हम सब जानते हैं कि आजकल भागदौड़ भरी जिंदगी में छोटी-मोटी बीमारी होते ही लोग सीधे अंग्रेजी दवाइयों की तरफ भागते हैं. लेकिन हमारे देश की मिट्टी में कुदरत ने ऐसे-ऐसे पेड़-पौधे दिए हैं जो बड़ी से बड़ी परेशानी को खत्म करने में मदद कर सकते हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समय-समय पर अपने भाषणों और मन की बात कार्यक्रम में देश के अलग-अलग कोनों में मिलने वाली ऐसी ही देसी जड़ी-बूटियों का जिक्र किया है. आइए जानते हैं कि मोरिंगा, शतावरी, सर्पगंधा, लकाडोंग हल्दी और अन्य पौधों के पारंपरिक उपयोग क्या हैं और इन्हें लेकर क्या माना जाता है.
मजे की बात यह है कि पीएम मोदी ने सिर्फ इन पौधों का नाम ही नहीं लिया, बल्कि उन आम किसानों और वैद्यों की भी तारीफ की जो इन्हें बचाकर रखे हुए हैं. चलिए आज बहुत ही आसान भाषा में समझते हैं कि पीएम मोदी द्वारा चर्चा में लाई गई ये जड़ी-बूटियां आखिर हैं क्या और एक आम इंसान के रोजमर्रा के जीवन में ये कैसे काम आ सकती हैं.
डॉ. राम अवतार, आयुर्वेदाचार्य, योग गुरु एवं प्राकृतिक चिकित्सा विशेषज्ञ, कहते हैं:
"भारत में इस्तेमाल होने वाली कई परंपरागत औषधीय जड़ी-बूटियां जैसे मोरिंगा (सहजन), शतावरी, सर्पगंधा, भृंगराज और हल्दी का वर्णन आयुर्वेदिक ग्रंथों में मिलता है. इन पौधों का उपयोग सदियों से स्वास्थ्य को सहारा देने और शरीर के प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने के लिए किया जाता रहा है. हालांकि, हर जड़ी-बूटी का प्रभाव व्यक्ति की उम्र, प्रकृति और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग हो सकता है. इसलिए किसी भी औषधीय पौधे या हर्बल सप्लीमेंट का नियमित सेवन शुरू करने से पहले योग्य आयुर्वेद चिकित्सक या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है."
1. PM Modi ने 2019 में जिस 'सोलो' पौधे का जिक्र किया, वह क्या है?
साल 2019 में जब लद्दाख को लेकर चर्चा हो रही थी, तब पीएम मोदी ने 'सोलो' नाम के एक खास पौधे का जिक्र किया था. साइंटिफिक भाषा में इसे रोडियोला भी कहा जाता है.
यह पौधा बर्फ और कड़ाके की ठंड वाले ऊंचे पहाड़ों पर उगता है. लद्दाख के स्थानीय लोग इसे किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं मानते. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह शरीर की रोग प्रतिरोधक छमता को बहुत तेजी से बढ़ाता है. जो लोग अक्सर थकान महसूस करते हैं या जिन्हें सांस फूलने की परेशानी रहती है, उनके लिए यह बहुत लाभकारी माना जाता है.
2. मोरिंगा पराठा क्यों खाते हैं PM Modi? जानें सहजन के पारंपरिक फायदे
कोरोना के समय साल 2020 में पीएम मोदी ने अपनी डाइट का एक राज साझा किया था. उन्होंने बताया था कि वो हफ्ते में एक-दो बार मोरिंगा यानी सहजन के पत्तों का पराठा जरूर खाते हैं. इसके बाद तो सहजन पूरे देश में सुपरफूड बन गया.
सहजन की फली की सब्जी तो हम सबने खाई होगी, लेकिन इसके पत्ते पोषण का खजाना हैं. अगर आपके जोड़ों में दर्द रहता है या कैल्शियम की कमी है, तो सहजन से बेहतर कुछ नहीं. यह पेट को एकदम साफ रखता है और बदन में नई ताकत भर देता है. इसे अपनी दाल में या पराठे के आटे में मिलाकर कोई भी आम इंसान बड़े आराम से खा सकता है.
3. शतावरी, अशोक और सर्पगंधा को आयुर्वेद में क्यों माना जाता है खास?
सितंबर 2021 में ओडिशा के एक वैद्य पटायत साहू जी की तारीफ करते हुए पीएम ने कई पारंपरिक पौधों का नाम लिया था. ये वो औषधियां हैं जो सदियों से हमारे घरों के आसपास इस्तेमाल होती आई हैं.
शतावरी: यह शरीर की कमजोरी दूर करने और हार्मोन्स का संतुलन ठीक रखने में बहुत असरदार मानी जाती है.
अशोक: महिलाओं की सेहत और पेट से जुड़ी दिक्कतों के लिए अशोक की छाल रामबाण इलाज है.
सर्पगंधा: आजकल हर दूसरे इंसान को हाई ब्लड प्रेशर और अनिद्रा यानी नींद न आने की बीमारी है. सर्पगंधा मन को शांत करके अच्छी नींद लाने में बहुत मदद करता है.
4. भृंगराज को बालों के लिए क्यों जाना जाता है?
उसी दौरान भृंगराज का नाम भी आया था. आज के समय में बाल झड़ना और समय से पहले सफेद होना आम बात हो गई है.
भृंगराज का तेल या लेप बालों की जड़ों को मजबूत बनाता है. अगर दिमाग में बहुत ज्यादा तनाव रहता है, तो भृंगराज के तेल की मालिश से बहुत ठंडक और राहत मिलती है.

