सावन का नाम सुनते ही मन में झूला, बारिश और शिव जी की भक्ति का ख्याल आने लगता है. पंचांग के अनुसार इस साल सावन का पावन महीना 30 जुलाई, गुरुवार से प्रारंभ होगा और 28 अगस्त, शुक्रवार को श्रावण पूर्णिमा के साथ ही यह समाप्त हो जाएगा. इसी दिन रक्षाबंधन का त्योहार भी मनाया जाएगा. सावन के महीने में बहुत से लोग पूरे महीने का व्रत रखते हैं, तो कुछ लोग सिर्फ सावन सोमवार का व्रत करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि सावन में मौसम बदलने के कारण हमारी बॉडी का डाइजेशन थोड़ा धीमा हो जाता है? जी हां, इस मौसम में जितनी जरूरत भक्ति की है, उतनी ही जरूरत अपनी सेहत का ध्यान रखने की भी है. आइए जानते हैं कि सावन में आपको किन बातों का ख्याल रखना चाहिए.
सावन में क्यों बढ़ जाता है बीमारियों का खतरा?
सावन के आते ही हवा में नमी बढ़ जाती है. यह मौसम बैक्टीरिया और कीड़े-मकौड़ों के पनपने के लिए सबसे बेस्ट होता है. आयुर्वेद और मॉडर्न मेडिकल साइंस दोनों ही मानते हैं कि इस मौसम में हमारा मेटाबॉलिज्म सुस्त हो जाता है, जिससे भारी खाना पचाने में दिक्कत होती है. इसलिए, खान-पान में थोड़ी सी भी लापरवाही आपको बीमार बना सकती है.

सावन में बीमारियों से खुद को कैसे बचाएं. (Image NDTV)
सावन में क्या खाएं और किन चीजों से बचें?
- हरी पत्तेदार सब्जियों से दूरी- वैसे तो हरी सब्जियां सेहत के लिए अच्छी होती हैं, लेकिन सावन में पालक, पत्तागोभी और मेथी जैसी सब्जियों में बारीक कीड़े और बैक्टीरिया होने का डर सबसे ज्यादा रहता है. इसलिए इस महीने किन सब्जियों को खाने से बचें.
- दही और छाछ से परहेज- इस मौसम में दही या मट्ठा पीने से पेट खराब हो सकता है और वात दोष बढ़ सकता है. अगर दही खाना ही है, तो ताजी दही खाएं, खट्टी बिल्कुल नहीं.
- हल्का खाना- इस मौसम में अपनी सेहत को ध्यान में रखते हुए लाइट और हेल्दी चीजों को ही डाइट में शामिल करें. बहुत ज्यादा तेल या घी में तलकर पूड़ियां या पकौड़े खाने से पेट से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं.
- ज्यादा से ज्यादा पानी पीएं- बारिश के मौसम में अक्सर प्यास कम लगती है, जिससे शरीर में पानी की कमी हो जाती है. इसलिए खुद को हाइड्रेटेड रखने के लिए पानी, नारियल पानी और नींबू पानी पीएं.
क्या कहती है रिसर्च?
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (National Institutes of Health (NIH) - Gut Health and Seasonal Changes) की इस स्टडी में बताया गया है कि मौसम बदलने और हवा में नमी बढ़ने पर इंसान की आंतों (Gut) में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया का बैलेंस बिगड़ जाता है, जिससे हैवी फूड पचाने में मुश्किल होती है.
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