किडनी में एक बार पथरी होने के बाद कई लोगों में दोबारा पथरी बनने की समस्या देखी जाती है. अक्सर लोग इसे केवल पानी कम पीने या खान-पान की गलती से जोड़कर देखते हैं, लेकिन बार-बार पथरी बनने के पीछे शरीर में कुछ मेटाबॉलिक बदलाव, आनुवंशिक कारण, कुछ बीमारियां या पेशाब में पथरी बनाने वाले खनिजों का असंतुलन भी जिम्मेदार हो सकता है. ऐसे मामलों में केवल किडनी से पथरी निकाल देना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि यह पता लगाना जरूरी होता है कि पथरी बार-बार बन क्यों रही है.
सर गंगा राम अस्पताल, दिल्ली के सीनियर यूरोलॉजिस्ट डॉ. अश्विन माल्या के मुताबिक, “अगर किसी व्यक्ति को बार-बार किडनी स्टोन हो रहा है तो इसे केवल संयोग मानकर छोड़ना नहीं चाहिए. बार-बार पथरी बनने वाले मरीजों में यह समझना जरूरी है कि पथरी किस प्रकार की है और पेशाब में कैल्शियम, ऑक्सलेट, यूरिक एसिड या साइट्रेट जैसे तत्वों का स्तर क्या है. इसके आधार पर भविष्य में पथरी बनने के जोखिम को कम करने की रणनीति बनाई जा सकती है.”
कम पानी पीना सबसे आम कारणों में शामिल
शरीर में पानी की कमी होने पर पेशाब अधिक गाढ़ा हो जाता है. इससे कैल्शियम, ऑक्सलेट, यूरिक एसिड और अन्य खनिजों के क्रिस्टल बनने की संभावना बढ़ सकती है. गर्म मौसम, अधिक पसीना निकलना और पर्याप्त पानी न पीना इस जोखिम को बढ़ा सकता है.
हालांकि, हर बार पानी की कमी ही कारण हो, यह जरूरी नहीं है. अमेरिकन यूरोलॉजिकल एसोसिएशन की गाइडलाइन के अनुसार बार-बार पथरी बनने वाले मरीजों में मेटाबॉलिक जांच पर विचार किया जाना चाहिए. इसमें 24 घंटे के पेशाब की जांच से पेशाब की मात्रा, पीएच, कैल्शियम, ऑक्सलेट, यूरिक एसिड और साइट्रेट जैसे कई मानकों का मूल्यांकन किया जा सकता है.
क्या किसी दूसरी बीमारी का संकेत हो सकती है पथरी?
कुछ मामलों में बार-बार पथरी बनने के पीछे दूसरी स्वास्थ्य समस्या भी हो सकती है. उदाहरण के लिए हाइपरपैराथायरॉयडिज्म, गाउट, टाइप-2 डायबिटीज, कुछ आंतों से जुड़ी बीमारियां और बार-बार होने वाले यूरिन इंफेक्शन पथरी के जोखिम से जुड़े हो सकते हैं. कुछ दुर्लभ स्थितियों में शरीर में कैल्शियम या ऑक्सलेट के मेटाबॉलिज्म से संबंधित समस्या भी जिम्मेदार हो सकती है.
डॉ. माल्या कहते हैं, “अगर कम उम्र में पथरी शुरू हो गई है, परिवार में कई लोगों को पथरी की समस्या रही है, दोनों किडनी में पथरी है या बार-बार पथरी बन रही है, तो मरीज की विस्तृत जांच करना अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है. केवल तत्काल पथरी का इलाज करने के बजाय उसके कारण की पहचान करने पर ध्यान देना चाहिए.”
खान-पान भी डालता है असर
बहुत अधिक नमक का सेवन, अत्यधिक पशु प्रोटीन, पर्याप्त तरल पदार्थ न लेना और कुछ लोगों में ऑक्सलेट युक्त खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन पथरी के जोखिम को प्रभावित कर सकता है. हालांकि, हर मरीज के लिए एक जैसा डाइट प्लान सही नहीं होता. पथरी के प्रकार और मेटाबॉलिक जांच के आधार पर खान-पान में बदलाव किया जाना चाहिए.
पथरी निकलने के बाद भी फॉलोअप जरूरी
कई मरीज पथरी निकलने के बाद मान लेते हैं कि समस्या खत्म हो गई. लेकिन जिन लोगों में पथरी बार-बार बनती है, उनके लिए आगे की रोकथाम भी इलाज का महत्वपूर्ण हिस्सा है. जरूरत के अनुसार डॉक्टर पानी की मात्रा बढ़ाने, नमक कम करने, डाइट में बदलाव या कुछ मरीजों में दवाओं की सलाह दे सकते हैं.
डॉ. अश्विन माल्या का कहना है, “किडनी स्टोन का इलाज केवल पथरी निकालने तक सीमित नहीं होना चाहिए. बार-बार पथरी बनने वाले मरीज में उसका कारण पता लगाकर भविष्य में दोबारा पथरी बनने की संभावना को कम करना भी उतना ही जरूरी है. अगर किसी व्यक्ति को बार-बार स्टोन हो रहा है तो उसे यूरोलॉजिस्ट से मेटाबॉलिक मूल्यांकन के बारे में जरूर चर्चा करनी चाहिए.”
ये भी पढ़ें - क्या आपकी पेशाब की धार कमजोर हो गई है? यह चुपचाप किडनी को पहुंचा सकती है नुकसान
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं