नशा एक बहुत ही गंभीर समस्या बन चुका है. जहां कई लोग इसे सिर्फ एक बुरी आदत या शौक मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, तो कुछ लोग ऐसे हैं जो इसे तनाव दूर करने का तरीका समझते हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में नशे की बढ़ती लत एक बड़ी चिंता बनकर सामने आई है. शराब, सिगरेट, तंबाकू, गांजा और सिंथेटिक ड्रग्स जैसी चीजें बड़ी संख्या में युवाओं को अपनी गिरफ्त में ले रही हैं.
इसी खतरे को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान' की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य युवाओं को नशे के नुकसान के बारे में जागरूक करना और उन्हें स्वस्थ जीवन अपनाने के लिए प्रेरित करना भी है.
प्रधानमंत्री ने वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए 'नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान' की शुरुआत करते हुए कहा कि विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा, जब देश का युवा शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत होगा और किसी भी तरह के नशे से दूर रहेगा.
क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े?
भारत में नशे की समस्या तेजी से बढ़ रही है. इसका अंदाजा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय और एम्स के नेशनल ड्रग डिपेंडेंस ट्रीटमेंट सेंटर की रिपोर्ट 'भारत में मादक पदार्थों के सेवन का परिमाण' से लगाया जा सकता है.
रिपोर्ट के अनुसार, 10 से 75 साल की उम्र के करीब *16 करोड़ लोग शराब पीते हैं. इनमें 5.2 करोड़ से ज्यादा लोग जरूरत से ज्यादा शराब पीने की वजह से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे हैं. सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि 18 से 25 साल के युवाओं में शराब पीने की आदत तेजी से बढ़ रही है.
नशा शरीर को कैसे नुकसान पहुंचाता है?
लिवर और दिल पर असर:
ज्यादा शराब पीने से लिवर धीरे-धीरे खराब होने लगता है, इससे लिवर सिरोसिस और लिवर फेल होने जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं साथ ही हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ जाता है.
दिमाग और नसों पर असर:
नशीले पदार्थ सीधे दिमाग और तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करते हैं, इससे सोचने-समझने की क्षमता कम हो सकती है, याददाश्त कमजोर पड़ सकती है और व्यक्ति का व्यवहार भी बदलने लगता है.
फेफड़ों की सेहत बिगड़ती है
सिगरेट, बीड़ी, हुक्का और गांजे का धुआं फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है. लंबे समय तक इसका सेवन करने से सांस संबंधी बीमारियां और फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ सकता है.
मानसिक स्वास्थ्य पर असर
नशे की लत डिप्रेशन, चिंता, चिड़चिड़ापन और अकेलेपन जैसी समस्याओं को जन्म दे सकती है. कई बार व्यक्ति अपने परिवार और दोस्तों से भी दूर होने लगता है.
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