भारतीय लोगों की थाली रोटी और चावल के बिना अधूरी मानी जाती है. भारत के कुछ हिस्सों में जहां रोटी ज्यादा खाई जाती है वहीं कुछ हिस्सों में चावल का सेवन काफी ज्यादा किया जाता है. लेकिन अक्सर लोगों के मन में सवाल रहता है कि सेहत के लिए रोटी बेहतर है या चावल? जो लोग वजन कम करने की सोच रहे होते हैं उनके मन में भी यह सवाल काफी ज्यादा आता है कि वजन कम करने के लिए क्या खाना सही है या रोटी और चावल क्या खाने से वजन नहीं बढ़ता है. तो आइए जानते हैं इसके बारे में-
रोटी और चावल में क्या अंतर है?
अगर पोषण की बात करें तो गेहूं की एक रोटी में लगभग 100 कैलोरी, कुछ मात्रा में प्रोटीन, फाइबर और बी कॉम्प्लेक्स विटामिन, आयरन व मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व मिलते हैं. वहीं एक कटोरी पके हुए सफेद चावल में करीब 240 कैलोरी, कार्बोहाइड्रेट और बहुत थोड़ी मात्रा में प्रोटीन होता है. आपको बता दें कि सफेद चावल की प्रोसेसिंग के दौरान कई माइक्रोन्यूट्रिएंट्स कम हो जाते हैं.
2012 में British Medical Journal (BMJ) में प्रकाशित एक मेटा-एनालिसिस में 3.5 लाख से ज्यादा लोगों के डेटा का विश्लेषण किया गया. शोध में पाया गया कि सफेद चावल का अधिक सेवन, खासकर एशियाई आबादी में, टाइप-2 डायबिटीज के बढ़े हुए जोखिम से जुड़ा था.
रोटी vs चावल: फटाफट जवाब |
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| वजन घटाने के लिए सिर्फ चावल छोड़ना जरूरी नहीं |
| रोटी में फाइबर और प्रोटीन ज्यादा होता है |
| सफेद चावल जल्दी पचता है, ब्लड शुगर तेजी से बढ़ा सकता है |
| ब्राउन राइस सफेद चावल से बेहतर विकल्प माना जाता है |
| वजन घटाने का सबसे बड़ा नियम है – कैलोरी कंट्रोल और फिजिकल एक्टिविटी |
रोटी और चावल का ब्लड शुगर पर असर
रोटी का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) सफेद चावल से कम होता है, इसलिए इससे ब्लड शुगर धीरे बढ़ता है. वहीं सफेद चावल जल्दी पचता है जिससे ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकता है. इसका मतलब यह नहीं कि चावल पूरी तरह छोड़ देना चाहिए. अगर चावल के साथ सलाद, हरी सब्जियां, दाल, पनीर या अन्य प्रोटीन स्रोस शामिल किए जाएं तो ब्लड शुगर को बेहतर तरीके से कंट्रोल में रखने में मदद मिल सकती है.
BMJ में प्रकाशित एक बड़े विश्लेषण के अनुसार, ज्यादा मात्रा में सफेद चावल खाने वालों में टाइप-2 डायबिटीज का खतरा अपेक्षाकृत अधिक पाया गया, खासकर एशियाई देशों में.
वजन घटाने के लिए रोटी या चावल?
वजन घटाने की बात करें तो केवल रोटी या चावल को दोष देना सही नहीं है. वजन तब बढ़ता है जब शरीर जरूरत से ज्यादा कैलोरी लेता है और फिजिकल एक्टिविटी कम होती है. इसलिए चाहे रोटी खाएं या चावल, मात्रा बैलेंस रखें और प्लेट का बड़ा हिस्सा सब्जियों, सलाद और प्रोटीन से भरें.
अगर आपका लक्ष्य वजन बढ़ाना या मसल्स बनाना है तो रोटी और चावल दोनों अच्छे ऑप्शन हो सकते हैं. इन्हें दाल, दूध, पनीर, अंडे या बाकी प्रोटीन युक्त चीजों के साथ खाने से शरीर को बेहतर पोषण मिलता है.
2022 की एक समीक्षा के अनुसार, ब्राउन राइस खाने वालों में टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम सफेद चावल खाने वालों की तुलना में कम देखा गया.
वजन घटाने का सबसे बड़ा फैक्टर कुल कैलोरी और फिजिकल एक्टिविटी है, केवल रोटी या चावल नहीं.
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चावल की बात करें तो ब्राउन राइस में फाइबर और पोषक तत्व सफेद चावल की तुलना में ज्यादा होते हैं, जबकि रेड राइस को भी पोषण के लिहाज से अच्छा ऑप्शन माना जाता है. वहीं नॉर्मल गेहूं की रोटी के मुकाबले बाजरा, ज्वार, रागी और बाकी अनाजों से बनी मल्टीग्रेन रोटी में ज्यादा फाइबर, विटामिन और मिनरल्स मिलते हैं.
कई क्लीनिकल ट्रायल्स के विश्लेषण में ब्राउन राइस को वजन घटाने के लिहाज से सफेद चावल पर हल्की बढ़त मिली.
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल :
क्या चावल खाने से वजन बढ़ता है?
नहीं, केवल चावल खाने से वजन नहीं बढ़ता. जरूरत से ज्यादा कैलोरी लेने पर वजन बढ़ता है.
वजन घटाने के लिए रोटी बेहतर है या चावल?
रोटी में फाइबर ज्यादा होता है, जिससे पेट लंबे समय तक भरा महसूस हो सकता है.
डायबिटीज में रोटी और चावल में क्या बेहतर है?
आमतौर पर रोटी का GI सफेद चावल से कम होता है, लेकिन मात्रा और पूरी डाइट भी महत्वपूर्ण है.
क्या ब्राउन राइस सफेद चावल से ज्यादा हेल्दी है?
ब्राउन राइस में फाइबर और कुछ पोषक तत्व अधिक होते हैं.
मल्टीग्रेन रोटी के क्या फायदे हैं?
इसमें सामान्य गेहूं की रोटी की तुलना में ज्यादा फाइबर, विटामिन और मिनरल्स मिल सकते हैं.
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