EPFO की कर्मचारी पेंशन स्कीम के तहत पेंशन की राशि 7500 रुपये करने की मांग की जा रही थी. कर्मचारियों को उम्मीद थी कि 8वें वेतन आयोग में इसकी सिफारिश की जाएगी. लेकिन हाल ही में इस पर संसद में सरकार ने साफ कर दिया है कि 1000 रुपये के पेंशन को बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है. इस खबर के बाद पेंशनधारकों में निराशा है. वहीं अब भारतीय मजदूर संघ (BMC) ने पेंशन समेत मजदूरों, कर्मचारियों, पेंशनरों और असंगठित क्षेत्र के कामगारों की लंबित समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर 17 अगस्त 2026 को पूरे देश में प्रदर्शन का आह्वान किया है.
BMS की केंद्रीय कार्य समिति KKS ने जुलाई में रांची में हुई बैठक में यह निर्णय लिया था. इसके तहत देश की सभी 28 राज्य इकाइयां और 42 औद्योगिक फेडरेशन जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन, रैलियां और धरने करेंगे. साथ ही जिला प्रशासन के माध्यम से प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री और श्रम मंत्री को ज्ञापन सौंपे जाएंगे.
दिल्ली में जंतर-मंतर पर महाधरना
दिल्ली प्रदेश BMS 17 अगस्त को सुबह 11 बजे नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर विशाल धरना-प्रदर्शन करेगा. BMS दिल्ली के महामंत्री डॉ दीपेंद्र चाहर ने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों, फेडरेशनों और यूनियनों से जुड़े हजारों कार्यकर्ता इसमें भाग लेंगे.
क्या है BMS की 12 प्रमुख मांगें
- EPS-95 पेंशन ₹7500 न्यूनतम, VDA और आयुष्मान भारत से जोड़ना
- ESI सीमा ₹21,000 से बढ़ाकर ₹42,000 करना
- EPF सीमा ₹15,000 से बढ़ाकर ₹30,000 करना
- बोनस नए श्रम कोड के अनुसार पूरे वेतन पर, गणना सीमा ₹7000 से ऊपर बढ़ाना
- ग्रेच्युटी 15 दिन से 30 दिन का वेतन, बिना किसी सीमा के
- न्यूनतम वेतन के लिए महंगाई आधारित वैज्ञानिक फॉर्मूला
- स्कीम वर्कर्स - आंगनवाड़ी, आशा, मिड-डे मील, NHM आदि का मानदेय बढ़ाना
- समान काम समान वेतन - सभी संविदा और आउटसोर्स कर्मियों को
- वेतन चोरी करने वाले ठेकेदारों और मैनपावर एजेंसियों को कड़ी सजा
- 5-दिवसीय बैंकिंग लागू करना
- सरकारी सेवाओं में सभी खाली पद शीघ्र भरना
- भारतीय श्रम सम्मेलन तुरंत बुलाना और पुरानी पेंशन योजना OPS बहाल करना
श्रम कोड और स्कीम वर्कर्स पर विरोध
BMS ने औद्योगिक संबंध संहिता IR Code और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य दशा संहिता OSH&WC Code के कई प्रावधानों का विरोध किया। संघ का कहना है कि इनसे श्रमिकों के अधिकार, नौकरी की सुरक्षा और सामाजिक संरक्षण कमजोर होते हैं. BMS ने मांग की कि सरकार केंद्रीय ट्रेड यूनियनों से औपचारिक बातचीत कर श्रम कोड्स में संशोधन करें
डॉ दीपेंद्र चाहर ने कहा कि 1975 में शुरू हुई आंगनवाड़ी योजना को लगभग 50 साल हो गए. 1 करोड़ से अधिक स्कीम वर्कर्स रोज 10-12 घंटे काम करते हैं, लेकिन आज भी उन्हें नियमित कर्मचारी का दर्जा नहीं मिला. सरकार को इनके भविष्य पर तुरंत चर्चा शुरू कर भारत के अनुरूप नई नीति बनानी चाहिए.
BMS ने अपील की है कि बैंक कर्मी, संविदा कर्मी, पेंशनर और असंगठित क्षेत्र के सभी कामगार 17 अगस्त को बड़े पैमाने पर प्रदर्शन में शामिल हों.
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