Senior Health Risks: आजकल कम उम्र में ही कई बीमारियां उभरने लगी हैं. लेकिन, जीवन के एक पड़ाव पर शरीर कई बीमारियों को लेकर सेंसिटिव हो जाता है. जब कोई व्यक्ति 90 साल या उससे ज्यादा की उम्र में पहुंचता है, तो यह अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि होती है. लेकिन, इस उम्र में शरीर की कार्यक्षमता पहले जैसी नहीं रहती. अंगों की क्षमता धीरे-धीरे कम होती है, इम्यूनिटी कमजोर पड़ती है और कई पुरानी बीमारियां उभरने लगती हैं. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि 85 के बाद कौन-सी स्वास्थ्य समस्याएं आमतौर पर देखी जाती हैं और उनसे कैसे बचाव किया जा सकता है.
85 की उम्र के बाद होने वाली बीमारियां | Diseases That Occur After the Age of 85
1. दिल से जुड़ी समस्याएं
बढ़ती उम्र में हार्ट की मसल्स कमजोर हो सकती हैं. हाई ब्लड प्रेशर, दिल की धड़कन इर्रेगुलर होना, हार्ट फेल्योर, ब्लॉकेज ये सब सामान्य है. सलिए रेगुलर ब्लड प्रेशर की जांच और हार्ट चेकअप जरूरी है.
2. सांस की दिक्कत
उम्र बढ़ने के साथ फेफड़ों की क्षमता बी घटती है. सांस फूलना, क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस, संक्रमण का खतरा बढ़ता है. हल्की सांस की तकलीफ भी गंभीर हो सकती है, इसलिए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.

3. हड्डियों और जोड़ों की कमजोरी
85 के बाद हड्डियां पतली और कमजोर हो जाती हैं. ऑस्टियोपोरोसिस, गठिया, गिरने का जोखिम. छोटा-सा गिरना भी फ्रैक्चर का कारण बन सकता है. कैल्शियम, विटामिन D और हल्की फिजिकल एक्टिविटी फायदेमंद हो सकती है.
4. डिमेंशिया और अल्जाइमर
इस उम्र में डिमेंशिया या अल्जाइमर जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. भूलने की आदत, उलझन, मूड में बदलाव, मानसिक सक्रियता, बातचीत और सामाजिक जुड़ाव मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है.
5. डायबिटीज और किडनी की समस्या
लंबे समय से चल रही डायबिटीज या ब्लड प्रेशर किडनी पर असर डाल सकते हैं. बार-बार पेशाब, सूजन थकान इन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
6. कमजोरी और पोषण की कमी
इस उम्र में भूख कम लगना आम बात है. इससे शरीर में पोषण की कमी हो सकती है. एनीमिया, वजन घटना, एनर्जी की कमी बैलेंस डाइट और पर्याप्त पानी पीना बहुत जरूरी है.

7. स्ट्रोक
हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट डिजीज स्ट्रोक का खतरा बढ़ाते हैं. इसके लक्षणों में अचानक कमजोरी, बोलने में दिक्कत, चेहरे का टेढ़ा होना. तुरंत इलाज जीवन बचा सकता है.
8. पार्किंसन रोग
85 की उम्र के बाद हाथ कांपना, संतुलन में समस्या, चलने में कठिनाई हो सकती है. यह एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है जो उम्र के साथ बढ़ सकती है.
9. सुनने और देखने की समस्याएं
उम्र बढ़ने का साथ मोतियाबिंद, ग्लूकोमा, सुनने की क्षमता कम होना भी परेशान करता है. रेगुलर आंख और कान की जांच लाइफ क्वालिटी बेहतर रखती है.
देखभाल कैसे करें?
- रेगुलर हेल्थ चेकअप
- समय पर दवाएं
- हल्की एक्सरसाइज
- बैलेंस डाइट
- परिवार का भावनात्मक सहयोग
परिवार का ध्यान और सपोर्ट बुजुर्गों के लिए सबसे बड़ी ताकत होता है. आज मेडिकल सुविधाएं पहले से बेहतर हैं. सही देखभाल और समय पर इलाज से 85 की उम्र के बाद भी हेल्थ और सम्मानजनक जीवन जिया जा सकता है.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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