Protein: फिटनेस की बात चले और प्रोटीन का नाम नहीं आए, अमूमन ऐसा नहीं होता. लेकिन प्रोटीन सिर्फ मसल्स बनाने की चीज नहीं है. यह लगभग हर जैविक प्रक्रियाओं के लिए जरूरी है. टिशू को दुरुस्त करने और इम्यून सिस्टम को बूस्ट करने से लेकर हॉर्मोन को बैलेंस करने और फिर मेटाबॉलिज्म को कंट्रोल में रखने तक प्रोटीन हर एक कदम पर चाहिए. स्वस्थ रहने के लिए हर दिन प्रोटीन चाहिए. इसमें अधिक कमी या फिर इसकी अधिकता भी एक समस्या है. इसके चलते रिकवर करने में अधिक समय लगता है. कमजोरी महसूस होती है और कई बीमारियां हो सकती हैं, जो लंबे समय तक सताती हैं. ऐसे में यदि आपको यह जानकारी हो कि शरीर को असल में कितना प्रोटीन चाहिए और यह किन स्रोतों से मिलेगा तो आप पूरी तरह स्वस्थ रहेंगे. यदि कोई बीमारी या सर्जरी हुई भी तो जल्द रिकवर करेंगे और बुढ़ापे में भी सेहत का साथ मिलेगा. प्रोटीन की इस जानकारी से आपकी जिन्दगी बदल सकती है. डॉ. आशीष गौतम (प्रिंसिपल डायरेक्टर, रोबोटिक एवं लेप्रोस्कोपिक सर्जरी, मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, पटपड़गंज, नई दिल्ली) ने इस बारे में पूरी जानकारी दी है.
प्रोटीन आपके शरीर के लिए क्या-क्या करता है?
आपकी मांसपेशियां, हड्डियाँ, त्वचा, बाल और अंदरूनी अंग सभी मज़बूत और स्वस्थ रहेंगे यदि आप उनकी प्रोटीन की ज़रूरत पूरी करते रहें. यह इंसान के जख्मी होने, बीमार होने या अन्य सामान्य कारणों से टिशू के क्षतिग्रस्त होने पर उन्हें रिकवर करने में मदद करता है. प्रोटीन से ही पाचन और मेटाबॉलिज़्म में मददगार एंज़ाइम बनते हैं. ब्लड शुगर, ग्रोथ और भूख पर नियंत्रण रखने वाले हॉर्माेन बनाने के लिए भी हमें प्रोटीन चाहिए. हमारे एंटीबॉडीज़ भी प्रोटीन से बनती हैं, इसलिए यह हमारे इम्यून सिस्टम के लिए भी जरूरी है. यह खून की नलियों में तरल की मात्रा सही रखने और हीमोग्लोबिन को ऑक्सीजन ले जाने में भी मदद करता है. पर्याप्त प्रोटीन नहीं मिलने पर मांसपेशियां तेज़ी से टूटती हैं और ठीक होने में भी अधिक समय लगता है.
प्रोटीन आखिर करता क्या है?
प्रोटीन आपके शरीर को अमीनो एसिड देता है जो मांसपेशियां बनने और दुरुस्त करने के लिए जरूरी है. यह इम्यून सिस्टम को एंटीबॉडी और इम्यून सेल्स बनाने में मदद करता है. खून का थक्का जमने, घाव भरने और कनेक्टिव टिशू को स्वस्थ रखने में भी प्रोटीन का काम महत्वपूर्ण है. यह शरीर में होने वाली रसायनिक प्रतिक्रियाओं पर नियंत्रण रखने वाले एंजाइम बना कर मेटाबॉलिज्म में भी मदद करता है. प्रोटीन पाचन की गति धीमा करता है और आपको पेट भरा होने की संतुष्टि देता है. इस तरह आप ज्यादा खाने से बचते हैं और आपका ब्लड शुगर लेवल स्थिर रहता है.
क्या बहुत अधिक प्रोटीन लेना भी बुरा है? बहुत अधिक का क्या अर्थ है?
लंबे समय तक बहुत अधिक प्रोटीन लेने से कुछ समस्याएं हो सकती हैं. किडनी के मरीज बहुत अधिक प्रोटीन लें तो उनकी किडनी और खराब हो सकती है. अधिक प्रोटीन लेने वाले यदि पर्याप्त पेय नहीं लेते हैं, तो डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है. अधिक प्रोटीन युक्त आहार में अक्सर फाइबर वाली चीजें कम हो जाती हैं, जिससे पाचन की समस्या और न्यूट्रिएंट्स का असंतुलन हो सकता है. एक स्वस्थ वयस्क को प्रतिदिन शरीर के वजन के हिसाब से 2.2 ग्राम प्रति किलोग्राम से अधिक प्रोटीन लेने की जरूरत नहीं है. इससे अधिक प्रोटीन - खास कर प्रोटीन सप्लीमेंट्स का नियमित सेवन लाभदायक नहीं है, बल्कि यह सेहत के लिए हानिकारक भी हो सकता है.
