Fake Currency Coin: सहारनपुर पुलिस और एसओटी की संयुक्त टीम ने 25 साल से चल रहे एक बड़े फर्जी सिक्के बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है. शुरुआती जांच में 70 करोड़ रुपये से ज्यादा के नकली सिक्के शराब के ठेकों, टोल प्लाजा और छोटे दुकानदारों के जरिए बाजार में खपाने का अनुमान लगाया जा रहा है. इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से पंजाब के मोहाली निवासी मुख्य सरगना उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह समेत 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है.
बताया जा रहा है कि मास्टरमाइंड उपकार लूथरा वर्ष 2001 से नकली सिक्के बनाने के अवैध धंधे में शामिल रहा है. इस पर दिल्ली पुलिस की ओर से पहले भी एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया जा चुका है. यह सहारनपुर में नया अड्डा बनाकर बड़े पैमाने पर सिक्के ढालने के काम में जुटा था.
रोजाना बनाए जाते थे 12,000 नकली सिक्के
पुलिस छापेमारी के दौरान मौके से 6 बड़ी औद्योगिक मशीनें, लोहे की मुहर लगी व बिना मुहर की डाई, पॉलिशिंग मशीन, घिसाई के पत्थर, आरी और दूसरे उपकरण बरामद किए गए हैं. पुलिस के मुताबिक यह कोई छोटा मोटा जुगाड़ नहीं, बल्कि एक पूरा इंडस्ट्रियल प्लांट स्थापित किया गया था, जिसकी रोजाना 20 रुपये के लगभग 12,000 सिक्के तैयार करने की क्षमता थी. यहां सिक्कों को ढालने के बाद उन्हें असली जैसा चमकाने के लिए विशेष ब्रश, घिसाई पत्थर और डाई पॉलिशिंग मशीनों का इस्तेमाल किया जाता था, ताकि आम लोग पहली नज़र में धोखा खा जाएं.
70 करोड़ से अधिक के सिक्के बाजार में खपाने का अनुमान
एसएसपी अभिनंदन ने बताया कि गिरोह ने अब तक बाजार में कितने करोड़ के सिक्के चलाए हैं, इसका सटीक आंकड़ा खंगाला जा रहा है. हालांकि, शुरुआती पूछताछ और नेटवर्क के आधार पर 70 करोड़ रुपये से अधिक के नकली सिक्के बाजार में खपाए जाने की आशंका है. कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से लेन-देन के हिसाब-किताब वाले 7 रजिस्टर और 8 मोबाइल फोन जब्त किए हैं. इन दस्तावेजों से उन खरीदारों और एजेंटों के नाम सामने आने की उम्मीद है, जो देश के अलग-अलग राज्यों में इन सिक्कों की सप्लाई करते थे.
शराब के ठेकों, टोल प्लाजा और छोटे कारोबारियों को बनाते थे शिकार
यह गिरोह नकली सिक्कों को ऐसी जगहों पर खपाता था, जहां रोजाना भारी मात्रा में छोटे नकद का लेनदेन होता है. ये लोग इन नकली सिक्कों को खपाने के लिए शराब के ठेके, टोल प्लाजा, सब्जी मंडी और छोटे व्यापारियों तक अपना नेटवर्क बना रखा था.
- शराब के ठेके : जहां भीड़भाड़ में सिक्कों की जांच नहीं होती.
- टोल प्लाजा : जहां गाड़ियों की आवाजाही के दौरान जल्दबाजी में सिक्के स्वीकार कर लिए जाते हैं.
- सब्जी मंडी और छोटे व्यापारी: जहां एक दो सिक्कों को बारीकी से देखने का समय नहीं होता.
नकली 10 और 20 रुपये के सिक्के ऐसे पहचानें
| फीचर | असली सिक्का | नकली सिक्का |
| वजन और मोटाई | RBI की ओर से निर्धारित मानक वजन और एक समान मोटाई. | हल्का, असमान मोटाई या किनारों से खुरदुरा |
| अशोक स्तंभ और सत्यमेव जयते | बेहद साफ, उभरा हुआ और स्पष्ट फिनिशिंग | धुंधला, कम उभरा हुआ या असंतुलित प्रिंट |
| रिंग और धातु का जोड़ | असली सिक्के में धातुओं का जोड़ बिल्कुल सीमलेस और मजबूत होता है. | सेंटर रिंग ढीली या दोनों धातुओं के जोड़ पर गैप या निशान दिख सकते हैं. |
| चमक और पॉलिश | धातु की प्राकृतिक चमक होती है जो लंबे समय तक रहती है. | केमिकल पॉलिश की गंध या छूने पर रंग छूटने का अहसास. |
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