IMD Rain Alert: उत्तर भारत के कई राज्यों में अगले कुछ दिनों तक मौसम का मिजाज बदला रहने वाला है. आईएमडी (IMD) के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में 28 से 30 मई के बीच हल्की से भारी बारिश हो सकती है, जबकि हिमाचल प्रदेश में 28 और 29 मई को तेज बारिश का अनुमान है. इसके अलावा दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, पश्चिमी और उत्तर प्रदेश में 28 से 31 मई तक बारिश, आंधी, बिजली गिरने, तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है.
मौसम में यह बदलाव लोगों को भीषण गर्मी से राहत जरूर देगा, लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट डॉक्टर समीर भाटी का कहना है कि बारिश के बाद बढ़ने वाली नमी और उमस कई नई स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकती है. खासकर हीट स्ट्रेस, डिहाइड्रेशन, वायरल संक्रमण और मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों का खतरा इस दौरान तेजी से बढ़ जाता है. मौसम में अचानक बदलाव का असर सबसे ज्यादा बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों पर पड़ सकता है.
बारिश के बाद क्यों बढ़ती है उमस?
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, बारिश के बाद वातावरण में ह्यूमिडिटी यानी नमी का स्तर काफी बढ़ जाता है. जब बारिश रुकने के बाद तेज धूप निकलती है, तो हवा में मौजूद नमी गर्म होकर उमसभरा माहौल बना देती है.
ऐसी स्थिति में शरीर से निकलने वाला पसीना जल्दी सूख नहीं पाता, जिससे शरीर का टेंपरेचर कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है. यही वजह है कि कई बार बारिश के बाद मौसम पहले से ज्यादा चिपचिपा और थकाने वाला महसूस होता है.

हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन का खतरा क्यों बढ़ता है?
डॉक्टर भाटी बताते हैं कि, उमस भरे मौसम में शरीर लगातार पसीना छोड़ता है. इससे शरीर में पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी होने लगती है. अगर समय पर पर्याप्त पानी न पिया जाए, तो डिहाइड्रेशन, सिरदर्द, कमजोरी, चक्कर और थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं.
हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, लंबे समय तक गर्म और उमसभरे वातावरण में रहने से हीट एग्जॉशन और हीट स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ जाता है. बाहर काम करने वाले लोग, डिलीवरी स्टाफ, मजदूर और ट्रैफिक में लंबे समय तक रहने वाले लोग ज्यादा जोखिम में होते हैं.
बारिश के बाद डेंगू और वायरल संक्रमण का खतरा
डॉक्टर समीर भाटी के अनुसार, बारिश के बाद कई इलाकों में पानी जमा हो जाता है, जो मच्छरों के प्रजनन के लिए आइडियल कंडीशन बनाता है. इससे डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ सकता है.
इसके अलावा अधिक नमी बैक्टीरिया और फंगस को भी तेजी से फैलने में मदद करती है. इससे स्किन एलर्जी, फंगल इंफेक्शन, वायरल फीवर, सर्दी-जुकाम और पेट संबंधी संक्रमण बढ़ सकते हैं. गंदा पानी और खुले में रखा भोजन फूड पॉइजनिंग की वजह भी बन सकता है.
मौसम बदलने पर कैसे रखें खुद को सुरक्षित?
- दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी, नींबू पानी और ORS लें.
- दोपहर की तेज धूप और उमस में ज्यादा देर तक बाहर न रहें.
- घर और आसपास पानी जमा न होने दें.
- मच्छरों से बचाव के लिए रिपेलेंट और पूरी बाजू के कपड़े पहनें.
- हल्का, ताजा और साफ भोजन करें.
- बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों का खास ध्यान रखें.
मौसम की राहत को हल्के में न लें:
बारिश और तेज हवाएं भले ही गर्मी से राहत दें, लेकिन इसके बाद बढ़ने वाली उमस और नमी सेहत के लिए नई चुनौतियां पैदा कर सकती हैं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि मौसम के इस बदलाव के दौरान सतर्क रहना बेहद जरूरी है.
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