प्रोटीन के स्रोत
पशुओं पर आधारित प्रोटीन के स्रोत - अंडे, दूध, दही, पनीर, मछली, चिकन और मीट. इनमें आपके शरीर के लिए ज़रूरी सभी अमीनो एसिड हैं. पौधों पर आधारित प्रोटीन के स्रोत - दालें, मसूर, काला चना, बीन्स, सोया प्रोडक्ट्स, मूंगफली, नट्स, बीज और साबुत अनाज आदि. संभव है प्लांट प्रोटीन में सभी ज़रूरी अमीनो एसिड नहीं मिले, लेकिन दिन में अलग-अलग तरह के आहार लेने से ये ज़रूरतें पूरी हो सकती हैं. पौधे और पशु दोनों स्रोतों से मिलने वाले प्रोटीन संतुलन के साथ लें तो आपको ज्यादा सैचुरेटेड फैट लिए बिना पर्याप्त प्रोटीन मिल सकता है.

प्रतिदिन कितने ग्राम प्रोटीन लेना उचित होगा?
वयस्क पुरुष के लिए शरीर के प्रत्येक किलोग्राम वजन के हिसाब से लगभग 0.8 से 1 ग्राम प्रोटीन जरूरी है. वयस्क महिलाएं भी लगभग इतनी ही मात्रा में प्रोटीन लें. लेकिन गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाएं अधिक मात्रा में लें क्योंकि इससे दूध बनने और बच्चे को बढ़ने में मदद मिलेगी. बुढ़ापा में मांसपेशियां कमजोर होने से बचाने के लिए प्रतिदिन लगभग 1 से 1.2 ग्राम प्रति किलोग्राम वजन के हिसाब से अधिक प्रोटीन लेने की जरूरत है. बढ़ते बच्चों को भी अधिक प्रोटीन की जरूरत है. हालांकि प्रोटीन की यह मात्रा उनकी उम्र पर निर्भर करता है. यह प्रतिदिन 0.9 से 1.2 ग्राम प्रति किलोग्राम वजन तक होता है. शारीरिक रूप से अधिक एक्टिव या किसी बीमारी या सर्जरी से रिकवर करने वाले लोगों को भी ज्यादा प्रोटीन चाहिए.
बतौर प्रोटीन दालों की क्या अहमियत है?
हम भारतीयों के आहार में दालों की खास अहमियत रही है और ये प्रोटीन का महत्वपूर्ण स्रोत हैं. दालों में प्रोटीन, फाइबर, आयरन, पोटैशियम और कॉम्प्लेक्स कार्ब्स होते हैं. यह आपके पेट के लिए अच्छी चीज है. इससे आपको पेट भरा होने की संतुष्टि मिलती है और आपका ब्लड शुगर लेवल भी स्थिर रहता है. चावल या गेहूं जैसे अनाज से बनी चीजों के साथ दाल खाने से आपको सभी ज़रूरी अमीनो एसिड मिलते हैं. आहार में नियमित दाल लेना दिल की सेहत के लिए भी अच्छा है और इससे आपका वज़न भी नियंत्रण में रहता है. बतौर प्रोटीन दालें सस्ती हैं. हर जगह मिलती हैं और सभी उम्र के लोगों के लिए सही हैं.
दैनिक आहार में प्रोटीन का क्या रोल है?
प्रोटीन को लेकर याद रखने की बात यह भी है कि इकट्ठे ज्यादा खाने से बेहतर दिन भर में थोड़ी-थोड़ी मात्रा में प्रोटीन लेना है. इससे आपकी मांसपेशियां स्वस्थ रहती हैं और आपका एनर्जी लेवल भी बना रहता है. तो अपनी डाइट के हिसाब से आप हर दिन दालें, डेयरी प्रोडक्ट्स, नट्स, सीड्स, अंडे या लीन मीट खा सकते हैं. भारत में अधिकतर लोग न्यूट्रिएंट्स के लिए सप्लीमेंट्स के बजाय साबुत अनाज लेना पसंद करते हैं. संतुलित मात्रा में प्रोटीन लेने से इम्यून सिस्टम मजबूत होगा. आप शरीर से स्वस्थ रहेंगे और आपकी तंदुरुस्ती बनी रहेगी.
Gurudev Sri Sri Ravi Shankar on NDTV: Stress, Anxiety, से लेकर Relationship, Spirituality तक हर बात
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं