त नींद लेना, रोजाना एक्सरसाइज करना, संतुलित आहार अपनाना और समय-समय पर ब्लड प्रेशर की जांच कराना दिमाग और दिल दोनों की सेहत के लिए जरूरी है.
स्ट्रोक के इन संकेतों को न करें इग्नोर
स्ट्रोक के मामले में समय सबसे महत्वपूर्ण होता है. अगर किसी व्यक्ति के चेहरे का एक हिस्सा अचानक लटक जाए, एक हाथ में कमजोरी महसूस हो या बोलने में परेशानी आने लगे, तो तुरंत मेडिकल हेल्थ लेनी चाहिए. जितनी जल्दी इलाज शुरू होता है, उतनी ही बेहतर रिकवरी की संभावना होती है.
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