5. काली हल्दी और मुसली का आयुर्वेदिक महत्व
मध्य प्रदेश के रामलोटन कुशवाहा जी का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कुछ बहुत दुर्लभ जड़ी-बूटियों की बात की थी. इनमें काली हल्दी, सफेद मुसली और काली मुसली शामिल थीं.
काली हल्दी आम पीली हल्दी से काफी अलग होती है और यह पुराने से पुराने दर्द और सूजन को मिटाने के काम आती है. सफेद और काली मुसली को आयुर्वेद में दुर्बलता मिटाने और शारीरिक स्टैमिना बढ़ाने वाली ताकतवर औषधी माना गया है. जो लोग दिनभर की मेहनत के बाद बदन टूटने जैसा महसूस करते हैं, उनके लिए यह प्राकृतिक टॉनिक की तरह है.
6. लकाडोंग हल्दी क्या है और यह चर्चा में क्यों रहती है?
साल 2023 में पीएम मोदी ने पूर्वोत्तर के मेघालय की लकाडोंग हल्दी का विशेष रूप से नाम लिया था.
आम हल्दी के मुकाबले इस हल्दी में करक्यूमिन की मात्रा बहुत ज्यादा होती है. करक्यूमिन ही हल्दी का वो असली तत्व है जो कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ने और शरीर के अंदरूनी जख्म भरने में मदद कर सकता है. अगर रात को गुनगुने दूध में चुटकी भर अच्छी हल्दी मिलाकर पी जाए, तो सर्दी-जुकाम और इंफेक्शन पास भी नहीं फटकते.
7. करुनेच्ची और Cat's Whiskers जैसे दुर्लभ औषधीय पौधे
सितंबर 2024 में तमिलनाडु के मदुरै की एक शिक्षिका सुभाश्री जी के हर्बल गार्डन की बात करते हुए पीएम ने करुनेच्ची और कैट्स व्हिस्कर्स जैसे औषधीय पौधों का जिक्र किया.
करुनेच्ची पारंपरिक तमिल और सिद्ध चिकित्सा में सांस की नली साफ रखने और कफ निकालने के लिए जानी जाती है. कैट्स व्हिस्कर्स एक ऐसा पौधा है जिसे गुर्दे यानी किडनी की सफाई और यूरिन इन्फेक्शन में बहुत असरदार माना जाता है.
क्या इन जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल हर किसी के लिए सुरक्षित है?
देखा जाए तो पीएम मोदी की बातों का सीधा मतलब यही था कि हमें अपनी पुरानी देसी पद्धतियों को भूलना नहीं चाहिए. जरूरी नहीं कि आप बहुत महंगी जड़ी-बूटियां बाजार से खरीदें. आप अपने गमले में सहजन, भृंगराज या सामान्य जड़ी-बूटियां आसानी से उगा सकते हैं.
चाय बनाते समय थोड़ी सी औषधीय पत्तियां डाल लें.खाने में अच्छी हल्दी और सहजन की पत्तियों का इस्तेमाल शुरू करें.जब भी बदन दर्द या पेट की शिकायत हो, तो तुरंत अंग्रेजी गोली खाने के बजाय किसी अच्छे जानकार से पूछकर इन घरेलू जड़ी-बूटियों का काढ़ा आजमाएं.
हमारे देश के जंगलों और खेतों में कुदरत ने सेहत की पूरी दुकान खोल रखी है. बस जरूरत इस बात की है कि हम इन्हें पहचाने और अपनी रोज की जिंदगी का हिस्सा बनाएं ताकि डाक्टर के पास जाने की नौबत ही न आए.
महत्वपूर्ण नोट: इस लेख में बताई गई जानकारी पारंपरिक उपयोग और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध स्रोतों पर आधारित है. किसी बीमारी के इलाज, दवा बंद करने या नया हर्बल सप्लीमेंट शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग्य आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें.
क्या कहते हैं आयुर्वेद विशेषज्ञ?
डॉ. राम अवतार के अनुसार,
- सहजन (मोरिंगा) पोषक तत्वों से भरपूर माना जाता है.
- शतावरी और अशोक का उपयोग आयुर्वेद में महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी पारंपरिक तैयारियों में किया जाता है.
- सर्पगंधा का उपयोग केवल विशेषज्ञ की निगरानी में ही करना चाहिए.
- भृंगराज को बालों और सिर की त्वचा की देखभाल से जोड़कर देखा जाता है.
- हल्दी में मौजूद करक्यूमिन को सूजनरोधी गुणों के लिए जाना जाता है.
नोट: जड़ी-बूटियां किसी बीमारी के इलाज का विकल्प नहीं हैं. किसी भी स्वास्थ्य समस्या में डॉक्टर की सलाह जरूर लें.
FAQs-
PM Modi ने मोरिंगा का जिक्र कब किया था?
कोविड काल के दौरान पीएम मोदी ने बताया था कि वह मोरिंगा (सहजन) के पत्तों का पराठा खाते हैं.
लकाडोंग हल्दी क्या है?
यह मेघालय में उगने वाली हल्दी की एक विशेष किस्म है जो उच्च कर्क्यूमिन सामग्री के लिए जानी जाती है.
सर्पगंधा किस लिए जानी जाती है?
आयुर्वेद में सर्पगंधा का उपयोग पारंपरिक रूप से मानसिक शांति और रक्तचाप प्रबंधन से जोड़ा जाता है.
शतावरी का पारंपरिक उपयोग क्या है?
आयुर्वेद में शतावरी को महिलाओं के स्वास्थ्य और सामान्य पोषण के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है.
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